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Fatehabad News: वकील खुले आसमान के नीचे, लंबा हो रहा चैंबरों का इंतजार

Sat, 29 Nov 2025 11:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 29 Nov 2025 11:14 PM IST
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Lawyers wait under the open sky, waiting for chambers is getting longer
रतिया कोर्ट परिसर । संवाद
रतिया। बार एसोसिएशन रतिया में वकीलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन कोर्ट परिसर में उपलब्ध चैंबर इसकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वर्तमान में 455 वकील पंजीकृत हैं, जबकि कोर्ट परिसर में सिर्फ 66 चैंबर उपलब्ध हैं। ऐसे में अधिकांश वकीलों को सर्दी, गर्मी और बरसात में खुले में बैठकर काम करना पड़ता है।
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बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वेद कंबोज ने बताया कि वकीलों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए चैंबरों की संख्या बढ़ाने की मांग पहले भी उठाई गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कोर्ट परिसर और मिनी सचिवालय के पास होने के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है।
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वेद ने बताया कि न तो यहा कोई बैंक शाखा है, न एटीएम और न ही स्थायी बस स्टैंड की सुविधा है। इसके कारण आमजन और वकीलों दोनों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि चैंबरों का विस्तार किया जाए और आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर कई बार प्रदेश सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायिक पदाधिकारियों को मांग पत्र भेजे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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ये बोले रतिया बार एसोसिएशन के वकील

कोर्ट परिसर में चैंबरों की कमी है कि अधिकतर वकील खुले में बैठकर काम करने को मजबूर हैं। सर्दी, गर्मी और बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है। हमें उम्मीद है कि प्रशासन हमारी समस्याओं पर जल्द ध्यान देगा और पर्याप्त चैंबर उपलब्ध कराएगा।
-मुकेश बतरा
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455 पंजीकृत वकीलों के लिए सिर्फ 66 चैंबर काफी नहीं हैं। नई पीढ़ी के वकीलों के लिए काम करने की जगह मिलना चुनौतीपूर्ण हो गया है। बार एसोसिएशन को इस मुद्दे को गंभीरता से उठाना चाहिए ताकि हम अपना काम सही तरीके से कर सकें।

-एडवोकेट दविंदर ग्रोवर, रतिया
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कोर्ट परिसर में बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है। न तो एटीएम है, न बैंक शाखा और न ही बस स्टैंड। चैंबरों के अभाव में महिला वकीलों को और ज्यादा दिक्कतें आती हैं। प्रशासन से आग्रह है कि इसे प्राथमिकता दें।
-एडवोकेट नरेंद्र मलिक
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