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समृद्धि की तस्वीर पेश करती हैं भाखड़ा की सात शाखाएं
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जिले ने अपनी तरक्की की कहानी खुद लिखी है। इसका जीता जागता उदाहरण है टोहाना का भाखड़ा बांध। यहां का दृश्य आकर्षक ही नहीं, बल्कि हमारी समृद्धि की तस्वीर पेश करता है। यहां से सात नहरें निकलती हैं, जो जिले के अलग-अलग हिस्सों से होती हुई गुजरती हैं। ये नहरें जिले के किसानों की खुशहाली का आधार हैं।
दरअसल, जिले की 70 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है। गेहूं, धान, कपास, नरमा व सरसों उत्पादन फतेहाबाद अन्य जिलों से कम नहीं है। इसकी वजह यही है कि हमारे पास पानी की कमी नहीं है। सही मायने में भाखड़ा नहर ने जिलावासियों की तकदीर बदली है। भाखड़ा बांध पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के लिए अमूल्य देन है। इस बांध का निर्माण रायबहादुर कंवर सैन की देखरेख में हुआ। टोहाना के रहने वाले 24 जनवरी 1900 को जन्मे कंवर सैन ने पहले वर्ष 1940-41 में रोहतक में आई भयंकर बाढ़ का समाधान ढूंढा। तभी उन्हें राय बहादुर का खिताब मिला। वर्ष 1945-46 में जब भाखड़ा बांध की परियोजना बनी, तब इस पूरे क्षेत्र में पानी की कमी थी और यहां रेतीले टिब्बे थे। आजाद भारत के बाद भाखड़ा बांध का निर्माण हुआ और 1953 में भाखड़ा नहर में पानी छोड़ा गया। इसी भाखड़ा नहर के सहारे धीरे-धीरे क्षेत्र की तस्वीर बदलती गई और रेतीले टिब्बों की जगह लहलहाती फसलों ने किसान की तकदीर लिखी।
बिजली संयंत्र से बदलेगा भविष्य
गांव गोरखपुर में स्थापित होने वाले परमाणु संयंत्र से जिले को एक नई पहचान मिलेगी। हरियाणा बनने के बाद यह दूसरा अवसर होगा, जब जिला वासियों को उद्योग धंधों के साथ आजीविका का सुनहरा अवसर पर मिलने वाला है। भाखड़ा नहर के बाद अब परमाणु संयंत्र के सहारे बदलाव की गाथा लिखी जा रही है। करीब 1503 एकड़ भूमि में बनने वाले परमाणु विद्युत संयंत्र में 2800 मेगावाट बिजली के लिए यहां चार इकाईयां लगाई जाएंगी। यह संयंत्र स्थापित होने से यहां आने से इस क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित होंगे।
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बागवानी से मिली पहचान
जिले के किसान खेती के क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं। आज किसान परंपरागत खेती छोड़ कर बागवानी, मछली पालन, मधुमक्खी पालन व सब्जी उत्पादन के जरिये लाखों रुपये कमा रहे हैं। किसान चाहते हैं कि अब पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि सदुपयोग होना चाहिए।
आंकड़ों से समझिए
जिले का क्षेत्रफल : 2538 वर्ग किलोमीटर
कृषि योग्य रकबा : 2 लाख 25 हजार हेक्टेयर
कुल किसान परिवार: 55 हजार
गेहूं का रकबा : 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर
ट्यूबवेल : 50 हजार
कोट
कृषि के क्षेत्र में जिला तरक्की कर रहा है। आज किसान सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि तकनीक के क्षेत्र में भी आगे हैं। किसान कम खर्चे में ज्यादा कमाई कर रहे हैं। अब किसान पानी बचाने की दिशा में प्रयासरत हैं। इसके लिए फसल विविधीकरण अपना रहे हैं।
-राजेश सिहाग, कृषि उप निदेशक, फतेहाबाद।
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दरअसल, जिले की 70 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है। गेहूं, धान, कपास, नरमा व सरसों उत्पादन फतेहाबाद अन्य जिलों से कम नहीं है। इसकी वजह यही है कि हमारे पास पानी की कमी नहीं है। सही मायने में भाखड़ा नहर ने जिलावासियों की तकदीर बदली है। भाखड़ा बांध पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के लिए अमूल्य देन है। इस बांध का निर्माण रायबहादुर कंवर सैन की देखरेख में हुआ। टोहाना के रहने वाले 24 जनवरी 1900 को जन्मे कंवर सैन ने पहले वर्ष 1940-41 में रोहतक में आई भयंकर बाढ़ का समाधान ढूंढा। तभी उन्हें राय बहादुर का खिताब मिला। वर्ष 1945-46 में जब भाखड़ा बांध की परियोजना बनी, तब इस पूरे क्षेत्र में पानी की कमी थी और यहां रेतीले टिब्बे थे। आजाद भारत के बाद भाखड़ा बांध का निर्माण हुआ और 1953 में भाखड़ा नहर में पानी छोड़ा गया। इसी भाखड़ा नहर के सहारे धीरे-धीरे क्षेत्र की तस्वीर बदलती गई और रेतीले टिब्बों की जगह लहलहाती फसलों ने किसान की तकदीर लिखी।
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बिजली संयंत्र से बदलेगा भविष्य
गांव गोरखपुर में स्थापित होने वाले परमाणु संयंत्र से जिले को एक नई पहचान मिलेगी। हरियाणा बनने के बाद यह दूसरा अवसर होगा, जब जिला वासियों को उद्योग धंधों के साथ आजीविका का सुनहरा अवसर पर मिलने वाला है। भाखड़ा नहर के बाद अब परमाणु संयंत्र के सहारे बदलाव की गाथा लिखी जा रही है। करीब 1503 एकड़ भूमि में बनने वाले परमाणु विद्युत संयंत्र में 2800 मेगावाट बिजली के लिए यहां चार इकाईयां लगाई जाएंगी। यह संयंत्र स्थापित होने से यहां आने से इस क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित होंगे।
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बागवानी से मिली पहचान
जिले के किसान खेती के क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं। आज किसान परंपरागत खेती छोड़ कर बागवानी, मछली पालन, मधुमक्खी पालन व सब्जी उत्पादन के जरिये लाखों रुपये कमा रहे हैं। किसान चाहते हैं कि अब पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि सदुपयोग होना चाहिए।
आंकड़ों से समझिए
जिले का क्षेत्रफल : 2538 वर्ग किलोमीटर
कृषि योग्य रकबा : 2 लाख 25 हजार हेक्टेयर
कुल किसान परिवार: 55 हजार
गेहूं का रकबा : 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर
ट्यूबवेल : 50 हजार
कोट
कृषि के क्षेत्र में जिला तरक्की कर रहा है। आज किसान सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि तकनीक के क्षेत्र में भी आगे हैं। किसान कम खर्चे में ज्यादा कमाई कर रहे हैं। अब किसान पानी बचाने की दिशा में प्रयासरत हैं। इसके लिए फसल विविधीकरण अपना रहे हैं।
-राजेश सिहाग, कृषि उप निदेशक, फतेहाबाद।