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Fatehabad News: टोहाना में हिसार मार्ग को खोला, इंटरनेट शुरू
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टोहाना में हिसार रोड खुलने के बाद निकलती हुई बस।
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फतेहाबाद। किसान आंदोलन को लेकर पंजाब के किसानों की ओर से कोई हलचल न देखते हुए प्रशासन ने टोहाना में रविवार को हिसार मार्ग पर लगे सीमेंट के बैरिकेड्स को जेसीबी से हटाकर टोहाना-हिसार मार्ग को खोल दिया। फतेहाबाद में इंटरनेट सेवा भी आरंभ हो गई है। वहीं टोहाना के गांव समैन में रविवार को खाप पंचायतों व किसानों की महापंचायत की गई। अब 2 मार्च को गांव पलवां में महापंचायत होगी। उधर, जाखल में राज्यसभा सांसद सुभाष बराला आने की सूचना पाकर धरने पर बैठे किसान सड़क पर आ गए, लेकिन बराला दूसरे मार्ग से निकल गए।
पंजाब के किसान आंदोलन को लेकर प्रशासन ने नेशनल हाईवे-148 बी को हिसार रोड पर और चंडीगढ़ रोड को बंद किया था। रविवार हिसार रोड से कंक्रीट की दीवार और कंटीले तार को जेसीबी की सहायता से हटा दिया गया और इस मार्ग को प्रशासन ने खोल दिया है। किसान नेता मंजीत पूर्ण माजरा ने कहा कि रास्ता खोलने को लेकर प्रशासन को चेतावनी दी गई थी। लेकिन यदि दूसरा मुख्य मार्ग नहीं खोला गया तो इसके विरोध में प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं हिसार रोड खुलने से लोगों को भी राहत मिली है, पहले उनको 6 किलोमीटर अधिक का रास्ता तय करके टोहाना आना पड़ रहा था।
35 खाप पंचायतों के प्रतिनिधि पहुंचे गांव समैन
गांव समैन में रविवार को किसान आंदोलन को लेकर बस स्टैंड स्थित सामुदायिक केंद्र में विभिन्न गांवों की महापंचायत आयोजित हुई। महापंचायत में समूचे हरियाणा से कई खाप पंचायतें पहुंची। महापंचायत में किसान आंदोलन को लेकर कोई ठोस रणनीति तो नहीं बन पाई, लेकिन 2 मार्च को उचाना के गांव पलवां में फिर से महापंचायत करने का फैसला लिया गया। महापंचायत में नांगली, पिरथला, पारता, गाजुवाला, ठरवी, रत्ताखेड़ा, डांगरा, लोहाखेड़ा, बिढाई खेड़ा, कन्हड़ी, कमालवाला, बलियावाला, भीमेवाला, सुरेवाला, फरीदपुर सहित अन्य गांवों से काफी संख्या में किसान नेता तथा समैन-बिठमड़ा खाप के अलावा धूल खाप, सहारण खाप, लोन तपा, मोर खाप, दनौदा खाप, चहल खाप सहित 35 खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। किसान नेता बलवंत गिल व सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर गिल ने बताया कि महापंचायत में निर्णय लिया गया है कि वह इस मामले में पहले पंजाब के किसान संगठनों से बात करेंगे कि वह आंदोलन हरियाणा के किसानों के साथ मिलकर चलाना चाहते हैं या फिर अकेले। अगर पंजाब के किसान संगठन उनके साथ होना चाहते हैं तो मिलकर आंदोलन चलाया जाएगा, अन्यथा हरियाणा के किसान अपना आंदोलन करेंगे। महापंचायत में फैसला किया कि 27 फरवरी को पहले दनौदा के ऐतिहासिक चबूतरे पर व उसके बाद 2 मार्च को उचाना खंड के गांव पलवां में किसान नेताओं व खाप प्रतिनिधियों की महापंचायत होगी। उसी में आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। महापंचायत में जिला परिषद के पूर्व चेयरमैन बलबीर सिंह बल्ली, पूर्व सरपंच सूबे सिंह गिल, किसान नेता जोगिंद्र नैन, कुलांराम गिल, कृष्ण गिल, डॉ. दलबीर सिंह पिरथला सहित कई किसान नेता मौजूद रहे।
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बराला के विरोध के लिए डटे किसान, निकले दूसरे रास्ते
7 फरवरी से बाढ़ के मुआवजे की मांग को लेकर उपतहसील जाखल में धरने पर बैठे पगड़ी संभाल जट्टा किसान यूनियन व किसान यूनियन एकता उगरांहा के बैनर नीचे किसानों को रविवार को जब पता चला कि राज्यसभा सांसद किसी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जाखल आ रहे हैं तो किसान जाखल-भूना रोड पर आकर खड़े हो गए। किसान बराला का विरोध करने के लिए झंडों सहित पहुंचे थे, लेकिन बराला दूसरे मार्ग से आए और कार्यक्रम में भाग लेकर इसी मार्ग से चले गए। किसानों को रोकने के लिए मौके पर भारी पुलिस को भी तैनात किया गया था।
अयाल्की में अभी भी डटे हैं किसान
प्रशासन द्वारा किसान आंदोलन को देखते हुए रतिया के गांव रोझांवाली, फतेहाबाद के गांव हांसपुर, अयाल्की, जाखल के म्योंदकलां के पास भारी बैरिकेडिंग करके नाके लगाए गए हैं। जिन पर शांति बनी हुई है, लेकिन अभी भी यहां पर पैरामिलिट्री और पुलिस का कड़ा पहरा है। गांव अयाल्की के पास नाके पास किसान अभी भी पक्का मोर्चा लगाकर बैठे हैं और किसान नेताओं के आदेशों का इंतजार कर रहे हैं।
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पंजाब के किसान आंदोलन को लेकर प्रशासन ने नेशनल हाईवे-148 बी को हिसार रोड पर और चंडीगढ़ रोड को बंद किया था। रविवार हिसार रोड से कंक्रीट की दीवार और कंटीले तार को जेसीबी की सहायता से हटा दिया गया और इस मार्ग को प्रशासन ने खोल दिया है। किसान नेता मंजीत पूर्ण माजरा ने कहा कि रास्ता खोलने को लेकर प्रशासन को चेतावनी दी गई थी। लेकिन यदि दूसरा मुख्य मार्ग नहीं खोला गया तो इसके विरोध में प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं हिसार रोड खुलने से लोगों को भी राहत मिली है, पहले उनको 6 किलोमीटर अधिक का रास्ता तय करके टोहाना आना पड़ रहा था।
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35 खाप पंचायतों के प्रतिनिधि पहुंचे गांव समैन
गांव समैन में रविवार को किसान आंदोलन को लेकर बस स्टैंड स्थित सामुदायिक केंद्र में विभिन्न गांवों की महापंचायत आयोजित हुई। महापंचायत में समूचे हरियाणा से कई खाप पंचायतें पहुंची। महापंचायत में किसान आंदोलन को लेकर कोई ठोस रणनीति तो नहीं बन पाई, लेकिन 2 मार्च को उचाना के गांव पलवां में फिर से महापंचायत करने का फैसला लिया गया। महापंचायत में नांगली, पिरथला, पारता, गाजुवाला, ठरवी, रत्ताखेड़ा, डांगरा, लोहाखेड़ा, बिढाई खेड़ा, कन्हड़ी, कमालवाला, बलियावाला, भीमेवाला, सुरेवाला, फरीदपुर सहित अन्य गांवों से काफी संख्या में किसान नेता तथा समैन-बिठमड़ा खाप के अलावा धूल खाप, सहारण खाप, लोन तपा, मोर खाप, दनौदा खाप, चहल खाप सहित 35 खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। किसान नेता बलवंत गिल व सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर गिल ने बताया कि महापंचायत में निर्णय लिया गया है कि वह इस मामले में पहले पंजाब के किसान संगठनों से बात करेंगे कि वह आंदोलन हरियाणा के किसानों के साथ मिलकर चलाना चाहते हैं या फिर अकेले। अगर पंजाब के किसान संगठन उनके साथ होना चाहते हैं तो मिलकर आंदोलन चलाया जाएगा, अन्यथा हरियाणा के किसान अपना आंदोलन करेंगे। महापंचायत में फैसला किया कि 27 फरवरी को पहले दनौदा के ऐतिहासिक चबूतरे पर व उसके बाद 2 मार्च को उचाना खंड के गांव पलवां में किसान नेताओं व खाप प्रतिनिधियों की महापंचायत होगी। उसी में आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। महापंचायत में जिला परिषद के पूर्व चेयरमैन बलबीर सिंह बल्ली, पूर्व सरपंच सूबे सिंह गिल, किसान नेता जोगिंद्र नैन, कुलांराम गिल, कृष्ण गिल, डॉ. दलबीर सिंह पिरथला सहित कई किसान नेता मौजूद रहे।
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बराला के विरोध के लिए डटे किसान, निकले दूसरे रास्ते
7 फरवरी से बाढ़ के मुआवजे की मांग को लेकर उपतहसील जाखल में धरने पर बैठे पगड़ी संभाल जट्टा किसान यूनियन व किसान यूनियन एकता उगरांहा के बैनर नीचे किसानों को रविवार को जब पता चला कि राज्यसभा सांसद किसी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जाखल आ रहे हैं तो किसान जाखल-भूना रोड पर आकर खड़े हो गए। किसान बराला का विरोध करने के लिए झंडों सहित पहुंचे थे, लेकिन बराला दूसरे मार्ग से आए और कार्यक्रम में भाग लेकर इसी मार्ग से चले गए। किसानों को रोकने के लिए मौके पर भारी पुलिस को भी तैनात किया गया था।
अयाल्की में अभी भी डटे हैं किसान
प्रशासन द्वारा किसान आंदोलन को देखते हुए रतिया के गांव रोझांवाली, फतेहाबाद के गांव हांसपुर, अयाल्की, जाखल के म्योंदकलां के पास भारी बैरिकेडिंग करके नाके लगाए गए हैं। जिन पर शांति बनी हुई है, लेकिन अभी भी यहां पर पैरामिलिट्री और पुलिस का कड़ा पहरा है। गांव अयाल्की के पास नाके पास किसान अभी भी पक्का मोर्चा लगाकर बैठे हैं और किसान नेताओं के आदेशों का इंतजार कर रहे हैं।