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मंडियों में गुंदली पहुंचने से प्याज का भाव गिरा
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सब्जी की दुकान पर आया हरा प्याज
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। पहले अफगानिस्तानी और अब नई फसल गुंदली सब्जी मंडियों में आने के बाद प्याज के भाव गिरकर 60 रुपये प्रतिकिलो तक रह गए हैं। इससे उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है। मालूम हो कि इससे पूर्व प्याज यहां 130 से 150 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा था। इस सप्ताह मंडियों में लोकल प्याज गुदंली की आवक होनी शुरू हो गई, हालांकि यह प्याज अभी हरे है, लेकिन रेट और प्याज के स्वाद को देखते हुए लोग सूखे प्याज की हरे प्याज को तव्वजो दे रहे हैं।
पिछले सप्ताह फतेहाबाद की सब्जी मंडी में अफगानिस्तानी प्याज आने के बाद प्याज की दरों में थोड़ी गिरावट आ गई थी। सरकार ने प्याज आयात कर अफगानिस्तान का प्याज मंगवाया। इसके यहां आने पर लोकल प्याज की दरें 130 से गिरकर 90 रुपये प्रतिकिलो रह गई। जबकि अफगानी प्याज की कीमत अभी भी 50 रुपये के करीब है। साइज में बड़ा होने तथा बेस्वाद होने के कारण यह लोगों को पसंद नहीं किया।
अब प्याज की लोकल पैदावार फतेहाबाद की मंडियों में आनी शुरू हो गई। इसकी कीमत ही मात्र 40 रुपये प्रतिकिलो है। लोग इस गुंदली को पसंद भी कर रहे हैं। बड़ी बात है कि अब लोग इसका डबल यूज कर रहे हैं। गुंदली का ऊपरी हिस्सा प्याज के तौर तथा निचले पत्तों को आलू की सब्जी के साथ बना रहे हैं। ऐसे में हरे प्याज गुंदली का डबल हक ले रहे हैं। हरे प्याज आने के बाद सूखे प्याज के भाव 90 रुपये प्रतिकिलो से कम होकर 60 रुपये प्रतिकिलो तक रह गए। सब्जी विक्रेता यूनियन के प्रधान सुभाष शर्मा बताते है कि पहले अफगानिस्तानी प्याज आने से प्याज के दाम कम हुए और अब हरे प्याज आने से प्याज की दरें आधी रह गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्याज के दाम अभी ओर गिरेंगे।
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पिछले सप्ताह फतेहाबाद की सब्जी मंडी में अफगानिस्तानी प्याज आने के बाद प्याज की दरों में थोड़ी गिरावट आ गई थी। सरकार ने प्याज आयात कर अफगानिस्तान का प्याज मंगवाया। इसके यहां आने पर लोकल प्याज की दरें 130 से गिरकर 90 रुपये प्रतिकिलो रह गई। जबकि अफगानी प्याज की कीमत अभी भी 50 रुपये के करीब है। साइज में बड़ा होने तथा बेस्वाद होने के कारण यह लोगों को पसंद नहीं किया।
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अब प्याज की लोकल पैदावार फतेहाबाद की मंडियों में आनी शुरू हो गई। इसकी कीमत ही मात्र 40 रुपये प्रतिकिलो है। लोग इस गुंदली को पसंद भी कर रहे हैं। बड़ी बात है कि अब लोग इसका डबल यूज कर रहे हैं। गुंदली का ऊपरी हिस्सा प्याज के तौर तथा निचले पत्तों को आलू की सब्जी के साथ बना रहे हैं। ऐसे में हरे प्याज गुंदली का डबल हक ले रहे हैं। हरे प्याज आने के बाद सूखे प्याज के भाव 90 रुपये प्रतिकिलो से कम होकर 60 रुपये प्रतिकिलो तक रह गए। सब्जी विक्रेता यूनियन के प्रधान सुभाष शर्मा बताते है कि पहले अफगानिस्तानी प्याज आने से प्याज के दाम कम हुए और अब हरे प्याज आने से प्याज की दरें आधी रह गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्याज के दाम अभी ओर गिरेंगे।
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