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Fatehabad News: सेम के पानी ने करोड़ों की लागत से तैयार रेलवे अंडरपास किए बेकार
Fri, 12 Sep 2025 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Fri, 12 Sep 2025 11:16 PM IST
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गांव मेहूवाला के रेलवे अंडर ब्रिज में जमा सेम का पानी। संवाद
फतेहाबाद। भट्टू खंड में रेवाड़ी-बठिंडा रेलवे ट्रैक पर स्थित गांव मेहूवाला और सूलीखेड़ा में बने रेलवे अंडरपास लोगों की सुविधा के बजाय समस्या ज्यादा बन गए हैं। क्षेत्र में सेम की गंभीर समस्या के कारण जलस्तर महज छह फीट पर है, जिससे इन अंडरपास में पानी भरा रहता है।
इस कारण इन अंडरपास से दोपहिया और छोटे वाहनों की आवाजाही बाधित हो रही है। वहीं मेहूवाला अंडरपास तो पिछले चार वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ा है। रेल मंडल बीकानेर ने फाटक बंद रहने और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए मानव रहित रेलवे फाटकों की जगह अंडरपास का निर्माण करवाया था।
इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, ताकि ट्रेनों के लगातार आवागमन के कारण लगने वाले जाम से निजात मिल सके, लेकिन भट्टू क्षेत्र में जमीन के भीतर अधिक जलस्तर होने से ये अंडरपास अब जलभराव का स्थायी अड्डा बन चुके हैं। मेहूवाला अंडरपास में चार साल से आवागमन ठप : गांव मेहूवाला और डिंग के बीच खेतों तक पहुंचने के लिए पहले मानव रहित रेलवे फाटक था। हादसे रोकने के लिए वर्ष 2018 में रेलवे ने यहां अंडरपास का निर्माण करवाया। निर्माण से पहले इंजीनियरों ने ट्यूबवेल लगाकर जलस्तर कम करने का प्रयास भी किया। शुरुआत में कुछ दिन यह सफल भी रहा, लेकिन जल्द ही जलस्तर ऊपर आ गया। ग्रामीणों ने मिलकर कई बार पंप चलाकर पानी निकाला, लेकिन दो दिन में ही अंडरपास फिर से पानी से भर गया। अब इसमें लगभग पांच फीट तक पानी भरा रहता है, फिलहाल रेलवे ने इसे स्थायी रूप से बंद कर दिया है।
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खेतों व ढाणियों के रास्ते हुए बंद :
मेहूवाला अंडरपास से होकर रोजाना करीब 100 किसान और 50 से अधिक ढाणियों के लोग खेतों में जाते हैं। अंडरपास बंद होने से उन्हें अब करीब तीन किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि या तो जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, या फिर पुराने मानव रहित फाटक को फिर से चालू किया जाए।
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मैं रोजाना सूलीखेड़ा के अंडरपास से आवागमन करता हूं। बारिश के बाद जलस्तर ऊंचा होने इसमें दो से ढाई फीट तक पानी भरा रहता है। यहां खतरनाक जलभराव का चिह्न भी नहीं है। ऐसे में वाहन चालकों को जलभराव कितना है इसका अनुमान नहीं हो पाता। इससे हादसे होने की आशंका बनी रहती है।
-लाखन सिंह, राहगीर।
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ढाणियों का रास्ता बंद होने से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर अधिक दूरी करनी पड़ रही है। सुविधा के लिए बनाए गए अंडरपास से कोई फायदा नहीं हो रहा है। रेलवे मंडल को अस्थायी तौर पर वैकल्पिक रास्ता बनाना चाहिए, ताकि अन्य लोग अपने गंतव्य व किसान अपने खेतों में जा सके।
-उमेद, किसान।
:: रेलवे अंडरपास में पानी भरा रहने के चलते सुरक्षा कारणों से बंद किया जाता है। आपके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। इस समस्या का जल्द ही कोई उचित समाधान निकाला जाएगा।
-दुनीचंद कुमावत, स्टेशन मास्टर, भटटूकलां, रेलवे मंडल बीकानेर।
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इस कारण इन अंडरपास से दोपहिया और छोटे वाहनों की आवाजाही बाधित हो रही है। वहीं मेहूवाला अंडरपास तो पिछले चार वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ा है। रेल मंडल बीकानेर ने फाटक बंद रहने और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए मानव रहित रेलवे फाटकों की जगह अंडरपास का निर्माण करवाया था।
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इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, ताकि ट्रेनों के लगातार आवागमन के कारण लगने वाले जाम से निजात मिल सके, लेकिन भट्टू क्षेत्र में जमीन के भीतर अधिक जलस्तर होने से ये अंडरपास अब जलभराव का स्थायी अड्डा बन चुके हैं। मेहूवाला अंडरपास में चार साल से आवागमन ठप : गांव मेहूवाला और डिंग के बीच खेतों तक पहुंचने के लिए पहले मानव रहित रेलवे फाटक था। हादसे रोकने के लिए वर्ष 2018 में रेलवे ने यहां अंडरपास का निर्माण करवाया। निर्माण से पहले इंजीनियरों ने ट्यूबवेल लगाकर जलस्तर कम करने का प्रयास भी किया। शुरुआत में कुछ दिन यह सफल भी रहा, लेकिन जल्द ही जलस्तर ऊपर आ गया। ग्रामीणों ने मिलकर कई बार पंप चलाकर पानी निकाला, लेकिन दो दिन में ही अंडरपास फिर से पानी से भर गया। अब इसमें लगभग पांच फीट तक पानी भरा रहता है, फिलहाल रेलवे ने इसे स्थायी रूप से बंद कर दिया है।
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खेतों व ढाणियों के रास्ते हुए बंद :
मेहूवाला अंडरपास से होकर रोजाना करीब 100 किसान और 50 से अधिक ढाणियों के लोग खेतों में जाते हैं। अंडरपास बंद होने से उन्हें अब करीब तीन किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि या तो जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, या फिर पुराने मानव रहित फाटक को फिर से चालू किया जाए।
मैं रोजाना सूलीखेड़ा के अंडरपास से आवागमन करता हूं। बारिश के बाद जलस्तर ऊंचा होने इसमें दो से ढाई फीट तक पानी भरा रहता है। यहां खतरनाक जलभराव का चिह्न भी नहीं है। ऐसे में वाहन चालकों को जलभराव कितना है इसका अनुमान नहीं हो पाता। इससे हादसे होने की आशंका बनी रहती है।
-लाखन सिंह, राहगीर।
ढाणियों का रास्ता बंद होने से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर अधिक दूरी करनी पड़ रही है। सुविधा के लिए बनाए गए अंडरपास से कोई फायदा नहीं हो रहा है। रेलवे मंडल को अस्थायी तौर पर वैकल्पिक रास्ता बनाना चाहिए, ताकि अन्य लोग अपने गंतव्य व किसान अपने खेतों में जा सके।
-उमेद, किसान।
:: रेलवे अंडरपास में पानी भरा रहने के चलते सुरक्षा कारणों से बंद किया जाता है। आपके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। इस समस्या का जल्द ही कोई उचित समाधान निकाला जाएगा।
-दुनीचंद कुमावत, स्टेशन मास्टर, भटटूकलां, रेलवे मंडल बीकानेर।