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प्रदेश के जिला सरकारी अस्पतालों में डीएनबी कोर्स शुरू करने की तैयारी
fatehabad
Updated Sat, 23 Jul 2016 12:04 AM IST
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मुकेश खुराना । एमडी कोर्स करने का मन बना रहे डाक्टरों के लिए अच्छी खबर है। अगर उन्हें दाखिला नहीं मिल रहा है तो वह अब अपने जिला अस्पताल में ही कोर्स कर सकेंगे। प्रदेश सरकार जिला अस्पतालों में ही डीएनबी कोर्स (डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड) शुरू करने जा रही है। कोर्स को स्पेशलिस्ट डाक्टर पूरा करवाएंगे।
कोर्स के लिए कौन सा अस्पताल फिट है, इस पर शनिवार को रोहतक में होने वाली मीटिंग में मुहर लग सकती है। इससे पहले प्रदेश सरकार ने जिला अस्पतालों से स्पेशलिस्ट डाक्टरों के बारे में डाटा मांगा है, जिसमें उनका अनुभव कितना है, भी शामिल है। अस्पताल फाइनल करने से पहले कई पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने प्रदेश के सभी सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर डीएनबी कोर्स शुरू करने के लिए जिला अस्पतालों का स्टेटस मांगा है। पत्र में पूछा गया है कि अस्पताल में स्पेशलिस्ट मेडिसन, सर्जरी, गायनी, एनीथिसिया, पेडियाट्रिक की संख्या कितनी है। इन स्पेशलिस्ट डाक्टरों का अनुभव क्या है। पत्र में साथ ही यह भी पूछा गया है कि अस्पताल में मरीजों के लिए बिस्तरों की सुविधा कितनी है। इसी के साथ कई अन्य पहलुओं पर सवाल किए गए हैं।
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एमडी में दाखिला न मिलने वालों को होगा फायदा
सिविल अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार एमडी के बराबर ही डीएनबी कोर्स की मान्यता है। इससे उन डाक्टरों को फायदा होगा, जिन्हें एमडी में किसी प्रकार का दाखिला नहीं मिल पाता। सरकार डीएनबी के कोर्स सिविल अस्पतालों में शुरू करने जा रही है ताकि स्पेशलिस्ट डाक्टरों की कमी को पूरा किया जा सके। अधिकारियों की मानें तो 4 से 5 साल पहले डीएनबी कोर्स की ज्यादा वैल्यू नहीं थी लेकिन अब सरकार इसे धीरे-धीरे बढ़ावा देने लगी है। अगर किसी अस्पताल में ये पांच स्पेशलिस्ट होंगे तो अस्पताल चलाने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी।
सिविल अस्पताल में स्पेशलिस्ट डाक्टरों की संख्या
मेडिसन 0
सर्जरी 1
गायनी 0
पेडियाट्रिक 0
एनीथिसिया 2
डीएनबी कोर्स को शुरू करने को लेकर मुख्यालय की ओर से स्पेशलिस्ट डाक्टरों व उनके अनुभव तथा अस्पताल में बेड की संख्या को लेकर जवाब मांगा गया था। जो कि भेज दिया गया है। शनिवार को रोहतक में इस संबंध में मीटिंग होनी है उसके बाद ही कुछ फाइनल हो पाएगा।
-डॉ. अशोक चौधरी, सिविल सर्जन फतेहाबाद
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कोर्स के लिए कौन सा अस्पताल फिट है, इस पर शनिवार को रोहतक में होने वाली मीटिंग में मुहर लग सकती है। इससे पहले प्रदेश सरकार ने जिला अस्पतालों से स्पेशलिस्ट डाक्टरों के बारे में डाटा मांगा है, जिसमें उनका अनुभव कितना है, भी शामिल है। अस्पताल फाइनल करने से पहले कई पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा।
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स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने प्रदेश के सभी सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर डीएनबी कोर्स शुरू करने के लिए जिला अस्पतालों का स्टेटस मांगा है। पत्र में पूछा गया है कि अस्पताल में स्पेशलिस्ट मेडिसन, सर्जरी, गायनी, एनीथिसिया, पेडियाट्रिक की संख्या कितनी है। इन स्पेशलिस्ट डाक्टरों का अनुभव क्या है। पत्र में साथ ही यह भी पूछा गया है कि अस्पताल में मरीजों के लिए बिस्तरों की सुविधा कितनी है। इसी के साथ कई अन्य पहलुओं पर सवाल किए गए हैं।
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एमडी में दाखिला न मिलने वालों को होगा फायदा
सिविल अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार एमडी के बराबर ही डीएनबी कोर्स की मान्यता है। इससे उन डाक्टरों को फायदा होगा, जिन्हें एमडी में किसी प्रकार का दाखिला नहीं मिल पाता। सरकार डीएनबी के कोर्स सिविल अस्पतालों में शुरू करने जा रही है ताकि स्पेशलिस्ट डाक्टरों की कमी को पूरा किया जा सके। अधिकारियों की मानें तो 4 से 5 साल पहले डीएनबी कोर्स की ज्यादा वैल्यू नहीं थी लेकिन अब सरकार इसे धीरे-धीरे बढ़ावा देने लगी है। अगर किसी अस्पताल में ये पांच स्पेशलिस्ट होंगे तो अस्पताल चलाने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी।
सिविल अस्पताल में स्पेशलिस्ट डाक्टरों की संख्या
मेडिसन 0
सर्जरी 1
गायनी 0
पेडियाट्रिक 0
एनीथिसिया 2
डीएनबी कोर्स को शुरू करने को लेकर मुख्यालय की ओर से स्पेशलिस्ट डाक्टरों व उनके अनुभव तथा अस्पताल में बेड की संख्या को लेकर जवाब मांगा गया था। जो कि भेज दिया गया है। शनिवार को रोहतक में इस संबंध में मीटिंग होनी है उसके बाद ही कुछ फाइनल हो पाएगा।
-डॉ. अशोक चौधरी, सिविल सर्जन फतेहाबाद