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Fatehabad News: खेतों को बेजान कर रही यूरिया से बंपर पैदावार की चाहत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Feb 2024 11:56 PM IST
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Problem of beans in 40 thousand acres, farmers are rearing shrimp
गांव ठुईयां में सेम के कारण खराब हुई फसल। 
फतेहाबाद। बंपर पैदावार की चाह में किसान डीएपी व यूरिया का प्रयोग इतना अधिक कर रहे हैं कि जमीन के नीचे पपड़ी की परत जमने लगी है, जिससे खेत बेजान हो रहे हैं। परत की वजह से बारिश का पानी जमीन के नीचे नहीं जा रहा। इससे क्षेत्र के अनेक गांवों में सेम की समस्या पैदा हो गई है। फतेहाबाद जिले की करीब 40 हजार एकड़ जमीन ऐसी है, जहां बारिश होते ही कई दिनाें तक पानी खेतों से नहीं निकलता। यही नहीं पानी का चौव्वा भी दो से तीन फुट तक आ गया है।
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बंपर पैदावार के लालच में किसान कृषि व मृदा वैज्ञानिकों की अनुशंसा से दो से ढाई गुना डीएपी व यूरिया अपने खेतों में डाल रहे हैं। इससे पैदावार तो बढ़ी है, लेकिन मिट्टी में नीचे से कठोरता आने लगी है। इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि करीब 4 साल पहले जहां जिले के कुछ गांवों में बारिश का पानी जमीन के नीचे चला जाता था, वहीं पानी अब खेताें के ऊपर ही रहता है, जिससे सेम की समस्या गांवों में बढ़ रही है।
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विशेषज्ञों के अनुसार सेमग्रस्त इलाकों में झींगा मत्स्य पालन काफी कारगर है। खारे पानी में झींगा मत्स्य पालन काफी कारगर है। इसके लिए सरकार किसानों को सब्सिडी भी दे रही है। फतेहाबाद जिले में किसान इस ओर अग्रसर भी हुए हैं और जिले में झींगा मछली पालन की 46 यूनिट लग गई हैं। इसके अलावा सेमग्रस्त इलाकों में सफेदे के पेड़ लगाना भी कारगर है, क्योंकि सफेदे का पेड़ पानी को सोख लेता है। संवाद
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डीएपी की वजह से निचली परत हो रही कठोर
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो डीएपी में अमोनियम फास्फेट साल्ट व हाइड्रोजन होता है। अधिक डीएपी व यूरिया का प्रयोग करने से जमीन के नीचे कठोर पपड़ी की परत बनने लगी है। इसका असर यह होता है कि जमीन के तीन से चार फुट तक नीचे इस परत के बनने के कारण बारिश का पानी जमीन के नीचे नहीं जा पाता है। इसका असर 2022 जुलाई माह में आई भीषण बारिश के दौरान देखा गया था। इस दौरान जिले के करीब 50 गांवों में खेतों से पानी महीनों तक नहीं निकल पाया और कपास की फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। पानी निकालने के लिए सिंचाई विभाग को 2 से 3 माह का समय लगा था।



कोट ----
फतेहाबाद के गांव खैरातीखेड़ा, ढाणी सांचला, मानावाली, खाबड़ाकलां, भूना, भीमेवाला, ठुईयां, बोस्ती, दैयड़ व जांडली में झींगा पालन के लिए किसानों ने यूनिट लगाई है। इसके लिए सरकार 14 लाख तक की लागत मानती है और अनुसूचित जाति के लोगों को इस पर 60 फीसदी व ओबीसी व तथा सामान्य वर्ग को 40 फीसदी की सब्सिडी देती है।

-घनश्याम शर्मा, जिला मत्स्य पालन अधिकारी, फतेहाबाद।

कोट -----
किसान सेम की समस्या को दूर करने के लिए रासायनिक खादों का कम प्रयोग करके जैविक खादों की ओर अधिक ध्यान दें। रासायनिक खादों के प्रयोग से जमीन के नीचे परत बिछ रही है, जो खतरनाक साबित हो रही है। वहीं भट्टूकलां क्षेत्र के 9 गांवों में कृषि विभाग की ओर से सोलर सिस्टम से वर्टिकल ड्रेनेज सिस्टम से पानी को निकालने का कार्य भी किया जाएगा।
-बिजेंद्र सिंह, कृषि मृदा संरक्षण अधिकारी, फतेहाबाद।
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