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Fatehabad News: भोंपू तो सबका बज रया पर जीतेगी वाही जुणसी फसलां का रेट बढ़ावैगी

Sat, 21 Sep 2024 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 21 Sep 2024 11:28 PM IST
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The horn has sounded for everyone but the one who will win will increase the rates of Junsi crops.
गांव पारता में चुनावी चर्चा में भाग लेते हुए ग्रामीण।
समैन। गांव-देहात में चुनावी चर्चाओं का शोर सुनाई देने लगा है। गांवों में नुक्कड़, चौराहों व तालाबों पर चुनावी चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। गांव के लोग अपनी-अपनी पसंद के नेता की जीत का दावा कर रहे हैं, तो विपक्षी हार को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। कोई हार-जीत पर शर्तें लगाने की बात कह रहा है।
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टोहाना खंड के गांव पारता में विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी माहौल पूरा गर्म है। पांच हजार की आबादी वाले गांव पारता में 3,285 मतदाता हैं। गांव के लोगों में देशभक्ति की भावना भी कूट-कूटकर भरी हुई है। गांव के फौजी नरेंद्र सिंह ने साल 2000 में आतंकवादियों से मुकाबले के दौरान मातृभूमि के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी।
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चुनावी चर्चा में भाग लेते हुए ग्रामीण अजय सिंह कहते हैं कि इस बार हरियाणा में आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए वोट डालेंगे। भोंपू तो सारी पार्टियां का ही बज रया है, पर जीतेगी वाही जुणसी किसानां की फसलां का रेट बढ़ावैगी। इबकी बार किसान भी सोच-समझ कै वोट गैरण जागी। वहीं, ग्रामीण शमशेर व राजेंद्र कहते हैं कि इस बार उस पार्टी को वोट देंगे, जो गांवों में विकास कार्यों को तवज्जो देगी। पंजाब से अलग होकर हरियाणा बने हुए 58 साल होने को हैं, लेकिन अभी भी गांवों की हालत पूरी तरह नहीं सुधरी है। किसी गांव में पानी निकासी की तो किसी में अच्छी पढ़ाई की कमी की समस्या है।
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चर्चा को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण रामचंद्र व रोहताश ने कहा कि प्रदेश में अमन-चैन व भाईचारा होना बहुत जरूरी है। युवाओं के सामने बढ़ती बेरोजगारी भी एक बड़ा मुद्दा है। इसलिए गांव के युवाओं को इस बार उस पार्टी को वोट देना चाहिए, जो गांव के विकास के साथ-साथ रोजगार बढ़ाने पर भी ध्यान दें। ग्रामीण नवीन व गोपी ने कहा कि देश की आजादी के 77 साल हो गए, लेकिन फिर भी किसानों की दशा नहीं सुधरी है। आज भी किसान की दयनीय हालत है। हर सरकार किसानों के नाम पर राजनीति करती है, लेकिन जब उन्हें सुविधाएं देने की बात आती है, तो कुछ नहीं देते। मौजूदा सरकार ने किसान के खाते में दो हजार रुपये डालने शुरू किए तो खाद, कीटनाशक, कृषि औजारों तक के रेट बढ़ा दिए। खेती के उपकरणों पर भी जीएसटी लगाकर किसान पर कर्जा चढ़ाने का ही काम किया है। किसानों की सभी फसलों का एमएसपी लेना चाहिए।
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