{"_id":"6ad111557640775e1301f1bd","slug":"dasharatha-gave-up-his-life-in-his-separation-from-rama-his-brother-bharata-upheld-the-honor-of-the-raghu-lineage-fatehabad-news-c-127-1-ftb1003-163008-2026-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehabad News: राम के वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण भाई भरत ने निभाई रघुकुल की मर्यादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehabad News: राम के वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण भाई भरत ने निभाई रघुकुल की मर्यादा
Thu, 15 Oct 2026 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 15 Oct 2026 11:15 PM IST
विज्ञापन
भूना। रामलीला के दौरान वनगमन प्रसंग का मंचन करते कलाकार। आयोजक
भूना। श्रीराम कृष्ण कला मंच पर भारत मिलाप की लीला का मंचन किया गया, जिसमें राजा दशरथ के पुत्र वियोग में प्राण त्यागने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। मंचन के दौरान दिखाया गया कि भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास पर जाने के बाद राजा दशरथ पुत्र वियोग में व्याकुल हो उठते हैं।
दशरथ के संवाद राम मेरे राम, मेरे पास आ जाओ... मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता सुनकर दर्शक भावुक हो गए। राम-राम का जाप करते हुए दशरथ के प्राण त्यागने के दृश्य ने माहौल को गमगीन कर दिया। इसके बाद, राजा दशरथ के निधन के पश्चात भरत और शत्रुघ्न को अयोध्या बुलाया गया।
पिता के निधन और श्रीराम के वनवास की जानकारी मिलने पर भरत अपनी माता कैकेयी पर नाराजगी जताते हैं। भरत वन में जाकर भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने और राजगद्दी संभालने की विनती करते हैं, लेकिन श्रीराम पिता के वचन और रघुकुल की मर्यादा का हवाला देते हुए वनवास पूरा करने का संकल्प दोहराते हैं।
विज्ञापन
अंत में, भरत श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें सिंहासन पर स्थापित कर उनके प्रतिनिधि के रूप में राज्य चलाने का संकल्प लेते हैं। भारत मिलाप के इस प्रसंग ने भाईचारे, त्याग, प्रेम और मर्यादा का संदेश दिया। इस अवसर पर प्रधान हरविंदर मेहता, डायरेक्टर सुरेंद्र हंस, राकेश मदान, सुनील खुराना, राजेश चराया, इशू भूटानी और संजय मेहता आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
दशरथ के संवाद राम मेरे राम, मेरे पास आ जाओ... मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता सुनकर दर्शक भावुक हो गए। राम-राम का जाप करते हुए दशरथ के प्राण त्यागने के दृश्य ने माहौल को गमगीन कर दिया। इसके बाद, राजा दशरथ के निधन के पश्चात भरत और शत्रुघ्न को अयोध्या बुलाया गया।
विज्ञापन
पिता के निधन और श्रीराम के वनवास की जानकारी मिलने पर भरत अपनी माता कैकेयी पर नाराजगी जताते हैं। भरत वन में जाकर भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने और राजगद्दी संभालने की विनती करते हैं, लेकिन श्रीराम पिता के वचन और रघुकुल की मर्यादा का हवाला देते हुए वनवास पूरा करने का संकल्प दोहराते हैं।
विज्ञापन
अंत में, भरत श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें सिंहासन पर स्थापित कर उनके प्रतिनिधि के रूप में राज्य चलाने का संकल्प लेते हैं। भारत मिलाप के इस प्रसंग ने भाईचारे, त्याग, प्रेम और मर्यादा का संदेश दिया। इस अवसर पर प्रधान हरविंदर मेहता, डायरेक्टर सुरेंद्र हंस, राकेश मदान, सुनील खुराना, राजेश चराया, इशू भूटानी और संजय मेहता आदि मौजूद रहे।