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Gonda News: एफआईआर छिपाकर चरित्र प्रमाणपत्र जारी कराने में पुलिसकर्मियों की जांच शुरू
Tue, 25 Aug 2026 11:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 25 Aug 2026 11:27 PM IST
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गोंडा। एफआईआर की जानकारी छिपाकर चरित्र प्रमाणपत्र जारी कराने के मामले में तत्कालीन उपनिरीक्षक अखिलेश पांडेय और पूर्व प्रभारी निरीक्षक मोतीगंज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अपर जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में दोनों को प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने के बाद डीएम प्रियंका निरंजन के निर्देश पर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। एएसपी (पश्चिमी) राधेश्याम राय ने बताया कि मामले की जांच सीओ सदर को सौंपी गई है।
मामला मोतीगंज थाना क्षेत्र के पवन कुमार से जुड़ा है। पवन कुमार ने सीतापुर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का टेंडर लेने के लिए चरित्र प्रमाणपत्र लगाया था। इसके बाद शिकायत होने पर मामले की जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि पवन कुमार के खिलाफ वर्ष 2021 में मोतीगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बावजूद 13 जून 2025 की पुलिस सत्यापन आख्या में उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज या लंबित नहीं होने की रिपोर्ट दी गई। इसी आधार पर तीन जुलाई 2025 को उसके पक्ष में चरित्र प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि पवन कुमार ने चरित्र प्रमाणपत्र के लिए दिए शपथपत्र में अपने खिलाफ कोई आपराधिक वाद दर्ज नहीं होने की घोषणा की थी। अपर जिलाधिकारी की जांच में एफआईआर का तथ्य मिलने के बाद डीएम ने पवन कुमार के पक्ष में जारी चरित्र प्रमाणपत्र निरस्त करते हुए विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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पुलिस रिपोर्ट में भी मिली गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि थाने की अपराध पंजिका अपडेट नहीं होने के कारण पवन कुमार के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट का सत्यापन में उल्लेख नहीं किया गया। इसी आधार पर गलत आख्या भेजी गई। मामले में तत्कालीन उपनिरीक्षक अखिलेश पांडेय और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध पाए जाने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। मोतीगंज थानाध्यक्ष तेज नारायण गुप्ता ने बताया कि पुराना मामला है, प्रकरण में अधिकारियों ने जानकारी मांगी थी। उसे भेज दी गई है।
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मामला मोतीगंज थाना क्षेत्र के पवन कुमार से जुड़ा है। पवन कुमार ने सीतापुर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का टेंडर लेने के लिए चरित्र प्रमाणपत्र लगाया था। इसके बाद शिकायत होने पर मामले की जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि पवन कुमार के खिलाफ वर्ष 2021 में मोतीगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बावजूद 13 जून 2025 की पुलिस सत्यापन आख्या में उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज या लंबित नहीं होने की रिपोर्ट दी गई। इसी आधार पर तीन जुलाई 2025 को उसके पक्ष में चरित्र प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
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जांच में यह भी सामने आया कि पवन कुमार ने चरित्र प्रमाणपत्र के लिए दिए शपथपत्र में अपने खिलाफ कोई आपराधिक वाद दर्ज नहीं होने की घोषणा की थी। अपर जिलाधिकारी की जांच में एफआईआर का तथ्य मिलने के बाद डीएम ने पवन कुमार के पक्ष में जारी चरित्र प्रमाणपत्र निरस्त करते हुए विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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पुलिस रिपोर्ट में भी मिली गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि थाने की अपराध पंजिका अपडेट नहीं होने के कारण पवन कुमार के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट का सत्यापन में उल्लेख नहीं किया गया। इसी आधार पर गलत आख्या भेजी गई। मामले में तत्कालीन उपनिरीक्षक अखिलेश पांडेय और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध पाए जाने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। मोतीगंज थानाध्यक्ष तेज नारायण गुप्ता ने बताया कि पुराना मामला है, प्रकरण में अधिकारियों ने जानकारी मांगी थी। उसे भेज दी गई है।