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Fatehabad News: थोड़ा संभल कर खाइये, 30 फीसदी खाद्य पदार्थों के सैंपल मिले हैं फेल
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फतेहाबाद। बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं या फिर ऐसे बेचे जा रहे हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं यानि अनसेफ हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की एक साल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 30 फीसदी खाद्य पदार्थ मिलावटी है।
वजह ये है कि जिले में खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने के लिए दो-दो अधिकारी होने के बावजूद सिर्फ 179 सैंपल ही लिए गए हैं। अब भी हालात ये है कि जिले में कई जगहों पर अवैध तरीके से पैकिंग पेय पदार्थ तैयार हो रहे हैं और उन्हें मार्केट में बेचा जा रहा है। गर्मियों के सीजन में इनकी डिमांड बढ़ जाती है। विभाग के अधिकारी जांच तक नहीं कर रहे हैं। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2023 से लेकर मार्च 2024 तक 179 सैंपल लिए गए हैं। वहीं एडीसी की कोर्ट ने 53 केसों में मिलावटखोरों पर जुर्माना लगया है।
विभाग के पास 181 सैंपलों की रिपोर्ट आई, इसमें पिछले साल के दो लंबित रिपोर्ट शामिल हैं। जिसमें 128 सैंपल पास मिले हैं और 53 फेल मिले हैं। बता दें कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग के लिए दो वेटरनरी सर्जन नियुक्त कर रखे हैं। इन्हें सैंपल लेने की जिम्मेदारी दी गई है। हालात ये है कि पिछले साल फिर भी 179 ही सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। संवाद
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खाद्य पदार्थों के 6 सैंपल मिले अनसेफ
विभाग के पास आई रिपोर्ट के मुताबिक 47 खाद्य पदार्थों के 47 सैंपल सब स्टैंडर्ड मिले हैं। इसके अलावा 6 सैंपल अनसेफ मिले हैं। अनसेफ मिले खाद्य पदार्थों को खाने से बीमार तक हो सकते हैं। अधिकारियों की माने तो पनीर, मसालों, दूध, घी आदि के सैंपल फेल मिल चुके हैं।
फेल सैंपलों के 53 केसों में कोर्ट ने लगाया 4.87 लाख जुर्माना
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पिछले साल अनसेफ के 6 केस सीजेएम कोर्ट में भेजे हैं। इसके अलावा सब स्टैंडर्ड के 43 केस एडीसी कोर्ट में भेजे हैं। अधिकारियों की माने तो एडीसी की कोर्ट ने 53 केसों में मिलावटखोरों पर 4.87 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
कोट
यहां दो अधिकारियों द्वारा सैंपल लिए जा रहे हैं। जो सैंपल लिए जाते है उन्हें जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होती है।
-ओम कुमार, जिला अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग
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वजह ये है कि जिले में खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने के लिए दो-दो अधिकारी होने के बावजूद सिर्फ 179 सैंपल ही लिए गए हैं। अब भी हालात ये है कि जिले में कई जगहों पर अवैध तरीके से पैकिंग पेय पदार्थ तैयार हो रहे हैं और उन्हें मार्केट में बेचा जा रहा है। गर्मियों के सीजन में इनकी डिमांड बढ़ जाती है। विभाग के अधिकारी जांच तक नहीं कर रहे हैं। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2023 से लेकर मार्च 2024 तक 179 सैंपल लिए गए हैं। वहीं एडीसी की कोर्ट ने 53 केसों में मिलावटखोरों पर जुर्माना लगया है।
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विभाग के पास 181 सैंपलों की रिपोर्ट आई, इसमें पिछले साल के दो लंबित रिपोर्ट शामिल हैं। जिसमें 128 सैंपल पास मिले हैं और 53 फेल मिले हैं। बता दें कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग के लिए दो वेटरनरी सर्जन नियुक्त कर रखे हैं। इन्हें सैंपल लेने की जिम्मेदारी दी गई है। हालात ये है कि पिछले साल फिर भी 179 ही सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। संवाद
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खाद्य पदार्थों के 6 सैंपल मिले अनसेफ
विभाग के पास आई रिपोर्ट के मुताबिक 47 खाद्य पदार्थों के 47 सैंपल सब स्टैंडर्ड मिले हैं। इसके अलावा 6 सैंपल अनसेफ मिले हैं। अनसेफ मिले खाद्य पदार्थों को खाने से बीमार तक हो सकते हैं। अधिकारियों की माने तो पनीर, मसालों, दूध, घी आदि के सैंपल फेल मिल चुके हैं।
फेल सैंपलों के 53 केसों में कोर्ट ने लगाया 4.87 लाख जुर्माना
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पिछले साल अनसेफ के 6 केस सीजेएम कोर्ट में भेजे हैं। इसके अलावा सब स्टैंडर्ड के 43 केस एडीसी कोर्ट में भेजे हैं। अधिकारियों की माने तो एडीसी की कोर्ट ने 53 केसों में मिलावटखोरों पर 4.87 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
कोट
यहां दो अधिकारियों द्वारा सैंपल लिए जा रहे हैं। जो सैंपल लिए जाते है उन्हें जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होती है।
-ओम कुमार, जिला अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग