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चरित्र व चिंतन को बदलने वाली है श्रीराम कथा : कथावाचक
Wed, 06 Aug 2025 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 06 Aug 2025 11:28 PM IST
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प्रवचन करते कथावाचक । स्रोत : आयोजक
रतिया। पार्श्व पदमावती शक्ति धाम प्रांगण में श्री पाश्र्व पदमाावती शक्ति धाम सेवा समिति एवं अरिहंत महिला मंडल की ओर से हनुमान जी के 20वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित श्री राम कथा का आयोजन किया गया।
इस दौरान प्रवचन करते हुए कथावाचक आचार्य महेश कृष्ण महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम कथा हमारे चरित्र व चिंतन को बदलने वाली है। इसके माध्यम से व्यक्ति को अपनी बुरी आदतों को बदलने का प्रयास करना चाहिए। राम से अधिक राम के दास की उक्ति चरितार्थ होती है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम स्वयं कहते हैं जब लोक पर कोई विपत्ति आती है तब वह त्राण पाने के लिए मेरी अभ्यर्थना करता है परंतु जब मुझ पर कोई संकट आता है तब मैं उसके निवारण के लिए पवनपुत्र हनुमान का स्मरण करता हूं। सत्य की हमेशा विजय होती है।
भगवान श्री राम ने सत्य को स्थापित करने के लिए रावण का वध किया। भगवान श्रीराम की कथा हमारे चरित्र व चिंतन को बदलने वाली है। यदि हम अपने जीवन में कुछ बदलाव नहीं ला पाए तो श्रीराम कथा सुनने व सुनाने का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। श्रीराम कथा के माध्यम से व्यक्ति को अपनी बुरी आदतों को बदलने का प्रयास करना चाहिए। हमारी धार्मिक पहचान हम लोग थोड़े से लोभ में पड़कर बदल देते हैं। इस मौके पर समिति प्रधान गिरधारी लाल सिंगला, साधू राम बांसल, सुभाष सिंगला, संजीव गोयल, राजेंद्र जैन, बबलू मित्तल, मौजी, रविंद्र जैन, भोला दानेवालिया, मंदिर के पुजारी केशव शास्त्री आदि उपस्थित थे।
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इस दौरान प्रवचन करते हुए कथावाचक आचार्य महेश कृष्ण महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम कथा हमारे चरित्र व चिंतन को बदलने वाली है। इसके माध्यम से व्यक्ति को अपनी बुरी आदतों को बदलने का प्रयास करना चाहिए। राम से अधिक राम के दास की उक्ति चरितार्थ होती है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम स्वयं कहते हैं जब लोक पर कोई विपत्ति आती है तब वह त्राण पाने के लिए मेरी अभ्यर्थना करता है परंतु जब मुझ पर कोई संकट आता है तब मैं उसके निवारण के लिए पवनपुत्र हनुमान का स्मरण करता हूं। सत्य की हमेशा विजय होती है।
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भगवान श्री राम ने सत्य को स्थापित करने के लिए रावण का वध किया। भगवान श्रीराम की कथा हमारे चरित्र व चिंतन को बदलने वाली है। यदि हम अपने जीवन में कुछ बदलाव नहीं ला पाए तो श्रीराम कथा सुनने व सुनाने का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। श्रीराम कथा के माध्यम से व्यक्ति को अपनी बुरी आदतों को बदलने का प्रयास करना चाहिए। हमारी धार्मिक पहचान हम लोग थोड़े से लोभ में पड़कर बदल देते हैं। इस मौके पर समिति प्रधान गिरधारी लाल सिंगला, साधू राम बांसल, सुभाष सिंगला, संजीव गोयल, राजेंद्र जैन, बबलू मित्तल, मौजी, रविंद्र जैन, भोला दानेवालिया, मंदिर के पुजारी केशव शास्त्री आदि उपस्थित थे।
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