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पंजाबी सभा अस्पताल का हिसाब मांगने वाले ही फंसे
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Tue, 06 Dec 2016 11:28 PM IST
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पंजाबी सभा अस्पताल में गबन का विवाद आयेदिन नए रंग दिखा रहा है। कल तक जो लोग पुरानी कमेटी पर हिसाब नहीं देने का आरोप लगा रहे थे, आज वो लोग भी पंजाबी सभा अस्पताल के 1993 से 2009 के संचालन का हिसाब नहीं दिए जाने के आरोप में नामजद हो गए हैं। फतेहाबाद पुलिस ने महेंद्र मुटरेजा की शिकायत पर पंजाबी सभा के चार वरिष्ठ पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। इनमें पंजाबी सभा के संरक्षक ओमप्रकाश सरदाना, सचिव सुनील चौधरी, हरबंस लाल वढ़ेरा व खैरातीलाल शामिल हैं।
पंजाबी सभा अस्पताल के गबन संबंधी विवाद में ये नया मामला सामने आने के बाद शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर मामला दर्ज होने के बाद एडहॉक कमेटी के सदस्य हरबंस लाल वढ़ेरा और सुनील चौधरी ने पलटवार करते कहा है कि शिकायतकर्ता महेंद्र मुटरेजा पंजाबी सभा का सदस्य ही नहीं है तो उसके पास सभा का रिकॉर्ड कैसे पहुंच गया।
सभा से जुड़े अनेक लोग इसे दबाव बनाने की रणनीति बता रहे हैं।
इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि जिन चार लोगों पर मंगलवार को मामला दर्ज हुआ है, उन्हीं लोगों ने कुछ समय पूर्व चंद्रभान मुंजाल, नंदलाल चौधरी सहित 9 लोगों पर इन्हीं धाराओं के तहत मामला दर्ज करवाया था। ये वो 9 लोग हैं, जो 2009 से अब 2016 तक अस्पताल का संचालन का कामकाज देख रहे थे। सभा के ही कई सदस्यों ने आशंका जाहिर की है कि क्रॉस केस करने के लिए मंगलवार को चार पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।
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क्या था मामला
भट्टू रोड पर 1993 में पंजाबी सभा अस्पताल की नींव रखी गई थी जिसके लिए ओमप्रकाश सरदाना ने पंजाबी सभा को जमीन दान दे दी थी। इसमें हरबंस लाल वढ़ेरा, सुनील चौधरी, खैरातीलाल व ओमप्रकाश सरदाना निर्माण कार्य देख रहे थे।
बाजार से लोगों से चंदा एकत्रित करके सभा का अस्पताल बनाने में जुटे थे। 2009 तक अस्पताल का निर्माण हुआ भी और अटक भी गया। समाज के प्रयासों से 2009 में अस्पताल को चलाने के लिए फिर एक कमेटी का गठन किया गया। जिसमें चंद्रभान मुंजाल, नंदलाल चौधरी सहित अनेक लोगों ने अस्पताल का संचालन शुरु किया। आरोप है कि इस कमेटी ने अस्पताल में नियमों का उल्लघंन किया, सभा के संविधान के खिलाफ जाकर सभा के नए सदस्य बनाए गए।
इसके अलावा हरबंस लाल वढ़ेरा आदि ने चंद्रभान मुंजाल की अध्यक्षता वाली कमेटी पर लाखों रुपये गबन के आरोप भी जड़े। ओमप्रकाश सरदाना के फर्जी हस्ताक्षर करने का मामला भी उजागर हुआ था, इस पर ओमप्रकाश सरदाना ने कई माह पहले चंद्रभान व नंदलाल चौधरी सहित 9 लोगों पर जालसाजी करने का मामला दर्ज करवाया था। ये मामला यहीं खत्म नहीं हुआ, समाज में बढ़ रही खिलाफत को देखते मामला रजिस्ट्रार की कोर्ट में चल गया।
रजिस्ट्रार ने इसके लिए एक एडहॉक कमेटी का गठन किया जिसमें हरबंस लाल वढ़ेरा, ओमप्रकाश सरदाना, सुनील चौधरी व एडी बजाज को सदस्य बनाया गया। इस बीच महेंद्र मुटरेजा ने दबाव की राजनीति बनाने के लिए पुलिस में शिकायत दी कि उपरोक्त चारों लोगों ने 1993 से लेकर 2009 तक पंजाबी सभा अस्पताल में लाखों रुपये का गबन किया है। पुलिस ने मंगलवार को इस शिकायत पर चार पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ये हम पर दबाव बनाने का प्रयास है। महेंद्र मुटरेजा कभी पंजाबी सभा का सदस्य ही नहीं था। इसके अलावा 23 साल के बाद इन्हें भ्रष्टाचार का ख्याल आया है। हमने सीएम विंडो पर चंद्रभान, नंदलाल आदि की गिरफ्तारी की शिकायत दी थी, इसलिए ही इन लोगों ने फर्जी केस करवाया है। 1993 से 2009 तक चार सचिव, चार कै शियर रह चुके हैं। चार अप्रैल 1999 को पूरी सभा में प्रधान नंदलाल को हिसाब दिया गया था। उस समय से लेकर अब तक किसी ने हिसाब नहीं मांगा।
-हरबंस लाल वढ़ेरा, पंजाबी सभा एडहॉक कमेटी ।
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पंजाबी सभा अस्पताल के गबन संबंधी विवाद में ये नया मामला सामने आने के बाद शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर मामला दर्ज होने के बाद एडहॉक कमेटी के सदस्य हरबंस लाल वढ़ेरा और सुनील चौधरी ने पलटवार करते कहा है कि शिकायतकर्ता महेंद्र मुटरेजा पंजाबी सभा का सदस्य ही नहीं है तो उसके पास सभा का रिकॉर्ड कैसे पहुंच गया।
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सभा से जुड़े अनेक लोग इसे दबाव बनाने की रणनीति बता रहे हैं।
इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि जिन चार लोगों पर मंगलवार को मामला दर्ज हुआ है, उन्हीं लोगों ने कुछ समय पूर्व चंद्रभान मुंजाल, नंदलाल चौधरी सहित 9 लोगों पर इन्हीं धाराओं के तहत मामला दर्ज करवाया था। ये वो 9 लोग हैं, जो 2009 से अब 2016 तक अस्पताल का संचालन का कामकाज देख रहे थे। सभा के ही कई सदस्यों ने आशंका जाहिर की है कि क्रॉस केस करने के लिए मंगलवार को चार पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।
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क्या था मामला
भट्टू रोड पर 1993 में पंजाबी सभा अस्पताल की नींव रखी गई थी जिसके लिए ओमप्रकाश सरदाना ने पंजाबी सभा को जमीन दान दे दी थी। इसमें हरबंस लाल वढ़ेरा, सुनील चौधरी, खैरातीलाल व ओमप्रकाश सरदाना निर्माण कार्य देख रहे थे।
बाजार से लोगों से चंदा एकत्रित करके सभा का अस्पताल बनाने में जुटे थे। 2009 तक अस्पताल का निर्माण हुआ भी और अटक भी गया। समाज के प्रयासों से 2009 में अस्पताल को चलाने के लिए फिर एक कमेटी का गठन किया गया। जिसमें चंद्रभान मुंजाल, नंदलाल चौधरी सहित अनेक लोगों ने अस्पताल का संचालन शुरु किया। आरोप है कि इस कमेटी ने अस्पताल में नियमों का उल्लघंन किया, सभा के संविधान के खिलाफ जाकर सभा के नए सदस्य बनाए गए।
इसके अलावा हरबंस लाल वढ़ेरा आदि ने चंद्रभान मुंजाल की अध्यक्षता वाली कमेटी पर लाखों रुपये गबन के आरोप भी जड़े। ओमप्रकाश सरदाना के फर्जी हस्ताक्षर करने का मामला भी उजागर हुआ था, इस पर ओमप्रकाश सरदाना ने कई माह पहले चंद्रभान व नंदलाल चौधरी सहित 9 लोगों पर जालसाजी करने का मामला दर्ज करवाया था। ये मामला यहीं खत्म नहीं हुआ, समाज में बढ़ रही खिलाफत को देखते मामला रजिस्ट्रार की कोर्ट में चल गया।
रजिस्ट्रार ने इसके लिए एक एडहॉक कमेटी का गठन किया जिसमें हरबंस लाल वढ़ेरा, ओमप्रकाश सरदाना, सुनील चौधरी व एडी बजाज को सदस्य बनाया गया। इस बीच महेंद्र मुटरेजा ने दबाव की राजनीति बनाने के लिए पुलिस में शिकायत दी कि उपरोक्त चारों लोगों ने 1993 से लेकर 2009 तक पंजाबी सभा अस्पताल में लाखों रुपये का गबन किया है। पुलिस ने मंगलवार को इस शिकायत पर चार पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ये हम पर दबाव बनाने का प्रयास है। महेंद्र मुटरेजा कभी पंजाबी सभा का सदस्य ही नहीं था। इसके अलावा 23 साल के बाद इन्हें भ्रष्टाचार का ख्याल आया है। हमने सीएम विंडो पर चंद्रभान, नंदलाल आदि की गिरफ्तारी की शिकायत दी थी, इसलिए ही इन लोगों ने फर्जी केस करवाया है। 1993 से 2009 तक चार सचिव, चार कै शियर रह चुके हैं। चार अप्रैल 1999 को पूरी सभा में प्रधान नंदलाल को हिसाब दिया गया था। उस समय से लेकर अब तक किसी ने हिसाब नहीं मांगा।
-हरबंस लाल वढ़ेरा, पंजाबी सभा एडहॉक कमेटी ।