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Fatehabad News: नशे के रूप में इस्तेमाल हो रहीं दर्द निवारक गोलियां
Wed, 04 Dec 2024 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 04 Dec 2024 11:28 PM IST
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फतेहाबाद। नशाखोरी के बदले ट्रेंड ने युवाओं की नस-नस में जहर घोल दिया है। हेरोइन मिलना मुश्किल होने के बाद युवा नशे की गोलियों का घोल बनाकर इंजेक्शन के जरिये ले रहे हैं। ऐसे में नशे के रूप में प्रयोग किए जाने की वजह से ये दर्द निवारक गोलियां जान लेने लगी हैं। नशे पर अंकुश लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और दुकानदारों के लालच के कारण फतेहाबाद में इसका प्रचलन काफी तेजी से बढ़ा है। बड़ी बात यह कि नशे के दलदल में फंसे युवकों को यह दवा दुकानदार बगैर पर्ची के मुहैया करा देते हैं, जिसे आम लोगों के लिए बगैर पर्ची के लेना मुश्किल है। इन्हें देने से पहले दुकानदार डॉक्टर की पर्ची तक नहीं मांगते।
नशे पड़ताल में यह सामने आया कि 100-150 रुपये मुनाफे में ही इन दवाओं की डिलिवरी तक दी जा रही है। पर्ची पर ही मिलने वाली दवाइयाें और कैप्सूल को हमारे प्रतिनिधि ने शहर के चार से पांच मेडिकल स्टोर पर जाकर मांगा तो उपलब्ध नहीं हो पाई लेकिन पहले से गोलियों का नशा ले रहे 25 साल के युवक को फोन कॉल पर उपलब्ध करा दी गईं।
युवक ने बताया कि हेरोइन मिलनी मुश्किल हो रही है और महंगी भी है तो इसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। पहचान उजागर न करने की शर्त पर युवक ने एक कॉलोनी के अंदर चल रहे मेडिकल की जानकारी दी।
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जब मेडिकल पर पहुंचे और संबंधित दर्द होने की बात कहकर दवाइयां मांगी तो संचालक ने एक बार देने में आनाकानी की लेकिन जब 100 रुपये ज्यादा देने का लालच दिए तो तैयार हो गया। संचालक ने नशे में यूज की जाने वाली 10 गोलियां 400 रुपये में और कैप्सूल 600 रुपये में उपलब्ध करवाए।
हेरोइन मिलनी हुई मुश्किल तो कर रहे इस्तेमाल :
हेरोइन जिसे चिट्टा भी कहा जाता है पर काफी हद तक रोक लगी है लेकिन इससे युवाओं में नशे की लत कम नहीं हुई है। युवाओं ने नशे को लेकर ट्रेंड बदल लिया है। युवा अब हेरोइन की जगह इन्हीं गोलियों का घोल बनाकर इंजेक्शन के जरिए नशा ले रहे हैं। नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में ओपीडी में जो मरीज आ रहे हैं उनमें 70 से 80 फीसदी तक मरीज ऐसे ही हैं। इनकी काउंसलिंग में ये सामने आ रहा है कि इन्हें गोलियां आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। गांवों में कई किरयाणा दुकानों तक में मिल रही हैं। ये ही नहीं कई मेडिकल संचालक बिना डॉक्टर पर्ची दे रहे हैं। युवा अब हेरोइन की जगह इन्हीं गोलियों का घोल बनाकर इंजेक्शन के जरिए नशा ले रहे हैं। नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में ओपीडी में जो मरीज आ रहे हैं उनमें 70 से 80 फीसदी तक मरीज ऐसे ही हैं। इनकी काउंसलिंग में ये सामने आ रहा है कि इन्हें गोलियां आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। गांवों में कई किरयाणा दुकानों तक में मिल रही हैं। ये ही नहीं कई मेडिकल संचालक बिना डॉक्टर पर्ची दे रहे हैं।
इंजेक्शन से नशा लेकर हो रहे काला-पीलिया का शिकार
नशा मुक्ति केंद्र में पिछले साल ओएसटी सेंटर की शुरुआत की गई। यहां पर इंजेक्शन के जरिए नशा लेने वाले मरीजों का रजिस्ट्रेशन करके दवाई देकर नशा छुड़वाया जाता है। यहां अक्तूबर तक 423 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है और 343 की दवाई शुरू हुई। जांच में 166 मरीज काला-पीलिया का शिकार मिले है और 59 जांच में एचआईवी ग्रस्त मिले हैं।
40 गांवों को नशा मुक्त करने का दावा
नशा मुक्ति टीम इंचार्ज सब इंस्पेक्टर सुंदर मुसाफिर का कहना है कि टीम अब तक 40 गांवों को नशा मुक्त कर चुकी है। जिसमें गांव अयाल्की, भरपूर, मताना, कुम्हारिया, भोड़ा होशनाक, ढाणी ठोबा, खान मोहम्मद, ढाणी चाननराम, गिलाखेड़ा, बनावाली, सिरढ़ान, हमजापुर, रत्ताटिब्बा, बनावाली सोत्तर, ढाणी मुंशीवाली, नत्थूवाल, चनकोठी, खैरपुर, कलौठा, वार्ड मॉडल टाउन रतिया, अहलीसदर, शहीदांवाली, कुकड़ावाली, हरिपुरा, भोडिया खेड़ा, बोदीवाली, खैरातीखेड़ा, नथवान, ढाणी टाहलीवाली, ढाणी माजरा, बोसवाल, रजाबाद, बहलभोमिया, ढाणी भोजराज, दिगोह, खास पठाना, मामुपुर, लांबा, मुस्साखेड़ा और मुदलिया शामिल है। टीम के मुताबिक इन गांवों में युवकों की काउंसलिंग करके और उपचार करवाया के द्वारा नशा छुड़वाया गया है।
प्रतिबंधित गोलियों की कम दाम में हो रही आपूर्ति
एंटी नारकोक्टिस टीम ने 22 अगस्त को भूना रोड पर ऑटो मार्केट के सामने से एक युवक अशोक नगर निवासी रोहित को 990 प्रतिबंधित गोलियों के साथ पकड़ा था। पूछताछ में उसने बताया था कि दिल्ली का युवक सप्लाई देकर गया था। मामले में पुलिस ने सप्लाई करने वाले दिल्ली के सलीमपुर निवासी रोशन लाल को पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि वह दिल्ली से सस्ते दामों में खरीदकर यहां सप्लाई करता है।
नाइजीरियन दिल्ली से भेज रहे हेरोइन की खेप
क्षेत्र में हेरोइन की सप्लाई दिल्ली से हो रही है और वहां नाइजीरियन बेच रहे है। मामलों में पुलिस नाइजीरियन को भी पकड़ चुकी है। अप्रैल 2022 में टोहाना में पुलिस ने दो युवकों को 280 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था। पूछताछ में सामने आया था कि उन्हें दिल्ली में नाइजीरियन ने सप्लाई दी थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी नाइजीरियन को भी पकड़ लिया था।
नशा मुक्ति केंद्र में ओपीडी के दौरान पहले हेरोइन के मामले ज्यादा आ रहे थे लेकिन अब 70 से 80 फीसदी मरीज टैबलेट का पानी में घोल बनाकर नशा लेने के आ रहे है। काउंसलिंग में खुद युवा बताते है कि उन्हें आसानी से उपलब्ध हो रही है। ये गोली दर्द निवारक है। इसे लेने से एक बार शरीर में फुर्ती आ जाती है बाद में इसकी लत लग जाती है।
- डॉ. गिरीश, नोडल अधिकारी नशा मुक्ति केंद्र
नशा वाली ये दवाएं एनडीपीएस एक्ट में नहीं आती। हालांकि इसे डॉक्टर पर्ची पर ही मरीज को दिया जा सकता है। अगर कोई मेडिकल संचालक बिना पर्ची बेचता है तो उस उसका लाइसेंस सस्पेंड भी हो सकता है। किराना दुकान पर गोलियां बेचने की शिकायत नहीं मिली है अगर कोई ऐसा करता पकड़ा जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।
- दिनेश कुमार, ड्रग कंट्रोल ऑफिसर
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नशे पड़ताल में यह सामने आया कि 100-150 रुपये मुनाफे में ही इन दवाओं की डिलिवरी तक दी जा रही है। पर्ची पर ही मिलने वाली दवाइयाें और कैप्सूल को हमारे प्रतिनिधि ने शहर के चार से पांच मेडिकल स्टोर पर जाकर मांगा तो उपलब्ध नहीं हो पाई लेकिन पहले से गोलियों का नशा ले रहे 25 साल के युवक को फोन कॉल पर उपलब्ध करा दी गईं।
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युवक ने बताया कि हेरोइन मिलनी मुश्किल हो रही है और महंगी भी है तो इसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। पहचान उजागर न करने की शर्त पर युवक ने एक कॉलोनी के अंदर चल रहे मेडिकल की जानकारी दी।
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जब मेडिकल पर पहुंचे और संबंधित दर्द होने की बात कहकर दवाइयां मांगी तो संचालक ने एक बार देने में आनाकानी की लेकिन जब 100 रुपये ज्यादा देने का लालच दिए तो तैयार हो गया। संचालक ने नशे में यूज की जाने वाली 10 गोलियां 400 रुपये में और कैप्सूल 600 रुपये में उपलब्ध करवाए।
हेरोइन मिलनी हुई मुश्किल तो कर रहे इस्तेमाल :
हेरोइन जिसे चिट्टा भी कहा जाता है पर काफी हद तक रोक लगी है लेकिन इससे युवाओं में नशे की लत कम नहीं हुई है। युवाओं ने नशे को लेकर ट्रेंड बदल लिया है। युवा अब हेरोइन की जगह इन्हीं गोलियों का घोल बनाकर इंजेक्शन के जरिए नशा ले रहे हैं। नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में ओपीडी में जो मरीज आ रहे हैं उनमें 70 से 80 फीसदी तक मरीज ऐसे ही हैं। इनकी काउंसलिंग में ये सामने आ रहा है कि इन्हें गोलियां आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। गांवों में कई किरयाणा दुकानों तक में मिल रही हैं। ये ही नहीं कई मेडिकल संचालक बिना डॉक्टर पर्ची दे रहे हैं। युवा अब हेरोइन की जगह इन्हीं गोलियों का घोल बनाकर इंजेक्शन के जरिए नशा ले रहे हैं। नागरिक अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में ओपीडी में जो मरीज आ रहे हैं उनमें 70 से 80 फीसदी तक मरीज ऐसे ही हैं। इनकी काउंसलिंग में ये सामने आ रहा है कि इन्हें गोलियां आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। गांवों में कई किरयाणा दुकानों तक में मिल रही हैं। ये ही नहीं कई मेडिकल संचालक बिना डॉक्टर पर्ची दे रहे हैं।
इंजेक्शन से नशा लेकर हो रहे काला-पीलिया का शिकार
नशा मुक्ति केंद्र में पिछले साल ओएसटी सेंटर की शुरुआत की गई। यहां पर इंजेक्शन के जरिए नशा लेने वाले मरीजों का रजिस्ट्रेशन करके दवाई देकर नशा छुड़वाया जाता है। यहां अक्तूबर तक 423 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है और 343 की दवाई शुरू हुई। जांच में 166 मरीज काला-पीलिया का शिकार मिले है और 59 जांच में एचआईवी ग्रस्त मिले हैं।
40 गांवों को नशा मुक्त करने का दावा
नशा मुक्ति टीम इंचार्ज सब इंस्पेक्टर सुंदर मुसाफिर का कहना है कि टीम अब तक 40 गांवों को नशा मुक्त कर चुकी है। जिसमें गांव अयाल्की, भरपूर, मताना, कुम्हारिया, भोड़ा होशनाक, ढाणी ठोबा, खान मोहम्मद, ढाणी चाननराम, गिलाखेड़ा, बनावाली, सिरढ़ान, हमजापुर, रत्ताटिब्बा, बनावाली सोत्तर, ढाणी मुंशीवाली, नत्थूवाल, चनकोठी, खैरपुर, कलौठा, वार्ड मॉडल टाउन रतिया, अहलीसदर, शहीदांवाली, कुकड़ावाली, हरिपुरा, भोडिया खेड़ा, बोदीवाली, खैरातीखेड़ा, नथवान, ढाणी टाहलीवाली, ढाणी माजरा, बोसवाल, रजाबाद, बहलभोमिया, ढाणी भोजराज, दिगोह, खास पठाना, मामुपुर, लांबा, मुस्साखेड़ा और मुदलिया शामिल है। टीम के मुताबिक इन गांवों में युवकों की काउंसलिंग करके और उपचार करवाया के द्वारा नशा छुड़वाया गया है।
प्रतिबंधित गोलियों की कम दाम में हो रही आपूर्ति
एंटी नारकोक्टिस टीम ने 22 अगस्त को भूना रोड पर ऑटो मार्केट के सामने से एक युवक अशोक नगर निवासी रोहित को 990 प्रतिबंधित गोलियों के साथ पकड़ा था। पूछताछ में उसने बताया था कि दिल्ली का युवक सप्लाई देकर गया था। मामले में पुलिस ने सप्लाई करने वाले दिल्ली के सलीमपुर निवासी रोशन लाल को पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि वह दिल्ली से सस्ते दामों में खरीदकर यहां सप्लाई करता है।
नाइजीरियन दिल्ली से भेज रहे हेरोइन की खेप
क्षेत्र में हेरोइन की सप्लाई दिल्ली से हो रही है और वहां नाइजीरियन बेच रहे है। मामलों में पुलिस नाइजीरियन को भी पकड़ चुकी है। अप्रैल 2022 में टोहाना में पुलिस ने दो युवकों को 280 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा था। पूछताछ में सामने आया था कि उन्हें दिल्ली में नाइजीरियन ने सप्लाई दी थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी नाइजीरियन को भी पकड़ लिया था।
नशा मुक्ति केंद्र में ओपीडी के दौरान पहले हेरोइन के मामले ज्यादा आ रहे थे लेकिन अब 70 से 80 फीसदी मरीज टैबलेट का पानी में घोल बनाकर नशा लेने के आ रहे है। काउंसलिंग में खुद युवा बताते है कि उन्हें आसानी से उपलब्ध हो रही है। ये गोली दर्द निवारक है। इसे लेने से एक बार शरीर में फुर्ती आ जाती है बाद में इसकी लत लग जाती है।
- डॉ. गिरीश, नोडल अधिकारी नशा मुक्ति केंद्र
नशा वाली ये दवाएं एनडीपीएस एक्ट में नहीं आती। हालांकि इसे डॉक्टर पर्ची पर ही मरीज को दिया जा सकता है। अगर कोई मेडिकल संचालक बिना पर्ची बेचता है तो उस उसका लाइसेंस सस्पेंड भी हो सकता है। किराना दुकान पर गोलियां बेचने की शिकायत नहीं मिली है अगर कोई ऐसा करता पकड़ा जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।
- दिनेश कुमार, ड्रग कंट्रोल ऑफिसर