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लोक अदालत ने दंपती का मनमुटाव दूर कर हंसी-खुशी के साथ घर किया रवाना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2022 11:09 PM IST
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Lok Adalat removes couple's discord and leaves for home with laughter
राष्ट्रीय लोक अदालत में केसों का निपटारा करते अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जीएस वधवा - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। न्यायिक परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में कई मामले ऐसे सामने आए जिनको आसानी से हल किया गया। यही मामले कई वर्षों से कोर्ट में तारीख पर तारीख पर चल रहे थे। एक कैसा ऐसा भी था जिसमें थोड़े से मनमुटाव के चलते पत्नी ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवा रखा था। अदालत ने दोनों के बीच सुलह करवा दी और पति पत्नी हंसी खुशी अपने घर चले गए।
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केस-1
तीन साल पहले हुआ था विवाह, हुुआ मनमुटाव
शहर के मॉडल टाउन निवासी युवती का 27 नवंबर 2019 को अशोक नगर निवासी युवक के साथ विवाह हुआ था। शादी के बाद दंपती में किसी बात को लेकर मनमुटाव हो गया। मनमुटाव इतना बढ़ा कि युवती ने अपने पति, सास, ससुर के खिलाफ कोर्ट में घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवा दिया। मामला सीजेएम कोर्ट अंबरदीप सिंह की अदालत में चल रहा था। शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में सीजेएम अंबरदीप सिंह ने पति पत्नी के बीच हुए मनमुटाव को दूर करवाया। दोनों में सहमति बन गई और पत्नी ने अपने पति के खिलाफ किसी भी कार्रवाई करवाने से इनकार करने का शपथ पत्र दे दिया। वहीं उसके पति ने भी अपनी पत्नी को हंसी खुशी साथ रखने व खुशहाल जीवन जीने की बात कही। इसके बाद दंपती हंसी खुशी कोर्ट से चली गई।
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केस-2
पांच साल पुरानी दुश्मनी हुई समाप्त
इसी प्रकार लोक अदालत में पांच साल पुराने विवाद को भी आसानी से निपटा दिया। गांव फुलां निवासी पवन कुमार ने 26 अप्रैल 2017 को सदर थाना फतेहाबाद में गांव के ही एक परिवार के दो सगे भाइयों संदीप व राजेश तथा उनके पिता शेर सिंह के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज करवाया था। पवन का आरोप था कि वह 25 अप्रैल को जब वह गली से जा रहा था तो उक्त लोगों ने उस पर हमला करके उसे घायल कर दिया। दोनों पक्षों के बीच विवाद लंबे समय से चला आ रहा था। लोक अदालत में दोनों पक्षों को बैठाकर उनमें सहमति बनवाई गई और इस केस को निपटा दिया गया।
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16 हजार 884 मामलों में से 12 हजार 791 का हुआ निपटारा
लोक अदालत में शनिवार को 16 हजार 884 मामले रखे गए, जिनमें से 12 हजार 791 मामलों का निपटारा दोनों पक्षों की आपसी सहमति से किया गया। इसके अलावा इस लोक अदालत में 4 करोड़ 27 लाख 97 हजार 972 रुपये की राशि अवॉर्ड व जुर्माना के रूप में पास की गई। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक रिकवरी, क्रिमिनल कंपाउंड ऑफेंस, बिजली बिल, पानी बिल, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, एमएसीटी एक्ट, वैवाहिक मामले, एनआई एक्ट सहित अन्य मामलों की सुनवाई की गई। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से मामलों का निपटारा किया गया।
लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से तुरंत न्याय मिलता है। लोगों को चाहिए कि वह लोक अदालतों में अपने केस लेकर आएं, ताकि उनको तुरंत न्याय मिले। इससे अदालतों का कार्यभार भी कम होगा।

जीएस वधवा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फतेहाबाद।
लोक अदालत में किए गए मामलों को अन्य किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती, क्योंकि मामलों का निपटारा दोनों पक्षों की सहमति से किया जाता है। लोग अपने कोर्ट में लंबित मामलों का निपटारा लोक अदालतों के माध्यम से करवाएं ताकि उनके समय व धन की बचत हो सके।
-विशाल कुमार, सीजेएम एवं सचिव जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, फतेहाबाद।
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