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Fatehabad News: पराली कम जली, पर हवा का हाल वही, प्रदूषण का स्तर रहा 291
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फतेहाबाद के गांव ढाणी बिकानेरी में पराली की गांठों का उठान करते किसान। संवाद
फतेहाबाद। जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार न होने से चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। रविवार शाम 5 बजे तक 291 दर्ज किया गया, जो कि अस्वस्थ श्रेणी में आता है। जिले की हवा जहरीली बनी हुई है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि इस बार फसल अवशेष जलाने के मात्र 6 मामले दर्ज हुए हैं।
जिले में शनिवार की रात्रि को गांव बबनपुर और कुलां में हरसेक की ओर से लोकेशन भेजी गई, जिसमें गांव बबनपुर में आग पाई है। इसको लेकर कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए किसान पर एफआईआर दर्ज की है। जबकि कुलां में गलती से आग लगी मिली है। इस पर एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी।
इसके साथ ही अब जिले में धान के अवशेष जलाने के मात्र 6 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि कुल लोकेशन 9 आई है। पिछले साल 25 अक्तूबर तक यह संख्या 45 थी। वहीं एक्यूआई के बढ़ने पर भी सवाल खड़े हो रहे है। जबकि पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने के कम मामले हैं।
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किसानों ने फसल अवशेष नहीं जलाए हैं, फिर भी प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है
वायु गुणवत्ता सूचकांक में हो रही बढ़ोतरी के कारण बढ़ते प्रदूषण का असली जिम्मेदार कौन है, इसको लेकर अधिकारियों का कहना है कि मौसम में नमी मात्रा बढ़ने के कारण प्रदूषण फैल रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण बढ़ने के पीछे मुख्य कारण कारखानों और ईंट भट्टों से निकलने वाला जहरीला धुआं है। लोगों का कहना है कि जब पराली जलाने के मामले नहीं हैं, तो नियंत्रण बोर्ड इन औद्योगिक इकाइयों को अगले एक माह तक बंद करवा देना चाहिए ताकि वायुमंडल को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
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वायु गुणवत्ता फेफड़ों और हृदय रोगियों के लिए अत्यधिक हानिकारक है, साथ ही स्वस्थ व्यक्तियों में भी सांस संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। बचाव के लिए मास्क लगाकर रखे व सांस के रोगी घर से बाहर निकलने में परहेज करें। दवाई समय पर लें।
-डॉ. अमित मुंजाल, विशेषज्ञ
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:: अक्तूबर-नवंबर महीने में मौसम में नमी बढ़ जाती है। इससे धूल-मिट्टी और फसलों की कटाई से निकलने वाले कण वातारण में मिल जाते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोतरी होती है। वहीं सरकार की ओर से अभी तक ईंट भट्ठे और उद्योग बंद करवाने के निर्देश नहीं आए हैं।
-दीपक खटकड़, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फतेहाबाद।
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जिले में शनिवार की रात्रि को गांव बबनपुर और कुलां में हरसेक की ओर से लोकेशन भेजी गई, जिसमें गांव बबनपुर में आग पाई है। इसको लेकर कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए किसान पर एफआईआर दर्ज की है। जबकि कुलां में गलती से आग लगी मिली है। इस पर एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी।
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इसके साथ ही अब जिले में धान के अवशेष जलाने के मात्र 6 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि कुल लोकेशन 9 आई है। पिछले साल 25 अक्तूबर तक यह संख्या 45 थी। वहीं एक्यूआई के बढ़ने पर भी सवाल खड़े हो रहे है। जबकि पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने के कम मामले हैं।
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किसानों ने फसल अवशेष नहीं जलाए हैं, फिर भी प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है
वायु गुणवत्ता सूचकांक में हो रही बढ़ोतरी के कारण बढ़ते प्रदूषण का असली जिम्मेदार कौन है, इसको लेकर अधिकारियों का कहना है कि मौसम में नमी मात्रा बढ़ने के कारण प्रदूषण फैल रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण बढ़ने के पीछे मुख्य कारण कारखानों और ईंट भट्टों से निकलने वाला जहरीला धुआं है। लोगों का कहना है कि जब पराली जलाने के मामले नहीं हैं, तो नियंत्रण बोर्ड इन औद्योगिक इकाइयों को अगले एक माह तक बंद करवा देना चाहिए ताकि वायुमंडल को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
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वायु गुणवत्ता फेफड़ों और हृदय रोगियों के लिए अत्यधिक हानिकारक है, साथ ही स्वस्थ व्यक्तियों में भी सांस संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। बचाव के लिए मास्क लगाकर रखे व सांस के रोगी घर से बाहर निकलने में परहेज करें। दवाई समय पर लें।
-डॉ. अमित मुंजाल, विशेषज्ञ
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:: अक्तूबर-नवंबर महीने में मौसम में नमी बढ़ जाती है। इससे धूल-मिट्टी और फसलों की कटाई से निकलने वाले कण वातारण में मिल जाते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोतरी होती है। वहीं सरकार की ओर से अभी तक ईंट भट्ठे और उद्योग बंद करवाने के निर्देश नहीं आए हैं।
-दीपक खटकड़, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फतेहाबाद।

फतेहाबाद के गांव ढाणी बिकानेरी में पराली की गांठों का उठान करते किसान। संवाद