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Fatehabad News: स्वयं सहायता समूह से जुड़ी नेहा ने खड़ा किया सात लाख का कारोबार
Wed, 07 Oct 2026 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Wed, 07 Oct 2026 10:42 PM IST
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रतिया जानकारी देते हुए नेहा रानी, स्त्रोत स्वयं
- फोटो : 1
रतिया। गांव रत्ताखेड़ा की नेहा रानी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर घर से शुरू किए नोटबुक कारोबार को विस्तार दिया। आज वह पति के साथ मिलकर सालाना करीब 7 लाख रुपये का कारोबार कर रही हैं। साथ ही दूसरी महिलाओं को पार्ट टाइम रोजगार भी दे रही हैं।
नेहा रानी के परिवार में सात सदस्य हैं। परिवार की आजीविका मुख्य रूप से पति सुशील कुमार की खेती पर निर्भर थी। नेहा पढ़ी-लिखी थीं और आत्मनिर्भर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान देना चाहती थीं। हालांकि उनके अनुकूल रोजगार का अवसर नहीं मिल पा रहा था।
फरवरी 2023 में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की फील्ड टीम गांव पहुंची। टीम ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाने के लिए प्रेरित किया। नेहा ने भी इस पहल से जुड़ने का फैसला किया। उन्होंने आसपास की महिलाओं को समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। 20 फरवरी 2023 को हरमन महिला स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ।
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समूह की महिलाओं ने नेहा की शिक्षा, व्यवहार और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें सदस्य बनाया। समूह से जुड़ने के बाद मिशन स्टाफ ने नेहा को रोजगार आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। नेहा पहले से घर पर नोटबुक बनाने का काम करती थीं। वह इसे बड़े स्तर पर ले जाना चाहती थीं। मिशन से सहयोग मिलने के बाद उन्होंने काम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।
24 अगस्त 2024 को नेहा ने घर में ही एक बड़ा कमरा तैयार करवाया। इसमें नोटबुक बनाने की मशीनें लगाईं। कारोबार बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर संगठन से करीब 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली। इस राशि से उन्होंने थोक में कच्चा माल खरीदा। इसके बाद विभिन्न स्कूलों के नाम वाली कॉपियां तैयार कर आसपास के स्कूलों में बेचनी शुरू कीं।
समय के साथ उन्होंने अलग-अलग तरह की कॉपियां, डायरी और नोट पेड भी तैयार करने शुरू किए। कारोबार आसपास के दुकानदारों तक पहुंचा। इसके बाद उन्होंने जिले में भी अपने उत्पादों की बिक्री शुरू कर दी। कारोबार को और बढ़ाने के लिए नेहा को बैंक से करीब 50 हजार रुपये का मुद्रा ऋण मिला।
मेहनत के साथ कारोबार लगातार बढ़ता गया। आज नेहा और उनके पति मिलकर इस काम से करीब 7 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। कारोबार शुरू करने के लिए लिया गया पैसा भी लगभग वापस किया जा चुका है।
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आत्मविश्वास के साथ पहचान भी मिली
डीआरडीए के सीईओ सुरेश कुमार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह केवल आर्थिक मदद का माध्यम नहीं हैं। इनके माध्यम से महिलाओं को आत्मविश्वास मिलता है और उन्हें अपनी पहचान बनाने का अवसर भी मिलता है।
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नेहा रानी के परिवार में सात सदस्य हैं। परिवार की आजीविका मुख्य रूप से पति सुशील कुमार की खेती पर निर्भर थी। नेहा पढ़ी-लिखी थीं और आत्मनिर्भर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान देना चाहती थीं। हालांकि उनके अनुकूल रोजगार का अवसर नहीं मिल पा रहा था।
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फरवरी 2023 में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की फील्ड टीम गांव पहुंची। टीम ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बनाने के लिए प्रेरित किया। नेहा ने भी इस पहल से जुड़ने का फैसला किया। उन्होंने आसपास की महिलाओं को समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। 20 फरवरी 2023 को हरमन महिला स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ।
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समूह की महिलाओं ने नेहा की शिक्षा, व्यवहार और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें सदस्य बनाया। समूह से जुड़ने के बाद मिशन स्टाफ ने नेहा को रोजगार आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। नेहा पहले से घर पर नोटबुक बनाने का काम करती थीं। वह इसे बड़े स्तर पर ले जाना चाहती थीं। मिशन से सहयोग मिलने के बाद उन्होंने काम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।
24 अगस्त 2024 को नेहा ने घर में ही एक बड़ा कमरा तैयार करवाया। इसमें नोटबुक बनाने की मशीनें लगाईं। कारोबार बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर संगठन से करीब 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली। इस राशि से उन्होंने थोक में कच्चा माल खरीदा। इसके बाद विभिन्न स्कूलों के नाम वाली कॉपियां तैयार कर आसपास के स्कूलों में बेचनी शुरू कीं।
समय के साथ उन्होंने अलग-अलग तरह की कॉपियां, डायरी और नोट पेड भी तैयार करने शुरू किए। कारोबार आसपास के दुकानदारों तक पहुंचा। इसके बाद उन्होंने जिले में भी अपने उत्पादों की बिक्री शुरू कर दी। कारोबार को और बढ़ाने के लिए नेहा को बैंक से करीब 50 हजार रुपये का मुद्रा ऋण मिला।
मेहनत के साथ कारोबार लगातार बढ़ता गया। आज नेहा और उनके पति मिलकर इस काम से करीब 7 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। कारोबार शुरू करने के लिए लिया गया पैसा भी लगभग वापस किया जा चुका है।
आत्मविश्वास के साथ पहचान भी मिली
डीआरडीए के सीईओ सुरेश कुमार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह केवल आर्थिक मदद का माध्यम नहीं हैं। इनके माध्यम से महिलाओं को आत्मविश्वास मिलता है और उन्हें अपनी पहचान बनाने का अवसर भी मिलता है।