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Fatehabad News: बाढ़ से दिल्ली वाली ढाणी में 50 घर तबाह, अभी भी भरा है पांच फुट तक पानी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jul 2023 11:13 PM IST
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Flood destroyed 50 houses in Dilli Wali Dhani, water is still up to five feet
फतेहाबाद। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से ढाणियों के लोगों में रोष है। राहत शिविरों से निकल कर लोग जब बर्बाद हुईं ढाणियाें को देखने जा रहे हैं, तो उनकी आंखों से बरबस आंसू निकल रहे हैं। गांव खान मोहम्मद के पास दिल्ली वाली ढाणी के इलाके में बाढ़ से तबाही का मंजर स्पष्ट नजर आ रहा है। यहां 50 से ज्यादा परिवारों की ढाणियां तबाह हो चुकी हैं। इन लोगों को प्रशासन ने शहर के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में शिफ्ट करवाया था। मगर अब वहां से भी उनको उठाने की कोशिश हो रही है। इन लोगों का आरोप है कि स्कूल प्रिंसिपल ने उनको स्कूल छोड़ने का आदेश दे दिया है। ऐसे में अब व
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संवाद न्यूज एजेंसी की टीम वीरवार को बाढ़ से नुकसान का जायजा लेने के लिए रतिया रोड के साथ सटे गांवों की ओर पहुंची। खान मोहम्मद के पास जाने का रास्ता बाईपास से जाने पर बंद है। टीम हांसपुर चौक से एक कच्चे रास्ते से दौलतपुर रोड पर आई तो यहां पर सड़क पर करीब तीन फुट तक पानी था। इसके बाद रास्ता मोड़ना पड़ा और फिर कच्चे रास्तों से होते हुए इस गांव की सीमा पर पहुंचे। यहां पर जो मंजर देखा वह काफी भयावह था। खान मोहम्मद के साथ लगती दिल्ली वाली ढाणी के लोग गांव के स्टेडियम में शेड के नीचे बैठे नजर आए। यह लोग फतेहाबाद के मॉडल संस्कृति स्कूल में शरण लिए हुए हैं और यहां पर अपने घरों को देखने के लिए आए थे। इनके घरों के पास अभी भी पांच-पांच फुट तक पानी भरा हुआ था।
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गांव के स्टेडियम में बैठी शीलो देवी, बीरो देवी और सावित्री देवी ने बताया कि उनके मकान उजड़ गए हैं। जिस स्कूल में शरण लिए हुए हैं, उसके प्रिंसिपल ने उनको कहा है कि या तो अपने घर जाओ अन्यथा डीसी से मिलो, क्योंकि स्कूल में अब कक्षाएं लगनी शुरू हो गई हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण उनके घर रहने लायक नहीं है, सभी घरों में गाद भर चुकी है। सड़क पर पांच फुट तक पानी है, ऐसे में वह कैसे यहां रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि खाने-पीने का सामान भी उनको समाजसेवी संस्थाओं की ओर से मिल रहा है। प्रशासन ने सिर्फ उनको रहने की जगह दे रखी है।
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जमीन में धंस चुके शौचालय व स्नानघर
टीम यहां से ट्रैक्टर पर सवार होकर इस ढाणी का मुआयना करने पहुंची। यहां पर जो हालात थे, वह काफी खराब हो चुके थे। मेहनत मजदूरी करने वाले हर घर लगभग खराब हो चुके हैं और कभी भी गिर सकते हैं। घरों के बने शौचालय व स्नानघर जमीन में धंस चुके हैं। अभी भी सड़कों पर पांच फुट तक पानी भरा हुआ है। ऐसे में बर्बाद हो चुके अपने घरों को देखने आए लोगों की आंखें भर उठती हैं।


जगह-जगह बना है दलदल
दिल्ली वाली ढाणी में लोगों ने अपने घरों को बचाने के लिए पहले भरसक प्रयास किए थे और घरों के आगे बांध भी बना दिए थे, लेकिन यहां पर बाढ़ का पानी आठ फुट तक पहुंच गया। ऐसे में अब यह बांध दलदल का रूप ले चुके हैं। वीरवार को यहां पर एक युवक जब अपने घर को देखने आया तो वह दलदल में फंस गया, उसे ढाणी के अन्य लोगों ने इस दलदल से बाहर निकाला।


20 दिन का बच्चा राहत शिविर में लेकर बैठी है जच्चा
दिल्ली वाली ढाणी की सुनीता देवी ने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया है। उसका बच्चा मात्र 20 दिन का है और बाढ़ के कारण उसे राहत शिविर में आना पड़ा है। बच्चे के लिए दवाओं के प्रबंध नहीं हैं और उसके मुंह पर इंफेक्शन हो गया है।


50 ढाणियों में ढाई करोड़ से ज्यादा का नुकसान
फतेहाबाद की दिल्ली वाली इस ढाणी में करीब 50 परिवारों के घर हैं। यहां पर अब बर्बादी ही बर्बादी दिखाई दे रही है। अगर एक मकान को पांच लाख रुपये के नुकसान का आंकलन भी किया जाए तो करीब ढाई करोड़ रुपये का नुकसान इन लोगों को हो चुका है। यहां के निवासियों ने बताया कि उनको उभरने में करीब दो साल लग जाएंगे, सरकार को बिना किसी शर्त को उनको मुआवजा देना चाहिए, ताकि वह अपने परिवारों को पाल सकें।
कोट
स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट कहा गया है कि शिफ्ट किए गए लोगों को पूरी सुविधाएं देनी हैं। ठहराने से मना भी नहीं करना है। मॉडल संस्कृति स्कूल में ठहरने वालों को इतना जरूर कहा था कि रात को 8 बजे के बाद गेट बंद कर दिए जाएंगे। राहत शिविरों में कहीं किसी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।


दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद
कोट

कुछ इलाकों में जल स्तर कम हो गया है। अभी फतेहाबाद और रतिया के कुछ गांवों के खेतों में पानी है, जिसे प्रशासन उचित मार्ग से निकाल रहा है।जिन किसानों की फसलों व ढाणियों में नुकसान हुआ है। उनके लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को खोल दिया है। किसान और आम नागरिक इस पोर्टल के माध्यम से नुकसान की रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं। जिन ढाणियों में नुकसान हुआ है, उसका भी मूल्यांकन करवाया जा रहा है।
-मनदीप कौर, डीसी, फतेहाबाद
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