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Fatehabad News: सेमग्रस्त और कम उपजाऊ जमीन पर उगेंगे सफेदे के पेड़, होगी कमाई

Sun, 11 Oct 2026 10:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sun, 11 Oct 2026 10:24 PM IST
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Eucalyptus trees to be grown on waterlogged and low-fertility land; will generate income
गांव मेहूवाला में वन विभाग की ओर से लगाए सफेदे के पौधें। स्रोत किसान
फतेहाबाद। जिले में वन विभाग की ओर से पर्यावरण को बनाए रखने के लिए किसानों के खेतों में व्यवसायिक फसल सफेदे की खेती पर जोर दिया गया है। वन विभाग की ओर से इस साल जिले में करीब 550 एकड़ भूमि पर साढ़े चार लाख सफेदा के पौधे लगाए गए हैं। इससे किसानों को चार वर्षों के बाद प्रति एकड़ से ढाई से तीन लाख रुपये का मुनाफा होने की उम्मीद है।
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वन विभाग की ओर से सफेदा की मुख्य किस्म पी-23 के पौधे शामिल हैं जो करीब चार वर्ष में बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं। विभाग के अनुसार सफेदा की खेती से किसानों को प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपये तक का मुनाफा हो सकता है।
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सफेदे से किसानों को आर्थिक लाभ देने के साथ पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी मदद मिलेगी। जिले में सेमग्रस्त और कम उपजाऊ भूमि के किसानों के लिए भी यह एक आमदनी का जरिया बना हुआ है। इससे सफेदे की व्यावसायिक खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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सेमग्रस्त भूमि में भी कामयाब

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में करीब 40 गांव ऐसे हैं जहां सेम की समस्या के कारण परंपरागत फसलों की पैदावार नहीं होती है। ऐसी भूमि पर सफेदे के पौधों की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प है। सफेदे की जड़ें जमीन में मौजूद पानी का उपयोग करती हैं जिससे सेमग्रस्त भूमि में भी इसके पौधों की अच्छी बढ़ोतरी देखी जा रही है। सफेदे की पत्तियों में कैल्शियम की मात्रा होती है जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। यही कारण है कि जिले में किसानों का रुझान सफेदा की व्यावसायिक फसल की ओर बढ़ रहा है।
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चार वर्ष में बिक्री के लिए तैयार होती है पी-23 किस्म
वन विभाग की ओर से लगाए जा रहे सफेदे में पी-23 किस्म को प्रमुखता दी जा रही है। यह किस्म करीब चार वर्ष में बिक्री योग्य आकार में पहुंच जाती है। पौधों की पूरी बढ़ोतरी और बाजार की स्थिति के अनुसार किसान इन्हें करीब चार वर्ष में बेचकर बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। सफेदे की लकड़ी की मांग प्लाई और कागज बनाने में होती है। इसी कारण सफेदे की लकड़ी की मांग बनी रहती है।

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एक एकड़ से ढाई से तीन लाख रुपये तक मुनाफा

सफेदे की व्यावसायिक खेती में किसानों को प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपये तक का मुनाफा मिलने की संभावना है। इससे ऐसी भूमि जहां अन्य फसलों से अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता उसका उपयोग आमदनी के लिए किया जा सकता है। विभाग किसानों को पौधरोपण के लिए प्रोत्साहित कर रहा है ताकि सेमग्रस्त भूमि का बेहतर उपयोग हो सके।

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:: इस साल जिले में सफेदे के करीब साढ़े चार लाख पौधे रोपे गएहैं। इससे हरित क्षेत्र में भी बढ़ोतरी होगी। सफेदे के पौधे किसानों की आय बढ़ाने के साथ वातावरण को स्वच्छ रखने और हरियाली बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। वन विभाग का उद्देश्य व्यावसायिक पौधरोपण को बढ़ावा देते हुए किसानों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।
- राजेश कुमार, जिला वनमंडल अधिकारी, फतेहाबाद।
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