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पंचायत चुनाव के दौर में खाली हुआ नशा मुक्ति केंद्र
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फतेहाबाद का नशा मुक्ति केंद्र।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। जिले के नशा मुक्ति केंद्र में 15 से 20 लोगों की वेटिंग चलती थी, वह अब खाली-खाली नजर आ रहा है। मात्र तीन लोग ही नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल है। केंद्र में ओपीडी भी 90 फीसदी कम हो गई है। इस स्थिति से गांवों में चुनाव प्रचार के दौरान नशा बांटे जाने की आशंका को बल मिल रहा है। माना जा रहा है कि गांव में ही कुछ प्रत्याशी नशा उपलब्ध करवा रहे हैं, इसलिए नशा करने वाले लोग नशा मुक्ति केंद्र तक पहुंच ही नहीं रहे हैं।
दरअसल, नशा मुक्ति केंद्र के मनोचिकित्सक के पास पहले रोजाना 70 से 80 मरीजों की ओपीडी थी। मगर पंचायत चुनाव का शेड्यूल घोषित होते ही ओपीडी नाममात्र रह गई है। इससे चिकित्सक भी हैरान है। आशंका जताई जा रही है कि युवाओं को नशे का लालच देकर प्रचार में लगाया जा रहा है। विशेषज्ञ ये भी मानते हैं कि नशा लेने का आदी बिना नशे के नहीं रह सकता है। नशा मुक्ति केंद्र में भी दाखिल होने वाले मरीज को दवाई देकर नशे की लत को कम किया जाता है।
हेरोइन नशा लेने वाले 60 फीसदी, 10 फीसदी शराब पीने के आदी
नशा मुक्ति केंद्र में मनोचिकित्सक के पास रोजाना 70 से 80 मरीजों की ओपीडी नशा ले रहे मरीजों की होती है। इसमें 60 फीसदी मरीज ऐसे होते हैं जो कि हेरोइन का नशा ले रहे हैं। 10 फीसदी ही ऐसे होते हैं जो शराब पीने के आदी होते हैं। इसके अलावा 30 फीसदी अन्य मरीजों की ओपीडी होती है जो कि अफीम, चूरापोस्त, प्रतिबंधित गोलियों आदि का नशा ले रहे हैं। लेकिन अब फिलहाल 10 फीसदी मरीजों की ओपीडी रह गई है।
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1360 मरीज हो चुके हैं नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल
जिला नागरिक अस्पताल में सरकार ने मई 2018 में नशा मुक्ति केंद्र की शुरुआत की थी। कोरोना महामारी के दौरान करीब डेढ़ साल तक नशा मुक्ति केंद्र बंद रहा। यहां पर अक्टूबर माह तक करीब 1360 मरीज नशा छोड़ने के लिए दाखिल हो चुके हैं। इसमें 8 महिलाएं भी शामिल हैं।
कोट
नशा मुक्ति केंद्र में पहले हर समय 15 मरीज दाखिल रहते थे और करीब 10 से 15 मरीजों की वेटिंग चल रही थी। लेकिन अब पिछले करीब 10 दिनों से नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल होने के लिए मरीज नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा ओपीडी भी कम है। अभी फिलहाल तीन मरीज ही दाखिल हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिसमें पंचायत चुनाव भी एक कारण हो सकता है।
-डॉ. गिरीश, इंचार्ज, नशा मुक्ति केंद्र।
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दरअसल, नशा मुक्ति केंद्र के मनोचिकित्सक के पास पहले रोजाना 70 से 80 मरीजों की ओपीडी थी। मगर पंचायत चुनाव का शेड्यूल घोषित होते ही ओपीडी नाममात्र रह गई है। इससे चिकित्सक भी हैरान है। आशंका जताई जा रही है कि युवाओं को नशे का लालच देकर प्रचार में लगाया जा रहा है। विशेषज्ञ ये भी मानते हैं कि नशा लेने का आदी बिना नशे के नहीं रह सकता है। नशा मुक्ति केंद्र में भी दाखिल होने वाले मरीज को दवाई देकर नशे की लत को कम किया जाता है।
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हेरोइन नशा लेने वाले 60 फीसदी, 10 फीसदी शराब पीने के आदी
नशा मुक्ति केंद्र में मनोचिकित्सक के पास रोजाना 70 से 80 मरीजों की ओपीडी नशा ले रहे मरीजों की होती है। इसमें 60 फीसदी मरीज ऐसे होते हैं जो कि हेरोइन का नशा ले रहे हैं। 10 फीसदी ही ऐसे होते हैं जो शराब पीने के आदी होते हैं। इसके अलावा 30 फीसदी अन्य मरीजों की ओपीडी होती है जो कि अफीम, चूरापोस्त, प्रतिबंधित गोलियों आदि का नशा ले रहे हैं। लेकिन अब फिलहाल 10 फीसदी मरीजों की ओपीडी रह गई है।
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1360 मरीज हो चुके हैं नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल
जिला नागरिक अस्पताल में सरकार ने मई 2018 में नशा मुक्ति केंद्र की शुरुआत की थी। कोरोना महामारी के दौरान करीब डेढ़ साल तक नशा मुक्ति केंद्र बंद रहा। यहां पर अक्टूबर माह तक करीब 1360 मरीज नशा छोड़ने के लिए दाखिल हो चुके हैं। इसमें 8 महिलाएं भी शामिल हैं।
कोट
नशा मुक्ति केंद्र में पहले हर समय 15 मरीज दाखिल रहते थे और करीब 10 से 15 मरीजों की वेटिंग चल रही थी। लेकिन अब पिछले करीब 10 दिनों से नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल होने के लिए मरीज नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा ओपीडी भी कम है। अभी फिलहाल तीन मरीज ही दाखिल हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिसमें पंचायत चुनाव भी एक कारण हो सकता है।
-डॉ. गिरीश, इंचार्ज, नशा मुक्ति केंद्र।