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श्रीमद्भागवत गीता वैचारिक, व्यावहारिक और वैज्ञानिक प्रेरणा : स्वामी ज्ञानानंद

Mon, 20 Mar 2023 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 20 Mar 2023 11:08 PM IST
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Swami Gyananand Maharaj caressing the cows at Sadguru Kripa Ashram.
सदगुरु कृपा आश्रम में गायों का दुलार करते स्वामी ज्ञानानंद महाराज।
फतेहाबाद। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि आज हर घर में श्रीकृष्ण की शिक्षाओं की अति आवश्यकता है। प्रभु श्रीकृष्ण के पदचिह्नों पर चलकर ही युवा व राष्ट्र का उत्थान संभव है। वे श्रीकृष्ण कृपा जीओ गीता परिवार की ओर से अनाज मंडी में जारी दिव्य गीत सत्संग कार्यक्रम के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को प्रवचन दे रहे थे। तीसरे दिन साध्वी शांत योगानंद ने विशेष तौर पर भाग लिया। कार्यक्रम में फतेहाबाद के अलावा हिसार, सिरसा, हांसी, रतिया, टोहाना व आसपास के अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचे।
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स्वामी ज्ञानानंद ने गीता का संदेश देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत गीता वैचारिक, व्यावहारिक और वैज्ञानिक प्रेरणा है। यह भगवान का गाया हुआ गीत है। यह गीत इसलिए गाया गया कि मनुष्य मात्र के भीतर की वृतियांं जो अस्थिर है, अशांत है, चंचल है, जो विचलित हैं वो शांत हो पाए। उन्होंने कहा कि यदि हम तनाव से अलग जीवन जीना चाहते हैं, बच्चों को टेंशन, डिप्रेशन से बचाना चाहते हैं, सद्भावना का, प्रेममय जीवन जीना चाहते हैं तो जीयो गीता के साथ जुड़े। हर वर्ग के लोग गीता को अवश्य पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ने की प्रेरणा दें। साध्वी शांत योगानंद ने कहा कि स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने गीता का जो महत्व हमें बताया है, उसका अनुसरण हमें अपनी जिंदगी में करते रहने चाहिए और अच्छे कर्म करते हुए भक्ति मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए।
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सदगुरु अपना घर का भी किया दौरा
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने रतिया रोड स्थित सदगुरु अपना घर आश्रम का भी दौरा किया। आश्रम में पहुंचने पर समाजसेवी विनोद तायल, अशोक भुक्कर, सुरेंद्र मित्तल, सुशील मित्तल, दीपक सरदाना, नोनी मोंगा, मुरलीधर शास्त्री सहित कई लोगों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि कलयुग में मनुष्य धन अर्जित करने के लिए तरह तरह के प्रलोभन कर रहा है। इन्हीं प्रलोभनों की वजह से अपनों को ही भूलता जा रहा है। सद्गुरु अपना घर आश्रम ऐसे लोगों का आश्रय बना है। गीता हमें यही संदेश देती है कि हमें सबको साथ लेकर चलना चाहिए व समाज हित के कार्यों में अपना योगदान देना चाहिए। यही गीता का मूल मंत्र है।
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