{"_id":"57ffd8464f1c1b4a2c28e42e","slug":"fatehabad-indo-pak-relationship-disterved-cotten-market-fall-down-fatehabad-harayana","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत-पाक तनाव के चलते नरमे के भाव धड़ाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत-पाक तनाव के चलते नरमे के भाव धड़ाम
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Fri, 14 Oct 2016 12:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुरेंद्र असीजा। पीओके में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दोनों देशों में बढ़े तनाव के चलते भारत में कपास की कीमत एकाएक गिर गई हैं। कपास व्यापारियों द्वारा पाकिस्तान को निर्यात नहीं करने के कारण रुई के दामों में एक सप्ताह में ही एक हजार प्रति क्विंटल की गिरावट आ गई है।
जबकि पिछले दो महीने के नरमे के भावों की तुलना की जाए तो दामों में पौने दो हजार रुपये की गिरावट आई है। फतेहाबाद की अनाज मंडी में एक सप्ताह पहले नरमे के भाव 5800 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो वीरवार को गिरकर 4800 रुपये पर आ गए। कॉटन व्यापार से जुड़े उद्योगपतियों का मानना है कि अगले एक सप्ताह में नरमे के भावों में दो-तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल की और कमी आ सकती है। नरमे के भाव गिरने से किसानों के चेहरे पर आई रौनक उड़ती जा रही है।
पिछली बार पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में नरमे की फसल पर सफेद मक्खी ने आक्रमण कर दिया था। जिसके चलते फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। स्पिनिंग एवं टेक्सटाइल मिलों के पास माल नहीं होने से अगस्त 2016 तक नरमे के भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। हालांकि व्यापारी इसके पीछे तर्क ये बताते हैं कि तब रुई के दाम 4800 रुपये प्रति मन पहुंच गए थे। जिसके कारण नरमे के भाव में तेजी आई थी। इस सीजन का नरमा जैसे ही मंडी में आया तो नरमे के भाव 55 सौ से 58 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। एक सप्ताह पूर्व ही नरमा फतेहाबाद की मंडी में 5800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका, लेकिन अब इसके भाव गिरकर 4800 रुपये प्रति क्विंटल ही रह गए हैं।
विज्ञापन
एक सप्ताह में एक हजार रुपये और दो महीने में 1700 रुपये प्रति क्विंटल नरमे के भाव गिरने से व्यापारियों में हड़कंप मच गया है। जबकि किसान इसे व्यापारियों का ही खेल बता रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब किसान माल बेच चुके थे तो नरमा 6500 रुपये प्रति क्विंटल बिका, लेकिन जब किसानों की बारी आई तो नरमे के दाम फिर से नीचे आ गए। कॉटन व्यापारियों एवं अनाज मंडी के कॉटन ब्रोकरों का मानना है कि भारत-पाक के बीच हुए तनाव के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी रुई के दाम गिर गए हैं। जिस कारण नरमे के भावों में कमी आई है।
कॉटन व्यापारियों के अनुसार 2 महीने पहले जिस एक मन रूई का दाम 4800 रुपये था, अब वह 3850 रुपये प्रति मन रह गया है। यही कारण है कि नरमे के भावों में कमी आई है। हालांकि किसानों का कहना है कि अगर कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया नरमे की खरीद करे तो भाव इतने नहीं गिर सकते। निजी खरीददारों ने ही अपने हित के लिए भाव गिराए हैं।
फैक्ट फाइल
5 मन = नरमे की एक गांठ
1 मन = 37 किलो 330 ग्राम (पुराना मन)
2015-16 में नरमे की बिजाई : 79 हजार हेक्टेयर
2016-17 में नरमे की बिजाई : 65 हजार हेक्टेयर
नरमा = किसान द्वारा खेत में उत्पादित
रुई=नरमे से बिनौला निकलने के बाद निकली कपास को रुई बोलते हैं।
आवक ज्यादा होने से कीमत में आई कमी
कॉटन मिल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुशील मित्तल के अनुसार एक सप्ताह में रुई के दामों में 500 रुपये की कमी आई है। जिसके चलते नरमे की कीमत में हजार रुपये की गिरावट आई है। मित्तल का मानना है कि इस सीजन में आवक ज्यादा है, जिसके चलते टेक्सटाइल मिलों द्वारा खरीद में कम आई और बाजार में दाम टूट गए हैं। जब माल नहीं था तो टेक्सटाइल मिलों को मिल चलाने के लिए नरमा खरीदना हर हाल में जरूरी था, इसी वजह से नरमे के भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। उन्होंने इसके लिए कुछ हद तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव को भी जिम्मेदार ठहराया।
भुगतान रुकने के डर से निर्यात रोक दिया
कॉटन ब्रोकर प्रदीप कुमार के अनुसार भारत से पाकिस्तान को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से तकरीबन 25 लाख गांठ रुई एक्सपोर्ट होती है। तनाव के चलते व्यापारियों को भय है कि कहीं उनकी पेमेंट नहीं रुक जाए, इसी वजह से फिलहाल निर्यात नहीं हो रहा है। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है। मिलों ने भी रूई के दाम घटा दिए। जिस कारण बाजार में भाव गिर गए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करते हैं निजी खरीदारों के भाव
नरमे की खरीद सीसीआई करती है। सरकार ने अभी नरमे की खरीद शुरू नहीं की। निजी खरीदारों के भाव अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करते हैं। पिछले एक सप्ताह में हजार रुपये प्रति क्विंटल दाम गिर चुके हैं।
दिलावर सिंह, सचिव, मार्केट कमेटी, फतेहाबाद।
विज्ञापन
जबकि पिछले दो महीने के नरमे के भावों की तुलना की जाए तो दामों में पौने दो हजार रुपये की गिरावट आई है। फतेहाबाद की अनाज मंडी में एक सप्ताह पहले नरमे के भाव 5800 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो वीरवार को गिरकर 4800 रुपये पर आ गए। कॉटन व्यापार से जुड़े उद्योगपतियों का मानना है कि अगले एक सप्ताह में नरमे के भावों में दो-तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल की और कमी आ सकती है। नरमे के भाव गिरने से किसानों के चेहरे पर आई रौनक उड़ती जा रही है।
विज्ञापन
पिछली बार पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में नरमे की फसल पर सफेद मक्खी ने आक्रमण कर दिया था। जिसके चलते फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। स्पिनिंग एवं टेक्सटाइल मिलों के पास माल नहीं होने से अगस्त 2016 तक नरमे के भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। हालांकि व्यापारी इसके पीछे तर्क ये बताते हैं कि तब रुई के दाम 4800 रुपये प्रति मन पहुंच गए थे। जिसके कारण नरमे के भाव में तेजी आई थी। इस सीजन का नरमा जैसे ही मंडी में आया तो नरमे के भाव 55 सौ से 58 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। एक सप्ताह पूर्व ही नरमा फतेहाबाद की मंडी में 5800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका, लेकिन अब इसके भाव गिरकर 4800 रुपये प्रति क्विंटल ही रह गए हैं।
विज्ञापन
एक सप्ताह में एक हजार रुपये और दो महीने में 1700 रुपये प्रति क्विंटल नरमे के भाव गिरने से व्यापारियों में हड़कंप मच गया है। जबकि किसान इसे व्यापारियों का ही खेल बता रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब किसान माल बेच चुके थे तो नरमा 6500 रुपये प्रति क्विंटल बिका, लेकिन जब किसानों की बारी आई तो नरमे के दाम फिर से नीचे आ गए। कॉटन व्यापारियों एवं अनाज मंडी के कॉटन ब्रोकरों का मानना है कि भारत-पाक के बीच हुए तनाव के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी रुई के दाम गिर गए हैं। जिस कारण नरमे के भावों में कमी आई है।
कॉटन व्यापारियों के अनुसार 2 महीने पहले जिस एक मन रूई का दाम 4800 रुपये था, अब वह 3850 रुपये प्रति मन रह गया है। यही कारण है कि नरमे के भावों में कमी आई है। हालांकि किसानों का कहना है कि अगर कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया नरमे की खरीद करे तो भाव इतने नहीं गिर सकते। निजी खरीददारों ने ही अपने हित के लिए भाव गिराए हैं।
फैक्ट फाइल
5 मन = नरमे की एक गांठ
1 मन = 37 किलो 330 ग्राम (पुराना मन)
2015-16 में नरमे की बिजाई : 79 हजार हेक्टेयर
2016-17 में नरमे की बिजाई : 65 हजार हेक्टेयर
नरमा = किसान द्वारा खेत में उत्पादित
रुई=नरमे से बिनौला निकलने के बाद निकली कपास को रुई बोलते हैं।
आवक ज्यादा होने से कीमत में आई कमी
कॉटन मिल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुशील मित्तल के अनुसार एक सप्ताह में रुई के दामों में 500 रुपये की कमी आई है। जिसके चलते नरमे की कीमत में हजार रुपये की गिरावट आई है। मित्तल का मानना है कि इस सीजन में आवक ज्यादा है, जिसके चलते टेक्सटाइल मिलों द्वारा खरीद में कम आई और बाजार में दाम टूट गए हैं। जब माल नहीं था तो टेक्सटाइल मिलों को मिल चलाने के लिए नरमा खरीदना हर हाल में जरूरी था, इसी वजह से नरमे के भाव 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। उन्होंने इसके लिए कुछ हद तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव को भी जिम्मेदार ठहराया।
भुगतान रुकने के डर से निर्यात रोक दिया
कॉटन ब्रोकर प्रदीप कुमार के अनुसार भारत से पाकिस्तान को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से तकरीबन 25 लाख गांठ रुई एक्सपोर्ट होती है। तनाव के चलते व्यापारियों को भय है कि कहीं उनकी पेमेंट नहीं रुक जाए, इसी वजह से फिलहाल निर्यात नहीं हो रहा है। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है। मिलों ने भी रूई के दाम घटा दिए। जिस कारण बाजार में भाव गिर गए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करते हैं निजी खरीदारों के भाव
नरमे की खरीद सीसीआई करती है। सरकार ने अभी नरमे की खरीद शुरू नहीं की। निजी खरीदारों के भाव अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करते हैं। पिछले एक सप्ताह में हजार रुपये प्रति क्विंटल दाम गिर चुके हैं।
दिलावर सिंह, सचिव, मार्केट कमेटी, फतेहाबाद।