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थमने की कगार पर रोडवेज का पहिया, ग्रामीण रूटों पर 35 फेरे और लंबे रूट पर 15 फेरे बंद
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बस स्टैंड पर बसों के इंतजार में लगी यात्रियों की भीड़।
- फोटो : Fatehabad
ग्रामीण रूटों पर 35 फेरे और लंबे रूट पर 40 में से 15 फेरे बंद
थमने की कगार पर रोडवेज का पहिया, 24 सितंबर को 90 फीसदी बसों का बीमा हो जाएगा खत्म
हर रोज 18 हजार किलोमीटर मिस कर रही रोडवेज बसें, सिर्फ किलोमीटर स्कीम वाली बसों का ही सहारा
फोटो 16 की सीरीज.....
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। फतेहाबाद डिपो में रोडवेज का पहिया थमने की कगार पर पहुंच चुका है। रूटों पर दौड़ रही 69 बसों का बीमा खत्म होने के कारण हर रोज रोडवेज की बसें 18 हजार किलोमीटर मिस कर रही हैं। सामान्य दिनों में रोडवेज बसें 38 हजार किलोमीटर का सफर तय करती हैं। मगर इस समय सिर्फ 19 से 20 हजार किलोमीटर ही चल रही हैं। इनमें से भी 11 हजार किलोमीटर की यात्रा तो किलोमीटर स्कीम की बसें कर रही हैं। रोडवेज की बसें तो मात्र 8 से 9 हजार किलोमीटर ही चल पा रही हैं।
दिल्ली, चंडीगढ़, गंगानगर, रावला, जयपुर जैसे लंबे रूटों पर 40 में से 15 फेरे बंद हैं। इस कारण रोजाना 3 से 4 लाख रुपये का नुकसान फतेहाबाद डिपो झेल रहा है। वहीं, लंबे रूटों से लेकर ग्रामीण रूटों के यात्रियों का सफर मुश्किल हो गया है। शहर से 15 से 20 किलोमीटर दूरी के गांवों में भी जाने के लिए यात्रियों को एक से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
अगले सप्ताह तक रोडवेज मुख्यालय व प्रदेश सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया तो रोडवेज के हालात और बिगड़ जाएंगे। 24 सितंबर तक 90 फीसदी रोडवेज बसों का बीमा खत्म हो जाएगा। ऐसे में 130 में से 117 बसों के पहिये थम जाएंगे। अगर यह स्थिति आई तो मात्र 13 बसों के सहारे पूरे जिले की रोडवेज सेवा शेष रह जाएगी।
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ग्रामीण रूटों पर 35 फेरे हो चुके पूरी तरह बंद
लंबे रूटों पर तो दूसरे डिपो की बसें भी चल रही हैं। मगर सबसे बदहाल स्थिति ग्रामीण रूटों पर हो चुकी है। ग्रामीण रूट के 35 फेरे पूरी तरह बंद हो चुके हैं। करीब 110 रूटों पर सीधे तौर पर रोडवेज बस नहीं जा रही है। इन रूटों के ग्रामीणों के पास सहकारी समिति की बसों व निजी वाहनों का विकल्प बचा है।
296 चालकों को भी 18 दिनों से नहीं मिला वेतन
रोडवेज के अकाउंट ब्रांच के अधिकारियों ने कर्मचारियों के बीच भी तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। मैनेजमेंट स्टाफ व कंडक्टरों की सैलरी तो जारी कर दी गई है, लेकिन 296 चालकों को 18 दिनों से वेतन नहीं मिला है। जीएम का तबादला होने के कारण चालकों का वेतन जारी नहीं किया जा सका। इससे चालकों की परेशानी भी बढ़ गई है।
पांच साल से रोडवेज विभाग में बैठे एओ आए यूनियनों के निशाने पर
रोडवेज विभाग में पिछले पांच साल से बैठे अकाउंट ऑफिसर कर्मचारी यूनियनों के निशाने पर आ गए हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि एओ जैसे पद पर मात्र दो से तीन साल ही किसी अधिकारी को नियुक्त किया जाना चाहिए। लंबे समय तक रहने से कार्यप्रणाली संदेहास्पद हो जाती है।
रतिया से पंजाब जाने वाले अधिकांश रूट हुए प्रभावित
रतिया से पंजाब के रूटों पर जाने वाली अधिकांश बसें नहीं जा पाई। रतिया से सरदूलगढ़ चार बसें जाती हैं, लेकिन शनिवार को दो ही जा सकें। इसके अलावा डेरा बस्सी, बुढलाडा, पिछलिया मार्ग पर एक भी बस नहीं भेजी जा सकी।
कोट
15 किलोमीटर दूर गांव, फिर भी करना पड़ा इंतजार
रोडवेज की बस सेवा बंद होने से ग्रामीण रूटों पर परेशानी हो गई है। हमारा गांव 15 किलोमीटर दूर है, लेकिन फिर भी काफी देर तक बस का इंतजार करना पड़ा है।
हरभजन, गांव भिरडाना।
अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा जनता भुगत रही
अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा जनता भुगत रही है। ग्रामीण रूट पर तो पूरी तरह रोडवेज बस सेवा गड़बड़ा गई है। प्राइवेट बसों का ही सहारा बचा है।
बलबीर सिंह, ढाणी बिजा लांबा।
हालात बिगड़े हुए हैं
पूरे जिले में मात्र 130 रोडवेज बसें रूट पर चलती थी। अब 69 बसें नहीं चलने के बाद हालात बिगड़े हुए हैं। चंडीगढ़ बैठे अधिकारियों को मामले में संज्ञान लेना चाहिए।
धीरज, गांव अहरवां।
कोट
बजट पहले मंगवाना चाहिए था
अकाउंट ब्रांच के अधिकारियों को बजट पहले मंगवाना चाहिए था। बजट होता तो बीमा खत्म होते ही रिन्यू करवा लिया जाता। यह सरासर अधिकारियों ने लापरवाही बरती है। बिना बीमा गाड़ी चलवाने की जबरदस्ती की जा रही है। अगर कोई हादसा हुआ तो अधिकारी की जिम्मेदारी होगी।
राजू बिश्नोई, जिला उपप्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन।
30 साल की नौकरी में पहली बार ऐसे हालात देखे
मैंने मेरी 30 साल की नौकरी में पहली बार रोडवेज के ऐसे हालात देखे हैं। अधिकारियों की लापरवाही के कारण बदनामी रोडवेज विभाग की हो रही है।
हवासिंह, प्रभारी, रतिया बस स्टैंड।
मुख्यालय को ईमेल भेज रखी है: एओ
बजट तो पहले था, लेकिन क्वार्टरली लिमिट पूरी हो गई थी। बिलों पर ऑब्जेक्शन भी लग गए। ऑब्जेक्शन दूर करवाए तो जीएम का ट्रांसफर हो गया। मुख्यालय को ई-मेल लिख चुके हैं। नए जीएम के आते ही बीमा प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
सुभाष मोंगा, अकाउंट ऑफिसर, फतेहाबाद डिपो।
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थमने की कगार पर रोडवेज का पहिया, 24 सितंबर को 90 फीसदी बसों का बीमा हो जाएगा खत्म
हर रोज 18 हजार किलोमीटर मिस कर रही रोडवेज बसें, सिर्फ किलोमीटर स्कीम वाली बसों का ही सहारा
फोटो 16 की सीरीज.....
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। फतेहाबाद डिपो में रोडवेज का पहिया थमने की कगार पर पहुंच चुका है। रूटों पर दौड़ रही 69 बसों का बीमा खत्म होने के कारण हर रोज रोडवेज की बसें 18 हजार किलोमीटर मिस कर रही हैं। सामान्य दिनों में रोडवेज बसें 38 हजार किलोमीटर का सफर तय करती हैं। मगर इस समय सिर्फ 19 से 20 हजार किलोमीटर ही चल रही हैं। इनमें से भी 11 हजार किलोमीटर की यात्रा तो किलोमीटर स्कीम की बसें कर रही हैं। रोडवेज की बसें तो मात्र 8 से 9 हजार किलोमीटर ही चल पा रही हैं।
दिल्ली, चंडीगढ़, गंगानगर, रावला, जयपुर जैसे लंबे रूटों पर 40 में से 15 फेरे बंद हैं। इस कारण रोजाना 3 से 4 लाख रुपये का नुकसान फतेहाबाद डिपो झेल रहा है। वहीं, लंबे रूटों से लेकर ग्रामीण रूटों के यात्रियों का सफर मुश्किल हो गया है। शहर से 15 से 20 किलोमीटर दूरी के गांवों में भी जाने के लिए यात्रियों को एक से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
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अगले सप्ताह तक रोडवेज मुख्यालय व प्रदेश सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया तो रोडवेज के हालात और बिगड़ जाएंगे। 24 सितंबर तक 90 फीसदी रोडवेज बसों का बीमा खत्म हो जाएगा। ऐसे में 130 में से 117 बसों के पहिये थम जाएंगे। अगर यह स्थिति आई तो मात्र 13 बसों के सहारे पूरे जिले की रोडवेज सेवा शेष रह जाएगी।
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ग्रामीण रूटों पर 35 फेरे हो चुके पूरी तरह बंद
लंबे रूटों पर तो दूसरे डिपो की बसें भी चल रही हैं। मगर सबसे बदहाल स्थिति ग्रामीण रूटों पर हो चुकी है। ग्रामीण रूट के 35 फेरे पूरी तरह बंद हो चुके हैं। करीब 110 रूटों पर सीधे तौर पर रोडवेज बस नहीं जा रही है। इन रूटों के ग्रामीणों के पास सहकारी समिति की बसों व निजी वाहनों का विकल्प बचा है।
296 चालकों को भी 18 दिनों से नहीं मिला वेतन
रोडवेज के अकाउंट ब्रांच के अधिकारियों ने कर्मचारियों के बीच भी तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। मैनेजमेंट स्टाफ व कंडक्टरों की सैलरी तो जारी कर दी गई है, लेकिन 296 चालकों को 18 दिनों से वेतन नहीं मिला है। जीएम का तबादला होने के कारण चालकों का वेतन जारी नहीं किया जा सका। इससे चालकों की परेशानी भी बढ़ गई है।
पांच साल से रोडवेज विभाग में बैठे एओ आए यूनियनों के निशाने पर
रोडवेज विभाग में पिछले पांच साल से बैठे अकाउंट ऑफिसर कर्मचारी यूनियनों के निशाने पर आ गए हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि एओ जैसे पद पर मात्र दो से तीन साल ही किसी अधिकारी को नियुक्त किया जाना चाहिए। लंबे समय तक रहने से कार्यप्रणाली संदेहास्पद हो जाती है।
रतिया से पंजाब जाने वाले अधिकांश रूट हुए प्रभावित
रतिया से पंजाब के रूटों पर जाने वाली अधिकांश बसें नहीं जा पाई। रतिया से सरदूलगढ़ चार बसें जाती हैं, लेकिन शनिवार को दो ही जा सकें। इसके अलावा डेरा बस्सी, बुढलाडा, पिछलिया मार्ग पर एक भी बस नहीं भेजी जा सकी।
कोट
15 किलोमीटर दूर गांव, फिर भी करना पड़ा इंतजार
रोडवेज की बस सेवा बंद होने से ग्रामीण रूटों पर परेशानी हो गई है। हमारा गांव 15 किलोमीटर दूर है, लेकिन फिर भी काफी देर तक बस का इंतजार करना पड़ा है।
हरभजन, गांव भिरडाना।
अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा जनता भुगत रही
अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा जनता भुगत रही है। ग्रामीण रूट पर तो पूरी तरह रोडवेज बस सेवा गड़बड़ा गई है। प्राइवेट बसों का ही सहारा बचा है।
बलबीर सिंह, ढाणी बिजा लांबा।
हालात बिगड़े हुए हैं
पूरे जिले में मात्र 130 रोडवेज बसें रूट पर चलती थी। अब 69 बसें नहीं चलने के बाद हालात बिगड़े हुए हैं। चंडीगढ़ बैठे अधिकारियों को मामले में संज्ञान लेना चाहिए।
धीरज, गांव अहरवां।
कोट
बजट पहले मंगवाना चाहिए था
अकाउंट ब्रांच के अधिकारियों को बजट पहले मंगवाना चाहिए था। बजट होता तो बीमा खत्म होते ही रिन्यू करवा लिया जाता। यह सरासर अधिकारियों ने लापरवाही बरती है। बिना बीमा गाड़ी चलवाने की जबरदस्ती की जा रही है। अगर कोई हादसा हुआ तो अधिकारी की जिम्मेदारी होगी।
राजू बिश्नोई, जिला उपप्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन।
30 साल की नौकरी में पहली बार ऐसे हालात देखे
मैंने मेरी 30 साल की नौकरी में पहली बार रोडवेज के ऐसे हालात देखे हैं। अधिकारियों की लापरवाही के कारण बदनामी रोडवेज विभाग की हो रही है।
हवासिंह, प्रभारी, रतिया बस स्टैंड।
मुख्यालय को ईमेल भेज रखी है: एओ
बजट तो पहले था, लेकिन क्वार्टरली लिमिट पूरी हो गई थी। बिलों पर ऑब्जेक्शन भी लग गए। ऑब्जेक्शन दूर करवाए तो जीएम का ट्रांसफर हो गया। मुख्यालय को ई-मेल लिख चुके हैं। नए जीएम के आते ही बीमा प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
सुभाष मोंगा, अकाउंट ऑफिसर, फतेहाबाद डिपो।