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न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि को किसानों ने बताया छलावा

Wed, 23 Sep 2020 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2020 12:03 AM IST
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Farmer call the increase in the minimum support price a joke
केंद्र सरकार द्वारा रबी की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि किए जाने का किसानों ने जहां स्वागत किया है। वहीं किसान नेताओं ने इसे मात्र छल बताया है। किसान नेताओं ने कहा कि फसलों का समर्थन मूूल्य प्रतिवर्ष बढ़ाया जाता है क्योंकि फसल की लागत भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि तीन अध्यादेश अब कानून की शक्ल अख्तियार कर चुके हैं। इस कानून में कहीं भी न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र तक नहीं है। इस बारे में अमर उजाला ने किसान नेताओं व किसानों से बातचीत की,
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जानिए क्या कहते हैं इस बारे किसान
सर्व खाप पंचायत के राष्ट्रीय प्रवक्ता सूबे सिंह समैण ने कहा कि प्रतिवर्ष महंगाई बढ़ रही है। डीजल, खाद, बीज सहित कृषि संबंधित अन्य सामग्री में 30 से 40 फीसदी तक वृद्धि हो गई है। ऐसे में सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य बहुत ही कम बढ़ाया है। गेहूं के दाम में 50 रुपये वृद्धि नाकाफी है। उनका कहना है कि सरकार ने अध्यादेशों की कमियों को छुपाने के लिए इस बार समय से पहले न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है। जबकि पहले यह बिजाई के समय पर घोषित होता है। उन्होंने कहा कि जब तक अध्यादेश वापिस नहीं लिए जाते तब तक किसान इस सरकार से राजी नहीं हो सकते।
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गांव खानपुर ढ़ाणी के किसान सरदार प्रगट सिंह ने कहा कि हालांकि फसल का लागत मूल्य काफी बढ़ा है लेकिन सरकार एमएसपी काफी कम बढ़ाया है। गेहूं पर मात्र 50 रुपये की वृद्धि करना सिर्फ किसानों को मूर्ख बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार कम से कम 2400 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं का मूल्य करना चाहिए।
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गांव बीराबदी के किसान सरदार कुलवंत सिंह ने एमएसपी बढ़ने का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार को इसी साल से धान का मूल्य बढ़ाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि अध्यादेश में समर्थन मूल्य की गारंटी दे।
गांव नागपुर के किसान अरुण ग्रोवर ने कहा कि सरकार ने समय रहते समर्थन मूल्य की घोषणा कर दी है। जिसमें किसानों को राहत मिलेगी। बिजाई से पूर्व एमएसपी बढ़ाने से किसान का मनोबल बढ़ेगा और वह गेहूं की ज्यादा बिजाई करेगा।
जानकारी अनुसार रबी सीजन के लिए गेहूं की एमएसपी में 50 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि उपरांत एमएसपी अब 1975 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। वहीं चने की एमएसपी में 225 रुपये, मसूर की एमएसपी में 300, सरसों की एमएसपी में 225 और जौ की एमएसपी में 75 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।

हरियाणा प्रदेश अनाज मंडी एसोसिएशन व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच हुई बातचीत के बाद फतेहाबाद की अनाज मंडी में आढ़तियों ने अपना धरना व हड़ताल खत्म कर दिया है। व्यापार मंडल के सचिव रमेश तनेजा ने बताया कि मुख्यमंत्री जब तक एमएसपी पर फसल खरीदने व आढ़तियों के धंधे कायम रहने की की घोषणा नहीं करते तब तक अनाज मंडी के आढ़ती चुप रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री कोई सकारात्मक रवैया नहीं अपनाते तो आढ़ती फिर आंदोलन कर सकते हैं।
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