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प्रमाण पत्र के लिए बुलाए स्ट्रीट वेंडर, लगी भीड़
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शहर में रेहड़ियों पर सामान बेचने वाले स्ट्रीट वेंडरों को पहचान पत्र देने के लिए नप ने सोमवार को आखिरकार तीन साल बाद फाइल निकाल ली और आनन-फानन में स्ट्रीट वेंडरों को फोन करके बुला लिया गया। लेकिन कार्यक्रम में जब स्ट्रीट वेंडर पहुंचे तो नगर परिषद के लिए उन्हें संभालना मुश्किल हो गया। कार्यक्रम में 268 स्ट्रीट वेंडरों को बुला लिया गया लेकिन उन्हें संभालने के लिए दो ही कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। ड्यूटी भी महिला कर्मचारियों की लगाई गई, इसके चलते भीड़ बेकाबू हो गई।
कोरोना महामारी के बीच कार्यक्रम में न सैनिटाइज की व्यवस्था की गई और न ही सामाजिक दूरी का ध्यान रखा गया। अकेली महिला कर्मचारी स्ट्रीट वेंडरों से उलझती हुई नजर आई। अहम बात यह है कि नगर परिषद कार्यालय के ऊपर बैठे अधिकारी पूरा तमाशा दे ाते रहे लेकिन किसी ने भी व्यवस्था नहीं करवाई। अहम बात यह कि नप ईओ जितेंद्र कुमार कार्यक्रम में अव्यवस्था देखकर मौके से लौट गए। करीब तीन घंटे बाद जब जिला नगर आयुक्त समर्वतक सिंह पहुंचे तो उन्होंने अव्यवस्था को ठीक करने के निर्देश दिए।
97 को ही मिले प्रमाण पत्र : स्ट्रीट वेंडरों को पहचान पत्र देने के लिए नप की तरफ से करीब तीन साल पहले सर्वे करवाया गया था। 750 लोगों को सर्वे में शामिल किया गया। लेकिन 268 लोगों को ही मंजूरी मिली है। नगर परिषद की तरफ से नगर परिषद ने सोमवार को तीन साल बाद स्ट्रीट वेंडरों को पहचान पत्र देने की फाइल निकाली तो बिना व्यवस्था ही सभी को बुला लिया। लेकिन नप 97 वेंडरों को ही पहचान पत्र दे पाया।
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97 में से 8 ने किया आवेदन : प्रमाण पत्र मिलने के बाद पीएम स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत स्ट्रीट वेंडर को 10 हजार रुपये का लोन मिलेगा। इसके लिए आवेदन सीएससी से करवाना होगा। लेकिन पोर्टल न चलने के कारण मात्र आठ ही आवेदन कर पाए। प्रमाण पत्र लेने के लिए आए पूर्ण सिंह और राजीव रंजन ने बताया कि दो ही कर्मचारी यहां लगाए गए है। सुबह तीन घंटे से खड़े लेकिन आवेदन नहीं कर पाए। अधिकारियों को कहा गया तो जवाब मिला दो कर्मचारी भेजे हैं लेकिन कोई नहीं आया।
सोमवार को पहला दिन होने के कारण भीड़ हो गई। व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा ताकि कोरोना महामारी को लेकर नियमों को पालन हो सके। इसको लेकर लोगों से भी अपील की जाएगी कि व्यवस्था बनाए रखें।
- समवर्तक सिंह, जिला नगर आयुक्त।
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कोरोना महामारी के बीच कार्यक्रम में न सैनिटाइज की व्यवस्था की गई और न ही सामाजिक दूरी का ध्यान रखा गया। अकेली महिला कर्मचारी स्ट्रीट वेंडरों से उलझती हुई नजर आई। अहम बात यह है कि नगर परिषद कार्यालय के ऊपर बैठे अधिकारी पूरा तमाशा दे ाते रहे लेकिन किसी ने भी व्यवस्था नहीं करवाई। अहम बात यह कि नप ईओ जितेंद्र कुमार कार्यक्रम में अव्यवस्था देखकर मौके से लौट गए। करीब तीन घंटे बाद जब जिला नगर आयुक्त समर्वतक सिंह पहुंचे तो उन्होंने अव्यवस्था को ठीक करने के निर्देश दिए।
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97 को ही मिले प्रमाण पत्र : स्ट्रीट वेंडरों को पहचान पत्र देने के लिए नप की तरफ से करीब तीन साल पहले सर्वे करवाया गया था। 750 लोगों को सर्वे में शामिल किया गया। लेकिन 268 लोगों को ही मंजूरी मिली है। नगर परिषद की तरफ से नगर परिषद ने सोमवार को तीन साल बाद स्ट्रीट वेंडरों को पहचान पत्र देने की फाइल निकाली तो बिना व्यवस्था ही सभी को बुला लिया। लेकिन नप 97 वेंडरों को ही पहचान पत्र दे पाया।
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97 में से 8 ने किया आवेदन : प्रमाण पत्र मिलने के बाद पीएम स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत स्ट्रीट वेंडर को 10 हजार रुपये का लोन मिलेगा। इसके लिए आवेदन सीएससी से करवाना होगा। लेकिन पोर्टल न चलने के कारण मात्र आठ ही आवेदन कर पाए। प्रमाण पत्र लेने के लिए आए पूर्ण सिंह और राजीव रंजन ने बताया कि दो ही कर्मचारी यहां लगाए गए है। सुबह तीन घंटे से खड़े लेकिन आवेदन नहीं कर पाए। अधिकारियों को कहा गया तो जवाब मिला दो कर्मचारी भेजे हैं लेकिन कोई नहीं आया।
सोमवार को पहला दिन होने के कारण भीड़ हो गई। व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा ताकि कोरोना महामारी को लेकर नियमों को पालन हो सके। इसको लेकर लोगों से भी अपील की जाएगी कि व्यवस्था बनाए रखें।
- समवर्तक सिंह, जिला नगर आयुक्त।