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Fatehabad News: सब कुछ बदल रहा, अब चुनावों में कामकाज के वादे पर जनता को भी ज्यादा विश्वास नहीं रहा
Thu, 19 Sep 2024 02:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 19 Sep 2024 02:58 AM IST
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भट्टू मंडी में चुनावी चर्चा में भाग लेते नागरिक।
फतेहाबाद। प्रदेश में 5 अक्तूबर को विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होना है। प्रत्येक पार्टी के प्रत्याशी हरियाणा विधानसभा में पहुंचने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। अपने-अपने वोटरों को रिझाने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। चुनाव प्रचार के इस माहौल में हर कोई स्थानीय से लेकर प्रदेश की राजनीति पर चर्चा कर रहे हैं। गांवों में चुनावों को लेकर चटखारे लिए जा रहे हैं।
गांवों में प्रत्याशियों के समर्थक अपने-अपने नेताओं के पक्ष में कसीदे पढ़ रहे हैं, तो ग्रामीण हर मुद्दों पर सवाल जवाब भी कर रहे हैं। गांव हो या शहर जहां पांच से दस ग्रामीण एकत्रित हो जाए, वहीं पर चुनावी चर्चा शुरू हो जाती है। बागड़ी बेल्ट में भट्टू मंडी में बैठे लोगों ने भी चुनावी चर्चा के दौरान मौजूदा हालातों को बयान किया। चर्चा में भाग लेते हुए सुभाष सैनी से जब चुनावी माहौल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अब और पुराने चुनाव माहौल में काफी अंतर है। सब कुछ बदल चुका है, अब पहले जैसी बातें कहां रही है। अब तो एक मिनट में पासा पलट जाता है।
वहीं, काली सिंह मोगावाला ने कहा कि अब चुनावों में कामकाज के वादे पर जनता को भी ज्यादा विश्वास नहीं रहा है। अब लिहाज, आपसी संबंध के नाम पर वोटिंग हो रही है। अभी तो नेताओं के जनसंपर्क अभियान ने तेजी पकड़ी है। चुनाव का सही माहौल 25 सितंबर के बाद देखने को मिलेगा। वहीं, संदीप शेखूपुर ने कहा कि मतदाता चयन को लेकर काफी असमंजस में हैं क्योंकि जिस प्रकार से सिद्धांत मायने बदले हैं, लोगों के विचार भी बदल गए हैं। जब नेता दिनभर झूठे वादे करते नजर आते हैं। सत्ता में आने के बाद उन वादों पर कोई सवाल पूछे तो उसको वहीं रोक दिया जाता है।
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अब मतदाता समझदार हो चुका, माहौल देखकर फैसला लेता है
ग्रामीण कैलाश गर्ग ने कहा कि अब मतदाता भी काफी समझदार हो चुका है और माहौल को देखकर ही अपना फैसला लेने लगा है। चुनावों में नेताओं को अपने विजन रखने चाहिए। जिस नेता का विजन अच्छा लगेगा, उसे मतदाता चुन लेंगे। कृष्ण बंसल ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं पर प्राथमिकता से कार्य करवाना चाहिए। इस समय भट्टू इलाके सहित पूरे फतेहाबाद जिले में ही स्वास्थ्य और शिक्षा के मामले में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। विश्वविद्यालय जैसा कोई शिक्षण संस्थान भी जिले में नहीं है। जिला बने हुए 27 साल हो गए, लेकिन न कोई बड़ा शिक्षण संस्थान बना है और न ही स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं मिल पाई है। छोटी सी बीमारी के इलाज के लिए भी लोगों को हिसार जाना पड़ता है।
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गांवों में प्रत्याशियों के समर्थक अपने-अपने नेताओं के पक्ष में कसीदे पढ़ रहे हैं, तो ग्रामीण हर मुद्दों पर सवाल जवाब भी कर रहे हैं। गांव हो या शहर जहां पांच से दस ग्रामीण एकत्रित हो जाए, वहीं पर चुनावी चर्चा शुरू हो जाती है। बागड़ी बेल्ट में भट्टू मंडी में बैठे लोगों ने भी चुनावी चर्चा के दौरान मौजूदा हालातों को बयान किया। चर्चा में भाग लेते हुए सुभाष सैनी से जब चुनावी माहौल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अब और पुराने चुनाव माहौल में काफी अंतर है। सब कुछ बदल चुका है, अब पहले जैसी बातें कहां रही है। अब तो एक मिनट में पासा पलट जाता है।
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वहीं, काली सिंह मोगावाला ने कहा कि अब चुनावों में कामकाज के वादे पर जनता को भी ज्यादा विश्वास नहीं रहा है। अब लिहाज, आपसी संबंध के नाम पर वोटिंग हो रही है। अभी तो नेताओं के जनसंपर्क अभियान ने तेजी पकड़ी है। चुनाव का सही माहौल 25 सितंबर के बाद देखने को मिलेगा। वहीं, संदीप शेखूपुर ने कहा कि मतदाता चयन को लेकर काफी असमंजस में हैं क्योंकि जिस प्रकार से सिद्धांत मायने बदले हैं, लोगों के विचार भी बदल गए हैं। जब नेता दिनभर झूठे वादे करते नजर आते हैं। सत्ता में आने के बाद उन वादों पर कोई सवाल पूछे तो उसको वहीं रोक दिया जाता है।
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अब मतदाता समझदार हो चुका, माहौल देखकर फैसला लेता है
ग्रामीण कैलाश गर्ग ने कहा कि अब मतदाता भी काफी समझदार हो चुका है और माहौल को देखकर ही अपना फैसला लेने लगा है। चुनावों में नेताओं को अपने विजन रखने चाहिए। जिस नेता का विजन अच्छा लगेगा, उसे मतदाता चुन लेंगे। कृष्ण बंसल ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं पर प्राथमिकता से कार्य करवाना चाहिए। इस समय भट्टू इलाके सहित पूरे फतेहाबाद जिले में ही स्वास्थ्य और शिक्षा के मामले में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। विश्वविद्यालय जैसा कोई शिक्षण संस्थान भी जिले में नहीं है। जिला बने हुए 27 साल हो गए, लेकिन न कोई बड़ा शिक्षण संस्थान बना है और न ही स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं मिल पाई है। छोटी सी बीमारी के इलाज के लिए भी लोगों को हिसार जाना पड़ता है।