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मर्यादा एवं सत्य ही आचार्य भिक्षु की आन, बान व शान थी : प्रभा
Tue, 17 Sep 2024 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 17 Sep 2024 02:20 AM IST
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कार्यक्रम के दौरान साध्वी समन्वय प्रभा, संयम प्रभा व चारूलता।
टोहाना। तेरापंथ के आद्य प्रवर्तक आचार्य भिक्षु के 222वें चरमोत्सव पर साध्वी समन्वय प्रभा के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास से कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मंगलाचरण उषा जैन एवं मंजू जैन ने भिक्षु अष्टकम से किया।
साध्वी समन्वय प्रभा ने कहा कि आचार्य भिक्षु विलक्षण प्रतिभा एवं उत्कृष्ट मनोबल के धनी थे। उनके पास संकल्प बल, वचन सिद्धि बल, जिनवाणी में श्रद्धा बल, तपोबल, संयम बल, आचार निष्ठा, समर्पण एवं विनय बल, अतींद्रिय बल एवं आत्मिक बल था। उन्होंने शारीरिक एवं मानसिक कष्टों को समता भाव से सहा एवं तपोबल के द्वारा आत्मा को निर्मल कर तेरापंथ धर्म संघ का विकास किया। मर्यादा एवं सत्य ही उनकी आन, बान व शान थी।
साध्वी समन्वय प्रभा ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने जिस ज्योति को प्रज्वलित किया वह 221 वर्ष पूर्व ज्योति में समा गई परंतु आज भी तेरा पंथ के हर्ष श्रावक के हृदय में प्रज्वलित हैं। साध्वी चारुलता ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने स्वयं कांटों के पथ पर चलकर हमें राजपथ दिया एवं स्वयं भूखे रहकर अमृत पान कराया। उन्होंने सुमधुर गीतिका के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त की।
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इस अवसर पर तेरापंथ सभा के मंत्री सुभाष जैन, महिला मंडल अध्यक्ष रजनी जैन तेरापंथ महिला मंडल, उमेश जैन, कंचन जैन, रेखा जैन सुशील जैन एवं बीदासर से समागत संजय बेंगाणी ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए परम आराध्य को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन सभा के मंत्री सुभाष जैन ने किया एवं कार्यक्रम के अंत में संघ गान का गायन किया गया।
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साध्वी समन्वय प्रभा ने कहा कि आचार्य भिक्षु विलक्षण प्रतिभा एवं उत्कृष्ट मनोबल के धनी थे। उनके पास संकल्प बल, वचन सिद्धि बल, जिनवाणी में श्रद्धा बल, तपोबल, संयम बल, आचार निष्ठा, समर्पण एवं विनय बल, अतींद्रिय बल एवं आत्मिक बल था। उन्होंने शारीरिक एवं मानसिक कष्टों को समता भाव से सहा एवं तपोबल के द्वारा आत्मा को निर्मल कर तेरापंथ धर्म संघ का विकास किया। मर्यादा एवं सत्य ही उनकी आन, बान व शान थी।
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साध्वी समन्वय प्रभा ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने जिस ज्योति को प्रज्वलित किया वह 221 वर्ष पूर्व ज्योति में समा गई परंतु आज भी तेरा पंथ के हर्ष श्रावक के हृदय में प्रज्वलित हैं। साध्वी चारुलता ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने स्वयं कांटों के पथ पर चलकर हमें राजपथ दिया एवं स्वयं भूखे रहकर अमृत पान कराया। उन्होंने सुमधुर गीतिका के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त की।
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इस अवसर पर तेरापंथ सभा के मंत्री सुभाष जैन, महिला मंडल अध्यक्ष रजनी जैन तेरापंथ महिला मंडल, उमेश जैन, कंचन जैन, रेखा जैन सुशील जैन एवं बीदासर से समागत संजय बेंगाणी ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए परम आराध्य को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन सभा के मंत्री सुभाष जैन ने किया एवं कार्यक्रम के अंत में संघ गान का गायन किया गया।