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पिरथला के पूर्व सरपंच मनरेगा के कामों में गबन का आरोप
fatehabad
Updated Thu, 18 Aug 2016 01:45 AM IST
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गांव पिरथला के पूर्व सरपंच पर लगभग डेढ़ लाख रुपये के गबन के आरोप में कार्यवाही के लिए खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी द्वारा उपायुक्त को एक पत्र भेजा गया है। उपायुक्त को 8 अगस्त को भेजे पत्र क्रमांक 2512 में खंड विकास अधिकारी ने बताया है कि वर्ष 2005 से 2015 के पंचायती प्लान में पूर्व सरपंच छबील, संबधित पंचायती राज जेई भूप सिंह, जेई ओमप्रकाश, मनरेगा जेई ओमप्रकाश भाटिया, पंचायती राज सचिव धर्मपाल, श्यामलाल, राजकुमार, सुरेंद्र ने सरकारी ग्रांट का जाली दस्तावेजों के आधार पर गबन कर लिया।
ये गड़बड़ियां मिली हैं काम में
उपायुक्त को भेजे पत्र में बीडीपीओ नेे गड़बड़ियों का जिक्र किया है। उनकी मानें तो गांव में मनरेगा के तहत गली और नालों के निर्माण में मिस्त्री की मजदूरी 330 रुपये प्रति दिन जबकि मजदूर की मजदूरी 235 रुपये के हिसाब से दिखाई गई है। जबकि उन्हें 191 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से उन्हें मजदूरी दी गई है। नायक चौपाल, पशु अस्पताल और मनरेगा स्कीम के तहत कराए गए कार्यों के संबधित मस्टर रोल, पैमाइश पुस्तिका, एमआईएस की जांच करने पर पाया गया कि यह काम मनरेगा नियमों के अनुसार नहीं कराए गए हैं। जिसमें मस्टर-रोल पर मेट, ग्राम सचिव, सरपंच व संबधित अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होना उनकी लापरवाही प्रतीत होती है। गंदे पानी के जोहड़ की खुदाई 1 अगस्त 1010 से 16 अगस्त 2011 तक मनरेगा में रमेश और वीरपाल के फर्जी अंगूठा लगाए गए है।
शिकायत में बताया कि गांव में सामान्य चौपाल बिश्नोई का फर्श व शौचालय आदि निर्माण कार्य में बल्लूराम नामक मिस्त्री का नाम दिखाया गया है जबकि बल्लूराम नाम का गांव में कोई आदमी ही नहीं है। जून 2014 में रविदास चौपाल में मस्टर-रोल के दस और ग्यारह नंबर पर किसी मजदूर का नाम नहीं है और 6864 रुपये मजदूरी दी गई है। अप्रैल 2015 में भी गांव की गली के निर्माण में काला नाम का मिस्त्री दिखाया गया है जबकि इस नाम का भी गांव में कोई मिस्त्री नहीं मिला। चंद्र के नाम से 28 अक्तूबर की 28724 रुपये और 15 अगस्त को 3000 रुपये की चंद्र के नाम से रसीद काटी गई है। इन रसीदों का कोई नंबर भी नहीं है न ही चंद्र का कोई साइन या अंगूठा दिखाया गया है।
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पूर्व सरपंच ने 23 अप्रैल को वाटर टैंक बनवाया। इसकी रसीद भी काटी गई। जबकि यह ग्राम पंचायत के दायरे से बाहर है और यह गांव बोस्ती की जमीन पर बनाया गया है। मनरेगा के तहत 1 जुलाई 2011 से 16 जुलाई तक तालाब से गंदे पानी निकालने के लिए 104 मजदूरों के फर्जी अंगूठा लगाए गए हैं। इसमें मेट और सरपंच के हस्ताक्षर और मोहर नहीं हैं। ऐसे में इन कामों में लाखों का घोटाला जाहिर होता है। इसी तरह कई अन्य निर्माण कार्यों में धांधली की कुल राशि एक लाख 47 हजार 119 रुपये का गबन पाया गया है।
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ये गड़बड़ियां मिली हैं काम में
उपायुक्त को भेजे पत्र में बीडीपीओ नेे गड़बड़ियों का जिक्र किया है। उनकी मानें तो गांव में मनरेगा के तहत गली और नालों के निर्माण में मिस्त्री की मजदूरी 330 रुपये प्रति दिन जबकि मजदूर की मजदूरी 235 रुपये के हिसाब से दिखाई गई है। जबकि उन्हें 191 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से उन्हें मजदूरी दी गई है। नायक चौपाल, पशु अस्पताल और मनरेगा स्कीम के तहत कराए गए कार्यों के संबधित मस्टर रोल, पैमाइश पुस्तिका, एमआईएस की जांच करने पर पाया गया कि यह काम मनरेगा नियमों के अनुसार नहीं कराए गए हैं। जिसमें मस्टर-रोल पर मेट, ग्राम सचिव, सरपंच व संबधित अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होना उनकी लापरवाही प्रतीत होती है। गंदे पानी के जोहड़ की खुदाई 1 अगस्त 1010 से 16 अगस्त 2011 तक मनरेगा में रमेश और वीरपाल के फर्जी अंगूठा लगाए गए है।
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शिकायत में बताया कि गांव में सामान्य चौपाल बिश्नोई का फर्श व शौचालय आदि निर्माण कार्य में बल्लूराम नामक मिस्त्री का नाम दिखाया गया है जबकि बल्लूराम नाम का गांव में कोई आदमी ही नहीं है। जून 2014 में रविदास चौपाल में मस्टर-रोल के दस और ग्यारह नंबर पर किसी मजदूर का नाम नहीं है और 6864 रुपये मजदूरी दी गई है। अप्रैल 2015 में भी गांव की गली के निर्माण में काला नाम का मिस्त्री दिखाया गया है जबकि इस नाम का भी गांव में कोई मिस्त्री नहीं मिला। चंद्र के नाम से 28 अक्तूबर की 28724 रुपये और 15 अगस्त को 3000 रुपये की चंद्र के नाम से रसीद काटी गई है। इन रसीदों का कोई नंबर भी नहीं है न ही चंद्र का कोई साइन या अंगूठा दिखाया गया है।
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पूर्व सरपंच ने 23 अप्रैल को वाटर टैंक बनवाया। इसकी रसीद भी काटी गई। जबकि यह ग्राम पंचायत के दायरे से बाहर है और यह गांव बोस्ती की जमीन पर बनाया गया है। मनरेगा के तहत 1 जुलाई 2011 से 16 जुलाई तक तालाब से गंदे पानी निकालने के लिए 104 मजदूरों के फर्जी अंगूठा लगाए गए हैं। इसमें मेट और सरपंच के हस्ताक्षर और मोहर नहीं हैं। ऐसे में इन कामों में लाखों का घोटाला जाहिर होता है। इसी तरह कई अन्य निर्माण कार्यों में धांधली की कुल राशि एक लाख 47 हजार 119 रुपये का गबन पाया गया है।