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Fatehabad News: पराली प्रबंधन कर पर्यावरण संरक्षण के साथ बढ़ाई आय
Sat, 25 Oct 2025 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 25 Oct 2025 11:41 PM IST
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फतेहाबाद। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जागरूक करते कृषि अधिकारी। सूचना विभाग
फतेहाबाद। गांव भिरड़ाना व भूथन कलां में किसान पराली प्रबंधन कर न केवल मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि इसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में भी कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, किसान फसल अवशेषों का उपयोग मल्चिंग के रूप में कर भूमि की नमी और उर्वरता बनाए रख रहे हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को विभिन्न गांवों में जाकर किसानों को जागरूक किया। खंड कृषि अधिकारी डॉ. जय कुमार भोरिया ने बताया कि पराली का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। पराली से मशरूम कंपोस्ट तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खेत की उर्वरता भी बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि एक टन धान की पराली जलाने से लगभग 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 2.5 किलोग्राम पोटाश और 1.2 किलोग्राम सल्फर जैसे पोषक तत्वों का नुकसान होता है। इससे जहां उपजाऊ जमीन को तो नुकसान पहुंचता ही है, वहीं मित्र कीट भी इससे प्रभावित होते हैं।
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उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय सुपर सीडर, रोटावेटर, जीरो सीड ड्रिल या हैप्पी सीडर जैसी आधुनिक मशीनों की सहायता से फसल अवशेषों को जमीन में मिलाएं, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़े और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। ऐसा करके किसान आने वाली पीढि़यों को सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं।
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कृषि विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को विभिन्न गांवों में जाकर किसानों को जागरूक किया। खंड कृषि अधिकारी डॉ. जय कुमार भोरिया ने बताया कि पराली का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। पराली से मशरूम कंपोस्ट तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ खेत की उर्वरता भी बनी रहती है।
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उन्होंने बताया कि एक टन धान की पराली जलाने से लगभग 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 2.5 किलोग्राम पोटाश और 1.2 किलोग्राम सल्फर जैसे पोषक तत्वों का नुकसान होता है। इससे जहां उपजाऊ जमीन को तो नुकसान पहुंचता ही है, वहीं मित्र कीट भी इससे प्रभावित होते हैं।
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उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय सुपर सीडर, रोटावेटर, जीरो सीड ड्रिल या हैप्पी सीडर जैसी आधुनिक मशीनों की सहायता से फसल अवशेषों को जमीन में मिलाएं, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़े और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। ऐसा करके किसान आने वाली पीढि़यों को सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं।