{"_id":"0cb826d8bb29f561b8563325ca7de98d","slug":"the-100-acre-crop-submerged-embankment-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तटबंध टूटने से 100 एकड़ फसल जलमग्न ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तटबंध टूटने से 100 एकड़ फसल जलमग्न
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Fri, 31 Oct 2014 12:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चिल्ली झील का तटबंध टूटने से किसानों की करीब 100 एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई। किसानों ने बृहस्पतिवार सुबह आनन-फानन में ट्रैक्टर ट्रालियों में मिट्टी भरकर बांध पाटने का काम शुरू किया। चिल्ली झील के तटबंध बनाने के प्रशासन के दावों की पोल खुलते ही किसानों ने अब आरपार की लड़ाई करने का मन बना लिया है। नाराज किसानों ने नारेबाजी कर प्रशासन को जमकर कोसा।
किसानों का कहना है कि करीब 100 एकड़ में खड़ी तैयार धान की फसल खराब हो गई है। किसानों का आरोप है कि इससे पहले भी प्रशासन ने चिल्ली झील का पानी खेतों में जाने से रोकने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए थे। किसानों ने ही अपने स्तर पर चिल्ली के तटबंध बनाए थे। जलस्तर बढ़ते ही झील ओवरफ्लो होकर टूट गई।
बृहस्पतिवार सुबह जब किसान अपने खेतों में आए तो पानी से भरे खेत देखकर हैरान रह गए। मिट्टी की ट्रालियां मंगवाकर तुरंत तटबंध बनाने में जुट गए।
प्रशासन द्वारा पानी रोकने के कोई इंतजाम न करने के कारण गुस्साए किसान सतीश, बूटा सिंह, सुरेंद्र कुमार, सुखदेव सिंह ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इन लोगों का कहना था कि वह मुआवजे को लेकर उपायुक्त से मिलेंगे और यदि उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो आरपार की लड़ाई करेंगे।
विज्ञापन
झील में एकत्रित होता है पूरे शहर का सीवर का पानी
शहर के सीवरेज का पानी चिल्ली झील में डाला जाता है। इसे मोटर के द्वारा खैराती रोड़ पर बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है लेकिन चिल्ली के नजदीक बनाया गया बूस्टिंग स्टेशन चार माह से बंद पड़ा है। एक तरफ चिल्ली झील को बंद किया जा रहा है, वहीं पानी रोकने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम भी नहीं हैं। इस कारण चिल्ली में पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। चिल्ली झील के आसपास के खेतों में पानी के भराव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा 10 रिचार्ज बोर बनाए गए थे। रिचार्ज बोरों की पाइपें छोटी होने के कारण यह सफेद हाथी बने हैं और किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
पहले भी टूट चुका है कई बार बांध
चिल्ली के किनारे बनाए तटबंध टूटने की घटना कोई नई नहीं है। किसानों का कहना है कि एक साल के अंदर पांच बार तटबंध टूट चुके हैं। हर बार पानी खेतों में घुसकर फसल को बर्बाद कर देता है। पहले जब गेहूं की फसल पककर तैयार हो गई थी। उस समय भी खेतों में पानी घुस गया था और गेहूं की फसल खराब हो गई थी। अब खेतों में पानी घुसने से फसल जलमग्न हो गई है।
इन किसानों की फसल हुई खराब
7 एकड़ धान की फसल - सतीश कुमार
15 एकड़ धान और सब्जी- दयासिंह
5 एकड़ धान - प्रभुदयाल
11 एकड़ - बूटासिह
5 एकड़- सुरेंद्र कुमार
8 एकड- जगदीश मिढ़ा
6 एकड़ - साहिल चौधरी
5 एकड़ - रमेश बाघला
विज्ञापन
किसानों का कहना है कि करीब 100 एकड़ में खड़ी तैयार धान की फसल खराब हो गई है। किसानों का आरोप है कि इससे पहले भी प्रशासन ने चिल्ली झील का पानी खेतों में जाने से रोकने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए थे। किसानों ने ही अपने स्तर पर चिल्ली के तटबंध बनाए थे। जलस्तर बढ़ते ही झील ओवरफ्लो होकर टूट गई।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार सुबह जब किसान अपने खेतों में आए तो पानी से भरे खेत देखकर हैरान रह गए। मिट्टी की ट्रालियां मंगवाकर तुरंत तटबंध बनाने में जुट गए।
प्रशासन द्वारा पानी रोकने के कोई इंतजाम न करने के कारण गुस्साए किसान सतीश, बूटा सिंह, सुरेंद्र कुमार, सुखदेव सिंह ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इन लोगों का कहना था कि वह मुआवजे को लेकर उपायुक्त से मिलेंगे और यदि उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो आरपार की लड़ाई करेंगे।
विज्ञापन
झील में एकत्रित होता है पूरे शहर का सीवर का पानी
शहर के सीवरेज का पानी चिल्ली झील में डाला जाता है। इसे मोटर के द्वारा खैराती रोड़ पर बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है लेकिन चिल्ली के नजदीक बनाया गया बूस्टिंग स्टेशन चार माह से बंद पड़ा है। एक तरफ चिल्ली झील को बंद किया जा रहा है, वहीं पानी रोकने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम भी नहीं हैं। इस कारण चिल्ली में पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। चिल्ली झील के आसपास के खेतों में पानी के भराव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा 10 रिचार्ज बोर बनाए गए थे। रिचार्ज बोरों की पाइपें छोटी होने के कारण यह सफेद हाथी बने हैं और किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
पहले भी टूट चुका है कई बार बांध
चिल्ली के किनारे बनाए तटबंध टूटने की घटना कोई नई नहीं है। किसानों का कहना है कि एक साल के अंदर पांच बार तटबंध टूट चुके हैं। हर बार पानी खेतों में घुसकर फसल को बर्बाद कर देता है। पहले जब गेहूं की फसल पककर तैयार हो गई थी। उस समय भी खेतों में पानी घुस गया था और गेहूं की फसल खराब हो गई थी। अब खेतों में पानी घुसने से फसल जलमग्न हो गई है।
इन किसानों की फसल हुई खराब
7 एकड़ धान की फसल - सतीश कुमार
15 एकड़ धान और सब्जी- दयासिंह
5 एकड़ धान - प्रभुदयाल
11 एकड़ - बूटासिह
5 एकड़- सुरेंद्र कुमार
8 एकड- जगदीश मिढ़ा
6 एकड़ - साहिल चौधरी
5 एकड़ - रमेश बाघला