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Fatehabad News: ब्लड बैंक में रक्त बेचने की राशि में किया घपला, बिल बुक से रसीदें ही गायब, बयान के लिए इंचार्ज तलब

Thu, 12 Sep 2024 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 12 Sep 2024 01:12 AM IST
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Fraud committed in the blood bank in the amount of blood sold, receipts missing from the bill book, incharge summoned for statement
फतेहाबाद। ब्लड बैंक में बेचे गए रक्त की राशि में हुए घपले की जांच को लेकर बुधवार को कमेटी नागरिक अस्पताल के एसएमओ कार्यालय में पहुंची। यहां पर कमेटी ने ब्लड बैंक का रिकॉर्ड जांचा। जांच के दौरान कमेटी को बिल बुक से कई रसीदें गायब मिली हैं। काटी गई 12 रसीदों की नकल कॉपी ही नहीं मिली है।
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कमेटी ने वर्ष 2019 से लेकर अब तक का रिकॉर्ड जांचा तो गड़बड़ी सामने आई। जांच कमेटी में मेजर डॉ. शरद तुली, डॉ. गुंजन बंसल और लेखाकार शामिल रहे। बिल बुक से गायब मिली रसीदों को लेकर कमेटी ने ब्लड बैंक इंचार्ज को पत्र जारी करके रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा वर्ष 2019 से लेकर अब तक ब्लड बैंक के इंचार्ज को जांच में शामिल होने के निर्देश दिए गए है। इंचार्ज को बयान के लिए मंगलवार को बुलाया गया है। वर्ष 2019 से लेकर अब तक कई इंचार्ज बदल चुके हैं। इसमें मुख्य तौर पर वीआरएस ले चुके उप सिविल सर्जन डॉ. हनुमान, डॉ. नेहा, डॉ. अस्मिता, डॉ. गौरव, डॉ. रासिद आदि शामिल हैं। कमेटी इंचार्ज के बयान दर्ज करेगी और इसमें पता लगाएगी कि किस कर्मचारी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी और कब रिकॉर्ड संभाला गया था।
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राशि बैंक में जमा न करवाने का 6 साल से चल रहा था घपला
ब्लड बैंक में नागरिक अस्पताल से आने वाले मरीजों को निशुल्क खून दिया जाता है। जबकि निजी अस्पताल से आने वाले मरीज को 1100 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से रक्त दिया जाता है। वर्ष 2022 से पहले प्रति यूनिट 1050 रुपये रेट था। ब्लड बैंक से बेचे गए रक्त का चार्ज का लेने के बाद राशि को बैंक खाते में जमा करवाना होता है। लेकिन यूनिट की राशि जमा नहीं करवाई गई।
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ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
नागरिक अस्पताल प्रशासन को बजट की जरूरत पड़ी तो ब्लड बैंक के खाते की राशि का इस्तेमाल करने का फैसला लिया गया। जब अधिकारियों ने खाते जांचे तो संबंधित कुछ कर्मचारियों ने टाल-मटोल करने का प्रयास किया। जब रिकॉर्ड की जांच की तो गड़बड़ी की आशंका हुई और मामले की शिकायत सीएमओ को दी गई। सिविल सर्जन ने जांच के लिए कमेटी का गठन किया।
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