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मानसून आते ही भयभीत हो जाते हैं घग्गर के तटवर्ती गांवों में बसे लोग
fatehabad
Updated Tue, 05 Jul 2016 01:01 AM IST
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सोमवार को घग्गर में पहुंचा 600 क्यूसेक पानी, प्रशासन अलर्ट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सुरेंद्र असीजा। मानसून के आते ही फतेहाबाद जिला की घग्गर नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में बसे गांवों के लोग भयभीत हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण घग्गर में आने वाली बाढ़ से होने वाला विनाश है। घग्गर के तटबंध कमजोर होने से बाढ़ यहां करीब 10 बार अपनी विनाश लीला दिखा चुकी है।
बाढ़ से यहां के 105 गांवों की आबादी के अलावा हजारों एकड़ जमीन जलमग्न हो जाती है। लोग पीने के पानी और खाने को मोहताज हो जाते हैं। स्कूलों में छुट्टियां हो जाती हैं। हालांकि, इस बार जिला प्रशासन ने बाढ़ संभावित गांवों को चिह्नित कर लिया है। इसके अलावा ऐहतियात के तौर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है। सोमवार को घग्गर नदी में पानी आ गया है, जो शाम को गुहला चीका में 3080 और चांदपुरा में 600 क्यूसेक बहाव दर्ज किया गया। एक दिन पहले यहां पानी नहीं था।
हिमाचल प्रदेश की शिवालिक की पहाड़ियों में बरसात होती है, तो उसका पानी कालका में बने गड्ढे में गिरता है। यहां से शुरू होती है घग्गर नदी जो कालका से चलकर पंजाब के पटियाला, गुहला चीका, कैथल, खनौरी होते हुए फतेहाबाद जिले में प्रवेश करती है। यहां टोहाना, जाखल, चांदपुरा रतिया होती हुई सिरसा से पाकिस्तान की ओर निकल जाती है।
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फतेहाबाद में घग्गर के तटवर्ती क्षेत्रों पर बसे 60 गांव ऐसे हैं, जो 1962 के बाद 10 बार बाढ़ की विभीषिका झेल चुके हैं। समय पर मरम्मत नहीं होने से रिंग बांध में चूहे खोखला कर देते हैं। मानसून के समय जब पानी का बहाव तेज होता है, तो घग्गर के तटबंध टूट जाते हैं और पानी खेतों के साथ गांवों की आबादी में भी अपना तांडव मचाता है। फतेहाबाद के उपमंडल टोहाना, रतिया व फतेहाबाद के अलावा जाखल की ग्रामीण आबादी इससे ज्यादा प्रभावित होती है। प्रशासन हर वर्ष तटबंध मजबूत होने का दावा करता है, लेकिन जब भी तेज बारिश हुई तो यहां पर बाढ़ अवश्य आई।
कब-कब आई बाढ़
फतेहाबाद में वर्ष 1962, 1976, 1977, 1983, 1988, 1993, 1995, 1998 और 2010 में बाढ़ अपनी विनाशलीला दिखा चुकी है। इन गांवों के बुजुर्ग अन दिनों को अभी तक भूले नहीं हैं। गांव मामूपुर के किसान एवं पूर्व विधायक सरदार निशान सिंह ने बताया कि 1998 में बाढ़ ने उसके आसपास के 20 गांवों को चपेट में ले लिया था। गांवों की ढाणियों के अंदर रहने वाले गरीब लोगों के पास पीने को पानी तक नहीं था। गांव की मूल आबादी के लोग यहां से पलायन करके सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। खेतों में धान की फसल के बाद गेहूं की बिजाई भी नहीं हो पाई थी। इस बाढ़ से दो फसलें प्रभावित हुई थीं।
11 जुलाई 2010 में फतेहाबाद से गुजर रही घग्गर के चांदपुरा साइफन में रिकार्ड तोड़ बहाव था। यहां 21 हजार क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया, जबकि इसकी क्षमता 20 हजार क्यूसेक है। सामान्य तौर पर यहां चार हजार क्यूसेक पानी का बहाव रहता है।
ये गांव बाढ़ से होते हैं प्रभावित
संभावित बाढ़ से प्रभावित 105 गांवों को प्रशासन ने चिह्नित किया है। इनमें रजाबाद, धीड़, माजरा, बरसीन, बीसला, खानपुर, हिजरावां कलां, खानमोहम्म्द, भड़ोलावाली, बैजलपुर, बहलभोमिया, रामपुरा, भिरड़ाना, ढ़ाणी मसीता, चेतनपुरा, मल्लहड़, काताखेड़ी, बोसवाल, अयाल्की, ढाणी ठोबा, दोलतपुर, ढाणी छतरितया, ढाणी ढ़ाका, ढाणी ईसर, हिजरावां खुर्द, नकटा, रताटिब्बा, अहलीसदर, भट्टूखुर्द, बहबलपुर और इसके अलावा जाखल के 30, रतिया 28 और फतेहाबाद के 37 गांव शामिल हैं।
रंगोई नहर की बढ़ाई क्षमता
फतेहाबाद से गुजर रही रंगोई खरीफ चैनल की क्षमता सात हजार और साढ़े आठ हजार क्यूसेक थी। 2010 की बाढ़ को देखते हुए सरकार ने इसकी क्षमता 500 से 675 क्यूसेक बढ़ा दी। 30 जून तक इसका निर्माण भी पूरा कर लिया गया। यहां डीजल पंप सेट, वाटर बोट, रेत के भरे कट्टों के प्रबंध किए गए हैं। जिला प्रशासन के पास इस समय 78 पंप सेट,18 बिजली चलित पंप और 165 मिट्टी तेल से चलित पंप हैं। टोहाना में हाल ही में दो नई किश्तियां भी मंगवाई गई हैं।
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सभी ड्रेनों की सफाई करवा दी गई है। 20 हजार खाली कट्टे घग्गर के पास तैयार हैं। खनौरी और चांदपुरा में वायरलेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं। जहां पर सिंचाई विभाग और पुलिस के कर्मचारी दिनरात ड्यूटी लगाई गई है।
धूप सिंह, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग
बाढ़ की आशंका के चलते सिंचाई विभाग में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां 40 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। तहसील कार्यालय में भी कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिनका फोन नंबर सार्वजनिक कर दिया गया है। रिंग बांध भी मजबूत कर दिए गए हैं।
सतीश कुमार, एसडीएम टोहाना
बाढ़ से निपटने के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। रंगोई नाले की क्षमता पहले ही बढ़ा दी गई थी, फिर भी एहतियात के तौर पर खाद्य एंव आपूर्ति विभाग को मिट्टी का तेल, आटा, खाने का तेल इत्यादि का जरूरी सामान रिजर्व रखने के आदेश दिए गए हैं।स्वास्थ्य विभाग को मलेरिया और अन्य दवाईयों का स्टॉक रखने को कहा गया है। घग्गर में पानी के बहाव पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
एनके सोलंकी, उपायुक्त फतेहाबाद
बाढ़ से यहां के 105 गांवों की आबादी के अलावा हजारों एकड़ जमीन जलमग्न हो जाती है। लोग पीने के पानी और खाने को मोहताज हो जाते हैं। स्कूलों में छुट्टियां हो जाती हैं। हालांकि, इस बार जिला प्रशासन ने बाढ़ संभावित गांवों को चिह्नित कर लिया है। इसके अलावा ऐहतियात के तौर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है। सोमवार को घग्गर नदी में पानी आ गया है, जो शाम को गुहला चीका में 3080 और चांदपुरा में 600 क्यूसेक बहाव दर्ज किया गया। एक दिन पहले यहां पानी नहीं था।
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हिमाचल प्रदेश की शिवालिक की पहाड़ियों में बरसात होती है, तो उसका पानी कालका में बने गड्ढे में गिरता है। यहां से शुरू होती है घग्गर नदी जो कालका से चलकर पंजाब के पटियाला, गुहला चीका, कैथल, खनौरी होते हुए फतेहाबाद जिले में प्रवेश करती है। यहां टोहाना, जाखल, चांदपुरा रतिया होती हुई सिरसा से पाकिस्तान की ओर निकल जाती है।
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फतेहाबाद में घग्गर के तटवर्ती क्षेत्रों पर बसे 60 गांव ऐसे हैं, जो 1962 के बाद 10 बार बाढ़ की विभीषिका झेल चुके हैं। समय पर मरम्मत नहीं होने से रिंग बांध में चूहे खोखला कर देते हैं। मानसून के समय जब पानी का बहाव तेज होता है, तो घग्गर के तटबंध टूट जाते हैं और पानी खेतों के साथ गांवों की आबादी में भी अपना तांडव मचाता है। फतेहाबाद के उपमंडल टोहाना, रतिया व फतेहाबाद के अलावा जाखल की ग्रामीण आबादी इससे ज्यादा प्रभावित होती है। प्रशासन हर वर्ष तटबंध मजबूत होने का दावा करता है, लेकिन जब भी तेज बारिश हुई तो यहां पर बाढ़ अवश्य आई।
कब-कब आई बाढ़
फतेहाबाद में वर्ष 1962, 1976, 1977, 1983, 1988, 1993, 1995, 1998 और 2010 में बाढ़ अपनी विनाशलीला दिखा चुकी है। इन गांवों के बुजुर्ग अन दिनों को अभी तक भूले नहीं हैं। गांव मामूपुर के किसान एवं पूर्व विधायक सरदार निशान सिंह ने बताया कि 1998 में बाढ़ ने उसके आसपास के 20 गांवों को चपेट में ले लिया था। गांवों की ढाणियों के अंदर रहने वाले गरीब लोगों के पास पीने को पानी तक नहीं था। गांव की मूल आबादी के लोग यहां से पलायन करके सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। खेतों में धान की फसल के बाद गेहूं की बिजाई भी नहीं हो पाई थी। इस बाढ़ से दो फसलें प्रभावित हुई थीं।
11 जुलाई 2010 में फतेहाबाद से गुजर रही घग्गर के चांदपुरा साइफन में रिकार्ड तोड़ बहाव था। यहां 21 हजार क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया, जबकि इसकी क्षमता 20 हजार क्यूसेक है। सामान्य तौर पर यहां चार हजार क्यूसेक पानी का बहाव रहता है।
ये गांव बाढ़ से होते हैं प्रभावित
संभावित बाढ़ से प्रभावित 105 गांवों को प्रशासन ने चिह्नित किया है। इनमें रजाबाद, धीड़, माजरा, बरसीन, बीसला, खानपुर, हिजरावां कलां, खानमोहम्म्द, भड़ोलावाली, बैजलपुर, बहलभोमिया, रामपुरा, भिरड़ाना, ढ़ाणी मसीता, चेतनपुरा, मल्लहड़, काताखेड़ी, बोसवाल, अयाल्की, ढाणी ठोबा, दोलतपुर, ढाणी छतरितया, ढाणी ढ़ाका, ढाणी ईसर, हिजरावां खुर्द, नकटा, रताटिब्बा, अहलीसदर, भट्टूखुर्द, बहबलपुर और इसके अलावा जाखल के 30, रतिया 28 और फतेहाबाद के 37 गांव शामिल हैं।
रंगोई नहर की बढ़ाई क्षमता
फतेहाबाद से गुजर रही रंगोई खरीफ चैनल की क्षमता सात हजार और साढ़े आठ हजार क्यूसेक थी। 2010 की बाढ़ को देखते हुए सरकार ने इसकी क्षमता 500 से 675 क्यूसेक बढ़ा दी। 30 जून तक इसका निर्माण भी पूरा कर लिया गया। यहां डीजल पंप सेट, वाटर बोट, रेत के भरे कट्टों के प्रबंध किए गए हैं। जिला प्रशासन के पास इस समय 78 पंप सेट,18 बिजली चलित पंप और 165 मिट्टी तेल से चलित पंप हैं। टोहाना में हाल ही में दो नई किश्तियां भी मंगवाई गई हैं।
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सभी ड्रेनों की सफाई करवा दी गई है। 20 हजार खाली कट्टे घग्गर के पास तैयार हैं। खनौरी और चांदपुरा में वायरलेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं। जहां पर सिंचाई विभाग और पुलिस के कर्मचारी दिनरात ड्यूटी लगाई गई है।
धूप सिंह, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग
बाढ़ की आशंका के चलते सिंचाई विभाग में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां 40 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। तहसील कार्यालय में भी कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिनका फोन नंबर सार्वजनिक कर दिया गया है। रिंग बांध भी मजबूत कर दिए गए हैं।
सतीश कुमार, एसडीएम टोहाना
बाढ़ से निपटने के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। रंगोई नाले की क्षमता पहले ही बढ़ा दी गई थी, फिर भी एहतियात के तौर पर खाद्य एंव आपूर्ति विभाग को मिट्टी का तेल, आटा, खाने का तेल इत्यादि का जरूरी सामान रिजर्व रखने के आदेश दिए गए हैं।स्वास्थ्य विभाग को मलेरिया और अन्य दवाईयों का स्टॉक रखने को कहा गया है। घग्गर में पानी के बहाव पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
एनके सोलंकी, उपायुक्त फतेहाबाद