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सर्दी चरम पर है, अब तो विद्यार्थियों को यूनिफार्म के पैसे दे दो साहब
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राजकीय प्राइमरी स्कूल में अलग अलग वर्दी में मौजूद छात्र
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को वर्दी खरीदने के लिए शिक्षा विभाग हर साल भत्ता उपलब्ध कराता है। विभाग विद्यार्थियों को वर्दी भत्ता इसलिए देता है ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की एक अलग पहचान हो और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के साथ मुकाबला कर सकें। इसके साथ अभिभावकों पर बच्चों की शिक्षा को लेकर कोई बोझ नहीं रहे। वहीं जमीनी हकीकत कुछ और है, सत्र खत्म होने में बस तीन माह का समय शेष रह गया है और यह वर्दी भत्ता अभी तक विद्यार्थियों को नहीं मिला है। हालात यह है कि अधिकतर विद्यार्थी बिना वर्दी ही स्कूल आ रहे हैं और अधिकतर के पास गर्म कपड़े तक नहीं है। भयंकर ठंड में बिना गर्म कपड़ों के स्कूल आ रहे हैं। वर्दी के रुपये अभी तक जारी न होने का अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है। जिला अधिकारी मुख्यालय को जिम्मेदार बता रहे हैं तो मुख्यालय में बैठे अधिकारी नीचे बैठे अधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जबकि भत्ता जुलाई माह तक विद्यार्थियों के खाते में जमा हो जाना चाहिए थे।
गड़बड़ी रोकना विद्यार्थियों पर पड़ा भारी
शिक्षा विभाग पहले एसएमसी को बजट जारी करता था। एसएमसी खुद वर्दी खरीदकर विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाती थी। स्कूलों की दुकानों के साथ सेटिंग की शिकायतों के बाद सीधा विद्यार्थियों के बैंक खोते में जारी करना शुरू किया। पिछले तीन साल से विद्यार्थियों के खाते में रुपये आ रहे हैं।
शिक्षा विभाग ये देता है वर्दी भत्ता :
शिक्षा विभाग विद्यार्थियों को वर्दी भत्ता हर साल देता है। विभाग की तरफ से वर्दी खरीदने के लिए कक्षा पहली से पांचवी तक के विद्यार्थियों को 800 रुपये और कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को 1000 रुपये देता है।
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विद्यार्थियों की प्रदेश में स्थिति :
कक्षा पहली से पांचवी- 9,12,154
कक्षा छठी से आठवीं - 6,18,674
वर्जन
वर्दी के रुपये मुख्यालय से सीधा विद्यार्थियों के खाते में डाले जाने हैं। डाटा ज्यादा होने के कारण समय लग रहा है। उम्मीद है जल्द जारी हो जाएंगे।
-देवेंद्र कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
वर्जन
सेशन खत्म होने वाला है विद्यार्थियों के खाते में अभी तक रुपये नहीं पहुंचे हैं। सरकारी स्कूलों में जरूरतमंद परिवारों के ही ज्यादातर बच्चे पढ़ने के लिए आ रहे हैं। गर्मियां तो विद्यार्थियों ने जैसे-तैसे निकाल दी लेकिन सर्दी में विद्यार्थियों का दिक्कत आ रही है। विभाग को ऐसे जरूरी काम सत्र शुरू होने के साथ ही कर देने चाहिए। इतनी लापरवाही अच्छी नहीं है।
- देवेंद्र दहिया, राज्य मुख्य सलाहकार, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, हरियाणा।
वर्जन
मैं पिछले डेढ़ माह से ट्रेनिंग पर था, अभी आया हूं। मेरे संज्ञान में ये मामला अभी आया है। संबंधित अधिकारियों से देरी के कारणों का पता करता हूं। जल्द ही वर्दी भत्ता विद्यार्थियों के खाते में जारी कर दिया जाएगा।
-प्रदीप डागर, निदेशक, मौलिक शिक्षा विभाग।
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गड़बड़ी रोकना विद्यार्थियों पर पड़ा भारी
शिक्षा विभाग पहले एसएमसी को बजट जारी करता था। एसएमसी खुद वर्दी खरीदकर विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाती थी। स्कूलों की दुकानों के साथ सेटिंग की शिकायतों के बाद सीधा विद्यार्थियों के बैंक खोते में जारी करना शुरू किया। पिछले तीन साल से विद्यार्थियों के खाते में रुपये आ रहे हैं।
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शिक्षा विभाग ये देता है वर्दी भत्ता :
शिक्षा विभाग विद्यार्थियों को वर्दी भत्ता हर साल देता है। विभाग की तरफ से वर्दी खरीदने के लिए कक्षा पहली से पांचवी तक के विद्यार्थियों को 800 रुपये और कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को 1000 रुपये देता है।
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विद्यार्थियों की प्रदेश में स्थिति :
कक्षा पहली से पांचवी- 9,12,154
कक्षा छठी से आठवीं - 6,18,674
वर्जन
वर्दी के रुपये मुख्यालय से सीधा विद्यार्थियों के खाते में डाले जाने हैं। डाटा ज्यादा होने के कारण समय लग रहा है। उम्मीद है जल्द जारी हो जाएंगे।
-देवेंद्र कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
वर्जन
सेशन खत्म होने वाला है विद्यार्थियों के खाते में अभी तक रुपये नहीं पहुंचे हैं। सरकारी स्कूलों में जरूरतमंद परिवारों के ही ज्यादातर बच्चे पढ़ने के लिए आ रहे हैं। गर्मियां तो विद्यार्थियों ने जैसे-तैसे निकाल दी लेकिन सर्दी में विद्यार्थियों का दिक्कत आ रही है। विभाग को ऐसे जरूरी काम सत्र शुरू होने के साथ ही कर देने चाहिए। इतनी लापरवाही अच्छी नहीं है।
- देवेंद्र दहिया, राज्य मुख्य सलाहकार, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, हरियाणा।
वर्जन
मैं पिछले डेढ़ माह से ट्रेनिंग पर था, अभी आया हूं। मेरे संज्ञान में ये मामला अभी आया है। संबंधित अधिकारियों से देरी के कारणों का पता करता हूं। जल्द ही वर्दी भत्ता विद्यार्थियों के खाते में जारी कर दिया जाएगा।
-प्रदीप डागर, निदेशक, मौलिक शिक्षा विभाग।