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Fatehabad News: तीन छात्राओं ने श्रीहरिकोटा में इसरो की अंतरिक्ष तकनीक को करीब से जाना
Wed, 07 Oct 2026 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 07 Oct 2026 11:21 PM IST
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इसरो केंद्र का भ्रमण करते हुए छात्राएं स्त्रोत शिक्षा विभाग
फतेहाबाद। प्रदेश के 48 मेधावी विद्यार्थियों ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित इसरो केंद्र का भ्रमण किया। इनमें फतेहाबाद जिले की तीन छात्राएं भी शामिल रहीं। विद्यार्थियों ने उपग्रहों की कार्यप्रणाली और अंतरिक्ष तकनीक के विभिन्न उपयोगों की जानकारी हासिल की।
शैक्षणिक भ्रमण में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नाथूवाल की कक्षा 10 की छात्रा पिंकी, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रतिया की अक्की बाई और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पीलीमंदोरी की कक्षा 12 की छात्रा नीलम शामिल रहीं। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष तकनीक के विभिन्न उपयोगों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
विद्यार्थियों ने इसरो केंद्र में उपग्रहों की कार्यप्रणाली को समझा। उन्हें मौसम संबंधी आंकड़ों के संग्रह की प्रक्रिया भी बताई गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि उपग्रहों से मौसम संबंधी विभिन्न आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। इन आंकड़ों से मौसम की स्थिति समझने में मदद मिलती है। इनके आधार पर मौसम का पूर्वानुमान तैयार किया जाता है।
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भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने वैज्ञानिकों से अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े सवाल पूछे। वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। विद्यार्थियों ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों की जानकारी भी हासिल की। इस शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को किताबों में पढ़े अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने का अवसर मिला।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ मुकेश मेहता ने कहा कि विद्यार्थियों को कक्षा और किताबों से बाहर निकलकर वैज्ञानिक संस्थानों को देखने का अवसर मिलने से उनकी समझ और जिज्ञासा दोनों बढ़ती हैं। इसरो जैसे संस्थान का भ्रमण विद्यार्थियों को विज्ञान की व्यावहारिक दुनिया से जोड़ता है।
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वैज्ञानिकों से सीखने को मिला मौका
पिंकी ने बताया कि इसरो केंद्र में उपग्रहों के काम करने के तरीके को समझना उसके लिए बेहद रोमांचक अनुभव रहा। वैज्ञानिकों से बातचीत कर उनके कार्य और अनुभवों के बारे में जानने का अवसर मिला। वहीं नीलम ने बताया कि इसरो की प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिकों के कार्य को करीब से देखने से विज्ञान को समझने का नजरिया बदला है। इससे भविष्य में विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने की प्रेरणा मिली।
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शैक्षणिक भ्रमण में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नाथूवाल की कक्षा 10 की छात्रा पिंकी, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रतिया की अक्की बाई और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पीलीमंदोरी की कक्षा 12 की छात्रा नीलम शामिल रहीं। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष तकनीक के विभिन्न उपयोगों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
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विद्यार्थियों ने इसरो केंद्र में उपग्रहों की कार्यप्रणाली को समझा। उन्हें मौसम संबंधी आंकड़ों के संग्रह की प्रक्रिया भी बताई गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि उपग्रहों से मौसम संबंधी विभिन्न आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। इन आंकड़ों से मौसम की स्थिति समझने में मदद मिलती है। इनके आधार पर मौसम का पूर्वानुमान तैयार किया जाता है।
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भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने वैज्ञानिकों से अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े सवाल पूछे। वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। विद्यार्थियों ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों की जानकारी भी हासिल की। इस शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को किताबों में पढ़े अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने का अवसर मिला।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ मुकेश मेहता ने कहा कि विद्यार्थियों को कक्षा और किताबों से बाहर निकलकर वैज्ञानिक संस्थानों को देखने का अवसर मिलने से उनकी समझ और जिज्ञासा दोनों बढ़ती हैं। इसरो जैसे संस्थान का भ्रमण विद्यार्थियों को विज्ञान की व्यावहारिक दुनिया से जोड़ता है।
वैज्ञानिकों से सीखने को मिला मौका
पिंकी ने बताया कि इसरो केंद्र में उपग्रहों के काम करने के तरीके को समझना उसके लिए बेहद रोमांचक अनुभव रहा। वैज्ञानिकों से बातचीत कर उनके कार्य और अनुभवों के बारे में जानने का अवसर मिला। वहीं नीलम ने बताया कि इसरो की प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिकों के कार्य को करीब से देखने से विज्ञान को समझने का नजरिया बदला है। इससे भविष्य में विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने की प्रेरणा मिली।