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जाट नेताओं ने आरक्षण पर स्टे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:30 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की ओर से जाट समेत छह जातियों के आरक्षण पर लगे स्टे पर सात महीने की रोक को जाट नेताओं ने प्रदेश सरकार की नाकामी बताया। जाट समाज के लोगों ने कहा कि सरकार ने सही पैरवी नहीं की।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करने की बजाय जाट समाज के नेताओं ने सीधे तौर पर सरकार को घेरा। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के मुख्य महासचिव रामभगत मलिक ने कहा कि हमने अदालत से आरक्षण नहीं मांगा। हमने प्रदेश और केंद्र सरकार से आरक्षण मांगा था। आरक्षण के लिए बनाए गए कानून में कहां चूक रही, यह सरकार बताए। पिछले करीब एक साल से आरक्षण पर स्टे है। जाट समाज के युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही। अगर सरकार ने सही से काम किया होता तो सरकार के पक्ष में फैसला आना चाहिए था। भाजपा सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकार के कानून को धोखा बताते हुए कहा था कि हम पक्का आरक्षण देंगे। भाजपा का पक्का आरक्षण तो एक महीने भी नहीं चला। अदालत में इस पर लगातार स्टे मिलना सरकार की नाकामी है। इसके लिए सरकार जाट समेत छह जातियों को जवाब दे। सरकार आयोग में सही आंकडे़ और रिपोर्ट देकर जल्द आरक्षण बहाल कराए।
2019 तक लटकाना सरकार की साजिश
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पूर्व जिला अध्यक्ष कृष्ण किरमारा ने कहा कि सरकार की नीयत सही नहीं है। हमारी मांग आरक्षण थी। अब तक आरक्षण तो मिला ही नहीं। जाट समेत छह जातियों के लोगों को धोखा देने कोशिश की जा रही है। सरकार 2019 के चुनाव तक इसे लटकाना चाहती है। सरकार ने एक भी समझौते को पूरा नहीं किया। हमारे युवाओं पर बने केस भी वापस नहीं लिए।
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13 को मय्यड़ में अगली रणनीति करेंगे तय
अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के पूर्व जिला अध्यक्ष दलजीत पंघाल ने कहा कि सरकार ने एक साजिश के तहत कमजोर कानून बनाया, जिसे महज महीनेभर में ही अदालत में स्टे हो गया। पिछले एक साल से ज्यादा समय से इस पर स्टे चल रहा है। सरकार हर स्तर पर जाटों से धोखा कर रही है। 29 लोगों का बलिदान देने के बाद भी आरक्षण नहीं दिया। 13 सितंबर को मय्यड़ में शहीदी दिवस पर अगली रणनीति तय करेंगे।
दो साल से लटकाया
शेर सिंह रतेेरा ने कहा कि सरकार पर जाट समाज को दबाव बनाना चाहिए। पिछले करीब दो साल से भी लंबे समय से जाट आरक्षण को लटकाया जा रहा है। सरकार की ओर से कहीं न कहीं कमजोरी रही, तभी तो आरक्षण पर लगातार स्टे आगे बढ़ रहा है। जाट समाज के लोगों को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।
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हिसार।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की ओर से जाट समेत छह जातियों के आरक्षण पर लगे स्टे पर सात महीने की रोक को जाट नेताओं ने प्रदेश सरकार की नाकामी बताया। जाट समाज के लोगों ने कहा कि सरकार ने सही पैरवी नहीं की।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करने की बजाय जाट समाज के नेताओं ने सीधे तौर पर सरकार को घेरा। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के मुख्य महासचिव रामभगत मलिक ने कहा कि हमने अदालत से आरक्षण नहीं मांगा। हमने प्रदेश और केंद्र सरकार से आरक्षण मांगा था। आरक्षण के लिए बनाए गए कानून में कहां चूक रही, यह सरकार बताए। पिछले करीब एक साल से आरक्षण पर स्टे है। जाट समाज के युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही। अगर सरकार ने सही से काम किया होता तो सरकार के पक्ष में फैसला आना चाहिए था। भाजपा सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकार के कानून को धोखा बताते हुए कहा था कि हम पक्का आरक्षण देंगे। भाजपा का पक्का आरक्षण तो एक महीने भी नहीं चला। अदालत में इस पर लगातार स्टे मिलना सरकार की नाकामी है। इसके लिए सरकार जाट समेत छह जातियों को जवाब दे। सरकार आयोग में सही आंकडे़ और रिपोर्ट देकर जल्द आरक्षण बहाल कराए।
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2019 तक लटकाना सरकार की साजिश
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पूर्व जिला अध्यक्ष कृष्ण किरमारा ने कहा कि सरकार की नीयत सही नहीं है। हमारी मांग आरक्षण थी। अब तक आरक्षण तो मिला ही नहीं। जाट समेत छह जातियों के लोगों को धोखा देने कोशिश की जा रही है। सरकार 2019 के चुनाव तक इसे लटकाना चाहती है। सरकार ने एक भी समझौते को पूरा नहीं किया। हमारे युवाओं पर बने केस भी वापस नहीं लिए।
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13 को मय्यड़ में अगली रणनीति करेंगे तय
अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के पूर्व जिला अध्यक्ष दलजीत पंघाल ने कहा कि सरकार ने एक साजिश के तहत कमजोर कानून बनाया, जिसे महज महीनेभर में ही अदालत में स्टे हो गया। पिछले एक साल से ज्यादा समय से इस पर स्टे चल रहा है। सरकार हर स्तर पर जाटों से धोखा कर रही है। 29 लोगों का बलिदान देने के बाद भी आरक्षण नहीं दिया। 13 सितंबर को मय्यड़ में शहीदी दिवस पर अगली रणनीति तय करेंगे।
दो साल से लटकाया
शेर सिंह रतेेरा ने कहा कि सरकार पर जाट समाज को दबाव बनाना चाहिए। पिछले करीब दो साल से भी लंबे समय से जाट आरक्षण को लटकाया जा रहा है। सरकार की ओर से कहीं न कहीं कमजोरी रही, तभी तो आरक्षण पर लगातार स्टे आगे बढ़ रहा है। जाट समाज के लोगों को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।