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Fatehabad News: जलभराव से हरे चारे की फसलें नष्ट, पशुओं के लिए छाया संकट
Thu, 04 Sep 2025 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 04 Sep 2025 11:43 PM IST
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फतेहाबाद में गोशाला के लिए जाता हरा चारा। संवाद
फतेहाबाद। जिले में अत्यधिक बारिश के कारण पशुपालन और गोशालाओं पर असर पड़ने लगा है। लगातार हो रही बारिश और जलभराव के कारण गोशालाओं में हरे चारे की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे पशुओं के लिए हरे चारे का संकट छा गया है। गोशाला संचालकों ने किसानों ने अपील की है कि वे पशुओं के हरे चारे में मदद करें।
लगातार बारिश के कारण जिले के 100 से अधिक गावों में जलभराव हो गया है, जिससे हरे चारे की फसलें ज्वार, मक्का और बाजरा आदि खराब हो गई हैं। ऐसे में गोशाला संचालकों के लिए हरे चारे को गोशाला तक लेकर आना मुश्किल हो गया है। इस संकट से जूझ रहे गोशाला संचालकों के अनुसार अब रेतीली जमीन के क्षेत्र के गांव व हिसार से चारे की आवक हो रही है।
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हरे चारे के दाम में 100 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि
फतेहाबाद की हरियाणा गोशाला के प्रधान सुरेश गोयल ने बताया कि गोशाला में प्रतिदिन 200 क्विंटल हरे चारे की मांग है। लेकिन आपूर्ति इससे कम हो रही है। इससे पहले जो ज्वार या बाजरा 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिल रहा था, अब उसके भाव में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक का उछाल आया है।
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ज्वार की जगह बाजरे का चारा
गोशाला संचालकों ने बताया कि बारिश के कारण ज्वार की फसल नष्ट हो चुकी है। इससे उसकी आवक कम हो गई है। ऐसे में पशुओं के लिए बाजरे का चारा ही एकमात्र विकल्प बचा है। लेकिन इसकी भी कीमत बढ़ गई है, जिससे गोशालाओं की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हालांकि, बाजरे का चारा ज्वार की तुलना में कम पौष्टिक होता है, लेकिन संकट के इस दौर में गोशाला संचालक इसी से काम चलाने के लिए मजबूर हैं।
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हरे चारे की कमी से गोशालाओं में पशुओं की देखभाल एक बड़ी चुनौती बन गई है। गायों को हरे चारे के स्थान पर खल, बिनौला या अनाज देकर पूर्ति की जा रही है। हालांकि अभी तक हरा चारा भी मिल रहा है। ऐसे में किसानों से अपील है कि वे बाजरे की फसल का हरा चारे के लिए गोशाला से संपर्क करें। गोशाला में हरे चारे की आवश्यकता हैं।
सुरेश गोयल, हरियाणा गोशाला प्रधान, फतेहाबाद।
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रेतीले क्षेत्र में जलभराव की समस्या नहीं है ऐसे में यहां हरे चारे की पूर्ति पूरी हो जाती है। अगर बारिश लगातार होती है ताे हरे चारे का संकट छा सकता है।
रामसिंह कड़वासरा, संरक्षक श्री कृष्ण गोशाला मेहूवाला।
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लगातार बारिश के कारण जिले के 100 से अधिक गावों में जलभराव हो गया है, जिससे हरे चारे की फसलें ज्वार, मक्का और बाजरा आदि खराब हो गई हैं। ऐसे में गोशाला संचालकों के लिए हरे चारे को गोशाला तक लेकर आना मुश्किल हो गया है। इस संकट से जूझ रहे गोशाला संचालकों के अनुसार अब रेतीली जमीन के क्षेत्र के गांव व हिसार से चारे की आवक हो रही है।
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हरे चारे के दाम में 100 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि
फतेहाबाद की हरियाणा गोशाला के प्रधान सुरेश गोयल ने बताया कि गोशाला में प्रतिदिन 200 क्विंटल हरे चारे की मांग है। लेकिन आपूर्ति इससे कम हो रही है। इससे पहले जो ज्वार या बाजरा 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिल रहा था, अब उसके भाव में 100 रुपये प्रति क्विंटल तक का उछाल आया है।
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ज्वार की जगह बाजरे का चारा
गोशाला संचालकों ने बताया कि बारिश के कारण ज्वार की फसल नष्ट हो चुकी है। इससे उसकी आवक कम हो गई है। ऐसे में पशुओं के लिए बाजरे का चारा ही एकमात्र विकल्प बचा है। लेकिन इसकी भी कीमत बढ़ गई है, जिससे गोशालाओं की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हालांकि, बाजरे का चारा ज्वार की तुलना में कम पौष्टिक होता है, लेकिन संकट के इस दौर में गोशाला संचालक इसी से काम चलाने के लिए मजबूर हैं।
हरे चारे की कमी से गोशालाओं में पशुओं की देखभाल एक बड़ी चुनौती बन गई है। गायों को हरे चारे के स्थान पर खल, बिनौला या अनाज देकर पूर्ति की जा रही है। हालांकि अभी तक हरा चारा भी मिल रहा है। ऐसे में किसानों से अपील है कि वे बाजरे की फसल का हरा चारे के लिए गोशाला से संपर्क करें। गोशाला में हरे चारे की आवश्यकता हैं।
सुरेश गोयल, हरियाणा गोशाला प्रधान, फतेहाबाद।
रेतीले क्षेत्र में जलभराव की समस्या नहीं है ऐसे में यहां हरे चारे की पूर्ति पूरी हो जाती है। अगर बारिश लगातार होती है ताे हरे चारे का संकट छा सकता है।
रामसिंह कड़वासरा, संरक्षक श्री कृष्ण गोशाला मेहूवाला।