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Fatehabad News: खेतों में ड्रोन से निगरानी तो पटाखों के प्रदूषण पर भी हो सख्ती
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फतेहाबाद में जागो संस्था के पदाधिकारी बैठक करते हुए स्त्रोत संस्था
फतेहाबाद। खेतों में पराली जलाने पर ड्रोन से निगरानी की जा रही है तो पटाखों से फैलने वाले प्रदूषण पर भी सरकार सख्त कार्रवाई करे। जागो संस्था ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पटाखों के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
संस्था ने नियम तोड़ने वाले विक्रेताओं पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाने की मांग भी की है। संस्था के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह दहिया, पदाधिकारी सुरेंद्र असीजा, राजेश भादू और सेवा सिंह मुवाल ने कहा कि सरकार का दायित्व लोगों को स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध करवाना है। इसके लिए केवल अपील और जागरूकता पर्याप्त नहीं है। प्रदूषण फैलाने वाले सभी स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
संस्था के अनुसार फतेहाबाद शहर में भट्टू रोड पर हर साल पांच से अधिक पटाखा गोदाम खुल रहे हैं। संस्था के संरक्षक रिछपाल तरड़, प्रदीप जांगड़ा, सुरेंद्र असीजा, प्रधान देवेंद्र दहिया, प्रमोद बजाज, सेवा सिंह मुवाल, भारत गोयल, मिथलेश रोहिला, विनोद, ब्राइट गोदारा और राजेंद्र ने पत्र में चिंता जताई कि अक्टूबर से दिसंबर तक प्रदूषण बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है।
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ऐसे में पटाखों का धुआं स्थिति को और गंभीर बना सकता है। संस्था के अनुसार पटाखों के धुएं से खांसी, सांस फूलने, अस्थमा और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तेज आवाज बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए परेशानी पैदा करती है। संस्था ने मुख्यमंत्री से पटाखा गोदामों की जांच करवाने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस नीति लागू करने का आग्रह किया है।
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संस्था ने नियम तोड़ने वाले विक्रेताओं पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाने की मांग भी की है। संस्था के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह दहिया, पदाधिकारी सुरेंद्र असीजा, राजेश भादू और सेवा सिंह मुवाल ने कहा कि सरकार का दायित्व लोगों को स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध करवाना है। इसके लिए केवल अपील और जागरूकता पर्याप्त नहीं है। प्रदूषण फैलाने वाले सभी स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
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संस्था के अनुसार फतेहाबाद शहर में भट्टू रोड पर हर साल पांच से अधिक पटाखा गोदाम खुल रहे हैं। संस्था के संरक्षक रिछपाल तरड़, प्रदीप जांगड़ा, सुरेंद्र असीजा, प्रधान देवेंद्र दहिया, प्रमोद बजाज, सेवा सिंह मुवाल, भारत गोयल, मिथलेश रोहिला, विनोद, ब्राइट गोदारा और राजेंद्र ने पत्र में चिंता जताई कि अक्टूबर से दिसंबर तक प्रदूषण बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है।
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ऐसे में पटाखों का धुआं स्थिति को और गंभीर बना सकता है। संस्था के अनुसार पटाखों के धुएं से खांसी, सांस फूलने, अस्थमा और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। तेज आवाज बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए परेशानी पैदा करती है। संस्था ने मुख्यमंत्री से पटाखा गोदामों की जांच करवाने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस नीति लागू करने का आग्रह किया है।