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Fatehabad News: कम उम्र में धोखा दे रहीं आंखें, हो रहे मोतियाबिंद का शिकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Sep 2023 11:46 PM IST
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Eyes are deceiving at young age, becoming victim of cataract
फतेहाबाद। आंखों में मोतियाबिंद को लेकर पहले ये माना जाता था कि 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को इसके इलाज की जरूरत होती है। लेकिन अब ये मान्यता खत्म हो रही है। खानपान में बदलाव, शुगर, बीपी और जेनेटिक कारणों से 40 से कम उम्र के युवाओं की आंखें भी धोखा दे रहीं हैं, जांच में आंखों में मोतियाबिंद मिल रहा है। आंखों में मोतियाबिंद होने पर ऑपरेशन करवाना पड़ रहा है। नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों की समय-समय पर देखभाल जरूरी है। ये नहीं जिन्हें शुगर जैसी गंभीर बीमारी है उन्हें समय-समय पर जांच करवानी चाहिए। समय रहते मोतियाबिंद पर कंट्रोल किया जा सकता है। नागरिक अस्पताल फतेहाबाद के नेत्र रोग विभाग में रोजाना आंखों की जांच को लेकर 100 से 125 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें एक से दो मरीज ऐसे होते हैं जिनकी कम उम्र में ही आंखों में मोतियाबिंद मिल रहा है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश चौधरी का कहना है कि खानपान में बदलाव के कारण युवा डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। डायबिटीज का असर आंखों पर आ रहा है। आंखों से कम दिखना, बार-बार चश्मे का नंबर बदलना आदि लक्षणों के साथ मरीज ओपीडी में आ रहे हैं।
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ये बरतें सावधानी
चिकित्सकों के मुताबिक कम उम्र में इस बीमारी से आंखों की रोशनी खोने से बचाया जा सकता है। आंखों की रोशनी में समस्या महसूस हो तो तुरंत जांच करवानी चाहिए। जिससे शुरुआती चरण में इसे दवाओं से कंट्रोल किया जा सके। इसके साथ ही हरी सब्जियां, फल लेने चाहिए। चश्मा लगा है, तो समय-समय पर नंबर की जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही तेज धूप में धूप के चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए। शुगर को कंट्रोल रखें।
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ये हैं लक्षण
धुंधला दिखना
दोहरा दिखना
रंग फीके नजर आना
हल्की रोशनी का तेज प्रतीत होना
बार-बार चश्मे का नंबर बदलना
कोट
आमतौर पर मोतियाबिंद ज्यादा उम्र के लोगों में होता है लेकिन अब कम उम्र में भी लोगों की आंखों में मोतियाबिंद हो रहा है। जिन लोगों को शुगर-बीपी जैसी गंभीर बीमारी है उन्हें समय रहते जांच करवानी चाहिए। खानपान पर ध्यान जरूरी है।
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-डॉ. राजेश चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल
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