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Fatehabad News: हादसे वाले दिन ही सरपंच ने टैंक पर जाली लगवाने के लिए दिया था ज्ञापन

Sun, 11 Feb 2024 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sun, 11 Feb 2024 01:33 AM IST
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Sarpanch had given a memorandum to install mesh on the tank
अशोक दधीच
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फतेहाबाद। गांव मताना के जलघर की डिग्गी में शुक्रवार को बच्चे के गिरने से मौत के 15 मिनट पहले ही गांव के सरपंच जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता से मिले थे।उन्होंने ज्ञापन सौंपकर जलघर की दीवार को ऊंचा करने व जाली लगाने की मांग की थी।
फतेहाबाद के नजदीकी गांव मताना में शुक्रवार शाम को करीब 5 बजे गांव के वाटर वर्क्स में अपने भाई के साथ पतंग उड़ा रहा कुदरत अचानक जलघर की डिग्गी में जा गिरा था। उसके भाई ने शोर मचाकर ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी थी। गांव के सरपंच सहित अनेक ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और तुरंत इसकी जानकारी पुलिस व प्रशासन को दी थी। सूचना पाकर पुलिस तो मौके पर पहुंची। संवाद
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गोताखोर निकला शराब में नशे में धुत
इस दौरान प्रशासन की ओर से एक गोताखोर भेजा गया। जब वह गांव में पहुंचा तो वह शराब के नशे में धुत था और ना ही उसके पास कोई सेफ्टी किट थी। ग्रामीणों ने इस पर पुलिस से कहा कि अभी एक बच्चा पानी में डूबा है और अगर यह डूब गया तो दोनों को तलाश करना पड़ेगा, इस पर ग्रामीणों ने उसे लौटा दिया।
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सरपंच स्वयं उतरे पानी में बच्चे को खोजने के लिए
कोई बात सिरे चढ़ती ना देखकर गांव के सरपंच एडवोकेट दलबीर वर्मा रस्सियों के सहारे पानी में उतर गए। उन्होंने काफी समय तक बच्चे को तलाशा लेकिन बच्चा नहीं मिल पाया। डिग्गी करीब 25 फुट गहरी थी, इस कारण बच्चे को ढूंढ़ना काफी मुश्किल लग रहा था।

हादसे से 15 मिनट पहले ही कार्यकारी अभियंता से मिले थे सरपंच
गांव के सरपंच एडवोकेट दलबीर वर्मा ने बताया कि जब यह हादसा हुआ था, उससे 15 मिनट पहले ही वह जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता से मिले थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने वाटर वर्क्स की डिग्गी की चाहरदीवारी व डिग्गी के ऊपर जाल लगाने की मांग की थी। यह मांग वह कई दिनों से उठा रहे थे, लेकिन कार्यकारी अभियंता कभी बैठकों में होते थे, तो कभी कार्यालय में नहीं मिलते थे। शुक्रवार को जब मिले तो उसी दिन यह हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि हादसे के दौरान उन्होंने प्रशासन से हर तरह की मदद मांगी, लेकिन कोई मदद नहीं मिल पाई। बड़ी विडंबना यह थी कि प्रशासन के पास कोई प्रोफेशनल गोताखोर भी नहीं था। दूसरे गांव नरवाना से 12 हजार रुपये में गोताखोर बुलाकर शव को तलाशा गया।


गोताखोर न होने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसी बात है तो आपदा विभाग से बातचीत की जाएगी और गोताखोर को नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।
-राजेश कुमार, एसडीएम फतेहाबाद।
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