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कभी ठंडा कभी गरम, बदलता मौसम ढा रहा सितम
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नागरिक अस्पताल में फिजिशियन के कक्ष के बाहर मरीजों की लगी भीड़।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। कभी ठंडा तो कभी गर्म मौसम स्वास्थ्य पर सितम कर रहा है। बच्चे जुकाम, खांसी से जूझ रहे हैं तो बड़ों को उल्टी, दस्त ने परेशान किया हुआ है। जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार से जूझते मरीजों की लंबी कतार मिल रही है। तापमान में हो रहे परिवर्तन की वजह से लगभग हर दूसरे घर में वायरल मरीज मिल रहे हैं।
हालात यह है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में चिकित्सकों के पास जांच के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल में एक मात्र फिजिशियन को रोजाना 100 से अधिक मरीजों की जांच करनी पड़ रही है। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में शिशु रोग विशेषज्ञ भी रोजाना 125 से 150 शिशुओं को जांच रहे हैं। कड़ी धूप में बच्चों को हिट स्ट्रॉक होने का भी खतरा बना हुआ है। शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में निमोनिया और डायरिया का खतरा अधिक है। बच्चों और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कम होती है, जिसकी वजह से वे मौसम में परिवर्तन होते ही बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। वायरल से बचाव के लिए बुजुर्ग और बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। मामूली सी सावधानियां रखकर बच्चों को निमोनिया से बचाया जा सकता है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में आ रहे खांसी, जुकाम से पीड़ित शिशुओं में दस से 15 फीसदी बच्चों में निमोनिया मिल रहा है। इनमें पांच साल तक के बच्चों की संख्या अधिक है।
ये हैं निमोनिया के लक्षण
सर्दी-खांसी
बुखार
सांस तेज चलना।
पसली चलने के साथ सांस लेने में दिक्कत आना।
ये रखें सावधानियां
जो भी खाएं सारा ढका हुआ रखें।
पानी उबाल कर पीएं।
बासी भोजन बिल्कुल न करें।
पानी, नींबू पानी, नारियल पानी, ताजा जूस का पीते रहें।
बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाएं।
इस सप्ताह ऐसे बदलता रहा है अधिकतम तापमान
25 अप्रैल : 40 डिग्री
24 अप्रैल : 40 डिग्री
23 अप्रैल : 39 डिग्री
22 अप्रैल : 38 डिग्री
21 अप्रैल : 38 डिग्री
20 अप्रैल : 41 डिग्री
कोट
मौसम परिवर्तन होते ही वायरल संबंधी मरीज बढ़ने लगते हैं। इस समय खांसी, जुकाम से लेकर उल्टी, दस्त तक के मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। सावधानियां बरतने की बड़ी जरूरत है।
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-डॉ. मनीष टुटेजा, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल
कोट
मौसम में बदलाव का असर बच्चों पर भी पड़ता है। हर रोज ओपीडी में आने वाले बच्चों में खांसी, जुकाम से लेकर निमोनिया तक मिल रहा है। अभिभावक पूरी सावधानी रखें।
-डॉ. समीर टुटेजा, शिशु रोग विशेषज्ञ
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हालात यह है कि सरकारी और निजी अस्पतालों में चिकित्सकों के पास जांच के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल में एक मात्र फिजिशियन को रोजाना 100 से अधिक मरीजों की जांच करनी पड़ रही है। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में शिशु रोग विशेषज्ञ भी रोजाना 125 से 150 शिशुओं को जांच रहे हैं। कड़ी धूप में बच्चों को हिट स्ट्रॉक होने का भी खतरा बना हुआ है। शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में निमोनिया और डायरिया का खतरा अधिक है। बच्चों और बुजुर्गों की इम्यूनिटी कम होती है, जिसकी वजह से वे मौसम में परिवर्तन होते ही बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। वायरल से बचाव के लिए बुजुर्ग और बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। मामूली सी सावधानियां रखकर बच्चों को निमोनिया से बचाया जा सकता है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में आ रहे खांसी, जुकाम से पीड़ित शिशुओं में दस से 15 फीसदी बच्चों में निमोनिया मिल रहा है। इनमें पांच साल तक के बच्चों की संख्या अधिक है।
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ये हैं निमोनिया के लक्षण
सर्दी-खांसी
बुखार
सांस तेज चलना।
पसली चलने के साथ सांस लेने में दिक्कत आना।
ये रखें सावधानियां
जो भी खाएं सारा ढका हुआ रखें।
पानी उबाल कर पीएं।
बासी भोजन बिल्कुल न करें।
पानी, नींबू पानी, नारियल पानी, ताजा जूस का पीते रहें।
बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाएं।
इस सप्ताह ऐसे बदलता रहा है अधिकतम तापमान
25 अप्रैल : 40 डिग्री
24 अप्रैल : 40 डिग्री
23 अप्रैल : 39 डिग्री
22 अप्रैल : 38 डिग्री
21 अप्रैल : 38 डिग्री
20 अप्रैल : 41 डिग्री
कोट
मौसम परिवर्तन होते ही वायरल संबंधी मरीज बढ़ने लगते हैं। इस समय खांसी, जुकाम से लेकर उल्टी, दस्त तक के मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। सावधानियां बरतने की बड़ी जरूरत है।
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-डॉ. मनीष टुटेजा, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल
कोट
मौसम में बदलाव का असर बच्चों पर भी पड़ता है। हर रोज ओपीडी में आने वाले बच्चों में खांसी, जुकाम से लेकर निमोनिया तक मिल रहा है। अभिभावक पूरी सावधानी रखें।
-डॉ. समीर टुटेजा, शिशु रोग विशेषज्ञ