{"_id":"582f42f64f1c1b613690165e","slug":"fatehabad-co-oprative-bank-no-work-pensoners-unhappy-fatehabad-harayana","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले की 29 को-ऑपरेटिव शाखाओं में काम ठप, पेंशन को भी तरसे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले की 29 को-ऑपरेटिव शाखाओं में काम ठप, पेंशन को भी तरसे लोग
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
Updated Fri, 18 Nov 2016 11:35 PM IST
विज्ञापन
फतेहाबाद की अनाजमंडी स्थित काआपे्रटिव बैंक शाखा ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
नोट बंदी के फैसले के बाद जिले के को-ऑपरेटिव बैंकों में लेनदेन सहित सभी काम ठप पड़े हैं। वहां पहुंचे खाताधारकों को पैसा निकालने और जमा कराने के साथ पेंशन और अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। पता चला है कि को-ऑपरेटिव बैंक के खाते केवाईसी नियमों की औपचारिकता पूरी नहीं करते हैं। इस कारण आरबीआई ने नोट बंदी के बाद इन बैंकों में लेनदेन पर रोक लगा दी है।
इन 29 ब्रांचों के अधिकारी अपनी ब्रांचों के पुराने नोट भी चलाने में असमर्थ हैं। इसकी पुष्टि लीड बैंक के अधिकारी जीएस मल्होत्रा भी करते हैं।
फतेहाबाद में दी-फतेहाबाद को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की 29 शाखाएं काम कर रही हैं। इन ब्रांचों से जिले के अधिकांश किसान जुड़े हैं और ये गांव से लेकर जिलास्तर पर फैले हैं। नोट बंदी के बाद इन बैंकों के कर्मचारी खाली बैठे हैं।
विज्ञापन
बैंक में ना तो कैश जमा हो रहा है और ना ही निकाला जा रहा है। और तो और पेंशन, खाद और अन्य बैंकों के सामान्य कार्य भी नहीं हो रहे हैं। वहां आम खाताधारक आते हैं और वापस लौट जाते हैं। कर्मचारी भी कुछ बताने में असहाय हैं। ना ही खाताधारक को कुछ स्पष्ट किया जा रहा है कि उन्हें पेंशन कब मिलेगी। खाताधारक सुबह बैंकों के चक्कर काटते हैं और दोपहर तक धक्के खाकर वापस लौट जाते हैं।
विज्ञापन
लीड बैंक के अधिकारियों के अनुसार आरबीआई के निर्देशानुसार सभी को-ऑपरेटिव बैंकों में लेनदेन नहीं किया जा सकता है। मुख्य वजह है इन बैंकों के खाते केवाईसी की औपचारिकताएं पूरी नहीं करते। करेंसी चेस्ट में इसका पैसा जमा नहीं हो सकता। को-ऑपरेटिव बैंक के अधिकारी खुद प्राइवेट बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार अगर वे लेनदेन करते हैं तो इसकी जिम्मेदारी खुद उसी अधिकारी की होगी और ना ही इसका पैसा करेंसी चेस्ट आफिस में जमा हो सकेगा। लीड बैंक के अधिकारी जीएस मल्होत्रा ने इसकी पुष्टि करते कहा कि को-ऑपरेटिव बैंक नोटबंदी तक पुराने नोट लेने का काम नहीं कर सकते।