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ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉ. गोयल की सेवा समाप्त
fatehabad
Updated Thu, 18 Aug 2016 01:42 AM IST
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अपने कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते सीएमओ डा. अशोक चौधरी।
- फोटो : amar ujala
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एक अगस्त को सामान्य अस्पताल के महिला वार्ड में छत का मलबा गिरने के मामले की जांच कर रही कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सीएमओ डॉ. अशोक चौधरी को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में बच्चे की मौत की वजह इंफेक्शन तो बताई गई है, लेकिन यह इंफेक्शन हादसे के पहले हुआ या बाद में इस प्रश्न का उत्तर देने से सीएमओ कन्नी काट गए। वहीं ड्यूटी पर लापरवाही बरतने के आरोप में मेडिकल आफिसर रहे डॉ. आरसी गोयल को एक महीने का नोटिस देते हुए उनकी सेवा समाप्ति कर दी गई है।
डॉ. आरसी गोयल रिटायरमेंट के बाद से अस्पताल में ही अनुबंध आधार पर काम कर रहे थे। इसके अलावा महिला वार्ड की मेंटिनेंस ड्यूटी संभालने वाली नर्सिंग सिस्टर रवींद्र कौर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की गई है। दूसरी ओर रिपोर्ट में नवजात की मौत के बिल्कुल सटीक कारण बताने से भी जांच कमेटी ने परहेज किया है क्योंकि बच्चे का शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था।
बुधवार को अपने कार्यालय में सीएमओ डॉ. अशोक चौधरी ने एक पत्रकार वार्ता में बताया कि जांच कमेटी ने सभी तथ्यों की पूरी पड़ताल करने के बाद अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने बताया कि चार सदस्यीय जांच कमेटी में डॉ. ओपी दहमीवाल, डॉ. सुनीता सोखी, डॉ. गिरीश और डॉ. सुभाष शामिल थे। कमेटी ने अस्पताल से जुड़े तकरीबन 9 लोगों, जिनमें चिकित्सक और स्टाफ नर्सें शामिल थीं, उनसे पूछताछ की। इसके अलावा जांच कमेटी ने जिंदल अस्पताल के चिकित्सकों से भी नवजात की तत्कालीन स्थिति का जायजा लिया। गौरतलब है कि 2 अगस्त की देर रात 2 बजे बच्चे की जिंदल अस्पताल में ही इलाज के दौरान मौत हो गई थी। जांच रिपोर्ट में कमेटी ने बच्चे की मौत का कारण कोई हादसे के कारण लगी चोटें ना बताकर गंभीर इंफेक्शन के चलते बताया है। हालांकि खुद जांच कमेटी ने पोस्टमार्टम नहीं होने से इस कारण को सटीक नहीं बताया है।
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हादसे वाली रात रात पौने नौ बजे ही ड्यूटी से चले गए थे डॉ. गोयल
जांच कमेटी ने नवजात की मौत का कारण तो इंफेक्शन ही बताया है लेकिन उन्होंने अपनी जांच में उस समय ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. आरसी गोयल को भी गंभीर लापरवाही का दोषी पाया है। जांच में खुलासा हुआ है कि हादसे की रात पौने 9 बजे ही डॉ. गोयल घर चले गए थे जबकि उनको रातभर वहीं रुकना था। इसके अलावा रात 12 बजे जब हादसा हुआ तो वह रात 12:45 बजे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने इस दौरान बच्चे की हालत के बारे में ना तो नवजात के माता-पिता को बताया और ना ही उनके बाद ड्यूटी पर आने वाले डॉ. मानव सेठी को। डॉ. आरसी गोयल पर यह भी आरोप है कि सुबह अपनी ड्यूटी खत्म करने के दौरान भी वह डॉ. मानव सेठी को केस हिस्ट्री हैंडओवर करके नहीं गए थे, जो कि अत्यंत आवश्यक होता है।
दुर्व्यवहार के आरोप झेलने वाली नर्स को मिला संदेह का लाभ
हादसे की रात ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स रवींद्र पर नवजात के पिता ने आरोप लगाए थे कि उनको उसने छत की खराब हालत के बारे में बताया था। हालांकि उसने उनकी शिकायत सुनने के बजाय उनके साथ ही दुर्व्यवहार किया। हालांकि हादसे के समय खुद रवींद्र भी वार्ड में ही बच्चों को टीकाकरण कर रही थी।
नवजात के पिता ने रिपोर्ट पर उठाए सवाल, बोले, आज तक हमको नहीं दी सीटी स्कैन की रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट बारे में जब मृत बच्चे के पिता विनोद से बात की गई तो उसने इस रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। विनोद के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने आज तक उसे नवजात के सीटी स्कैन की रिपोर्ट मुहैया नहीं कराई है। इसके अलावा उसने अस्पताल प्रशासन पर नवजात की झूठी रिपोर्टें पेश करने का भी आरोप लगाया।
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डॉ. आरसी गोयल रिटायरमेंट के बाद से अस्पताल में ही अनुबंध आधार पर काम कर रहे थे। इसके अलावा महिला वार्ड की मेंटिनेंस ड्यूटी संभालने वाली नर्सिंग सिस्टर रवींद्र कौर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की गई है। दूसरी ओर रिपोर्ट में नवजात की मौत के बिल्कुल सटीक कारण बताने से भी जांच कमेटी ने परहेज किया है क्योंकि बच्चे का शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था।
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बुधवार को अपने कार्यालय में सीएमओ डॉ. अशोक चौधरी ने एक पत्रकार वार्ता में बताया कि जांच कमेटी ने सभी तथ्यों की पूरी पड़ताल करने के बाद अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने बताया कि चार सदस्यीय जांच कमेटी में डॉ. ओपी दहमीवाल, डॉ. सुनीता सोखी, डॉ. गिरीश और डॉ. सुभाष शामिल थे। कमेटी ने अस्पताल से जुड़े तकरीबन 9 लोगों, जिनमें चिकित्सक और स्टाफ नर्सें शामिल थीं, उनसे पूछताछ की। इसके अलावा जांच कमेटी ने जिंदल अस्पताल के चिकित्सकों से भी नवजात की तत्कालीन स्थिति का जायजा लिया। गौरतलब है कि 2 अगस्त की देर रात 2 बजे बच्चे की जिंदल अस्पताल में ही इलाज के दौरान मौत हो गई थी। जांच रिपोर्ट में कमेटी ने बच्चे की मौत का कारण कोई हादसे के कारण लगी चोटें ना बताकर गंभीर इंफेक्शन के चलते बताया है। हालांकि खुद जांच कमेटी ने पोस्टमार्टम नहीं होने से इस कारण को सटीक नहीं बताया है।
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हादसे वाली रात रात पौने नौ बजे ही ड्यूटी से चले गए थे डॉ. गोयल
जांच कमेटी ने नवजात की मौत का कारण तो इंफेक्शन ही बताया है लेकिन उन्होंने अपनी जांच में उस समय ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. आरसी गोयल को भी गंभीर लापरवाही का दोषी पाया है। जांच में खुलासा हुआ है कि हादसे की रात पौने 9 बजे ही डॉ. गोयल घर चले गए थे जबकि उनको रातभर वहीं रुकना था। इसके अलावा रात 12 बजे जब हादसा हुआ तो वह रात 12:45 बजे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने इस दौरान बच्चे की हालत के बारे में ना तो नवजात के माता-पिता को बताया और ना ही उनके बाद ड्यूटी पर आने वाले डॉ. मानव सेठी को। डॉ. आरसी गोयल पर यह भी आरोप है कि सुबह अपनी ड्यूटी खत्म करने के दौरान भी वह डॉ. मानव सेठी को केस हिस्ट्री हैंडओवर करके नहीं गए थे, जो कि अत्यंत आवश्यक होता है।
दुर्व्यवहार के आरोप झेलने वाली नर्स को मिला संदेह का लाभ
हादसे की रात ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स रवींद्र पर नवजात के पिता ने आरोप लगाए थे कि उनको उसने छत की खराब हालत के बारे में बताया था। हालांकि उसने उनकी शिकायत सुनने के बजाय उनके साथ ही दुर्व्यवहार किया। हालांकि हादसे के समय खुद रवींद्र भी वार्ड में ही बच्चों को टीकाकरण कर रही थी।
नवजात के पिता ने रिपोर्ट पर उठाए सवाल, बोले, आज तक हमको नहीं दी सीटी स्कैन की रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट बारे में जब मृत बच्चे के पिता विनोद से बात की गई तो उसने इस रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। विनोद के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने आज तक उसे नवजात के सीटी स्कैन की रिपोर्ट मुहैया नहीं कराई है। इसके अलावा उसने अस्पताल प्रशासन पर नवजात की झूठी रिपोर्टें पेश करने का भी आरोप लगाया।