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दवा की जगह धक्के और इंतजार
fatehabad
Updated Tue, 15 Jul 2014 11:47 PM IST
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सामान्य अस्पताल में दवा लेने के लिए सुबह से दोपहर तक मरीजों को लाइन में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। कहने को तो सीनियर सिटीजन, महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग खिड़कियां हैं, लेकिन खोला एक ही खिड़की को जाता है। इससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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कुछ समय पहले लाखों रुपये की लागत से कंप्यूटराइज्ड टॉकन सिस्टम शुरू किया गया था, लेकिन उसे भी एक महीना चलाने के बाद बंद कर दिया गया। इस वजह से मरीजों को लाइन में खड़े होकर धक्कामुक्की सहते हुए दवा लेनी पड़ती है। इस वजह से उनका दर्द और बढ़ जाता है। अब स्वास्थ्य विभाग टाकॅन सिस्टम की जगह माइक सिस्टम लगाने की बात कह रहा है।
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इस तरह तो लाखों रुपये की लागत से लगाया गया टॉकन सिस्टम पूरी तरह से पैसे की बर्बादी साबित हुआ। अब यह भी जांच का विषय है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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इलाज के लिए तीन जगह लाइन
सामान्य अस्पताल में उपचार करवाने के लिए मरीज को पहले तो पर्ची कटवाने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। जब पर्ची कटती है तो डाक्टर के पास चेकअप करवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। जब डाक्टर से चेकअप करवाने के बाद दवा लेने की बारी आती है तो दवाई लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
लाखों रुपये की लागत से बना कंप्यूटराइज्ड सिस्टम पड़ा है बंद
मरीजों को दवा लेने में लाइनों का झंझट न हो, इसलिए कंप्यूटराइज्ड टॉकन सिस्टम शुरू किया गया था। जब इसका ट्रायल लिया गया तो स्वास्थ्य विभाग को इसका सिस्टम समझ नहीं आया और यह लगाने के कुछ दिन बाद से अब तक बंद पड़ा है। इसका नतीजा यह है कि मरीजों को लाइन में लगकर दवा लेनी पड़ती है।
क्या था टॉकन सिस्टम
इस सिस्टम के तहत दवा लेने वाले मरीज को कंप्यूटर से उसके नंबर की पर्ची काटकर दे दी जाती थी। दवा लेने वाले स्थान पर सीनियर सिटीजन, पुरुष और महिला के लिए डिस्प्ले लगाई गई। इससे मरीज को लाइन में लगने की जरूरत नहीं थी।
जब उसकी दवा देने का नंबर आएगा तब उस डिस्प्ले पर नंबर प्रदर्शित हो जाता है। इससे मरीज नंबर आने पर आराम से खिड़की पर दवा ले सकता है। जब तक उसका नंबर बोर्ड पर नहीं आता वह आराम से कहीं बैठ सकता है। नंबर डिस्प्ले बोर्ड पर चलते रहने से मरीज को यह भी पता लगता रहता है कि उसका नंबर कितनी देर में आ सकता है।
पहले अंदर गर्मी विच खड़े होइये फिर दवाई लेन वास्ते
हजरावां खुर्द से आई बुजुर्ग धन्नो बाई ने बताया कि सुबह 9 बजे दे असी हस्पताल विच आए होये हैं पहले तां अखां दिखान वास्ते लाइन विच लगे रहे हुण इनी देर हो गई दवाई लेन वास्ते लाइन विच खड़े हैं। असीं तां परेशान हो गए हैं।
भोड़िया गांव से आए 62 वर्षीय दलबीर सिहाग ने कहा कि कहने को सीनियर सिटीजन की खिड़की है परंतु यह तो बंद पड़ी है और उन्हें दवा लेने के लिए महिलाओं की लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। ठाकर बस्ती से आए राजकुमार ने बताया कि वह पहले से सांस की बीमारी का शिकार है और वह आधे घंटे से दवा लेने के लिए लाइन में खड़ा है।
तकनीकी दिक्कत आई तो बंद ही कर दिया
सामान्य अस्पताल की फार्मासिस्ट ज्योति आहुजा ने बताया कि कंप्यूटराइज्ड टॉकन सिस्टम शुरू तो किया मरीजों की सुविधा के लिए हुआ था, लेकिन इसमें तकनीकी दिक्कत होेने के कारण यह मरीजों की असुविधा का कारण बन गया है। इसलिए इसे बंद कर दिया गया है।
अब माइक से चलाएंगे काम
एसएमओ डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि टॉकन डिस्प्ले सिस्टम की जगह मरीजों की सुविधा के लिए माइक सिस्टम लागू किया जाएगा। इसमें मरीज से पर्ची लेने के बाद उसे दवा देने के लिए माइक से आवाज लगाकर बुलाया जाएगा। इससे मरीज को लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वह बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर सकता है। दवा देने के लिए तीनों खिड़कियों को खोलना जरूरी है यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो वे स्वयं सुबह जाकर इसकी जांच करेंगे।