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गांव भोडिय़ाखेड़ा के पूर्व सरपंच व ग्राम सचिव को एक-एक साल की कैद
Updated Sat, 25 Nov 2017 01:10 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
ग्राम पंचायत के सरकारी रिकार्ड में छेड़छाड़ करने के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने गांव भोड़ियाखेड़ा के पूर्व सरपंच जयसिंह व ग्राम सचिव विजेन्द्र को एक-एक साल की कैद की सजा सुनाई है। आरोप है कि उक्त लोगों ने गांव के बाप-बेटे को आर्थिक नुक्सान पहुंचाने के लिए पंचायत के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की थी। आरटीआई से खुलासा होने के बाद यह मामला अदालत में लाया गया था।
इस संबंध में गांव भोड़ियाखेड़ा के चंद्रभान नारंग एडवोकेट ने अदालत में याचिका दायर कर पूर्व सरपंच जयसिंह व ग्राम सचिव विजेन्द्र के खिलाफ सरकारी कागजों से छेड़छाड़ व धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। याचिका में बताया गया था कि भोड़ियाखेड़ा बस स्टैंड पर उनके पिता रामकिशन की एक मरला व उनके भाई सुंदर लाल की 2 मरला में दुकान है। यह दुकानें पंचायती जमीन पर बनी हैं। पंचायती जमीन पर काबिज पिता-पुत्र ने डीडीपीओ की कोर्ट में दावा डाला।
डीडीपीओ ने वर्ष 2000 में फैसला सुनाकर कहा कि अगर पंचायत चाहे तो जमीन की कीमत वसूल कर रजिस्ट्री करवा दे। तत्कालीन उपायुक्त ने जमीन का रेट भी तय कर दिया। 2005 में तत्कालीन पंचायत ने भी रामकिशन व सुंदर को जमीन अलाट करने बारे सहमति दे दी, लेकिन वर्ष 2012 में तत्कालीन सरपंच जयसिंह को यह डील जची नहीं। उन्होंने सिविल कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर व मैंबर पंचायतों और अपने हस्ताक्षर कर प्रस्ताव पारित किया। जिसके तहत पिछली पंचायतों के प्रस्ताव को रद्द कर दिया और रेजुलेशन की कॉपी बीडीपीओ, डीडीपीओ व कोर्ट में पेश कर कहा कि पंचायत यह जमीन पिता-पुत्रों को अलाट नहीं करना चाहती।
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रामकिशन के बेटे चंद्रभान नारंग ने इस रेजुलेशन को कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि पंचायत तीन चौथाई बहुमत से कम पिछली पंचायत का प्रस्ताव रद्द नहीं कर सकती। इसलिए कम से कम 15 पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षर चाहिए थे, जबकि इस प्रस्ताव पर मात्र 10 के हस्ताक्षर हैं। आरोप है कि जब चन्द्रभान एडवोकेट ने यह मुद्दा उठाया तो सरपंच व ग्राम सचिव ने उसे रेजुलेशन पर बाकी की पंचायत मेंबरों के भी बैक डेट में हस्ताक्षर करवा लिए। मगर उनसे एक गलती हो गई थी कि वह पहले डाले गए रेजुलेशन की कॉपी बीडीपीओ, डीडीपीओ व कोर्ट में दे चुके थे।
चन्द्रभान ने आरटीआई लगाकर बीडीपीओ ऑफिस से कापी निकलवा ली, जिसमें 9 मेंबरों व एक सरपंच के ही हस्ताक्षर थे। आरटीआई से मिली जानकारी के बाद चन्द्रभान ने कोर्ट में शिकायत दी कि सरपंच व ग्राम सचिव ने उन्हें नुक्सान पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की। अदालत ने सरपंच व ग्राम सचिव को रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का दोषी माना, लेकिन धोखाधड़ी का दोषी नहीं ठहराया था। अदालत ने दोनों को एक-एक साल की कैद की सजा सुनाई है।
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फतेहाबाद।
ग्राम पंचायत के सरकारी रिकार्ड में छेड़छाड़ करने के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने गांव भोड़ियाखेड़ा के पूर्व सरपंच जयसिंह व ग्राम सचिव विजेन्द्र को एक-एक साल की कैद की सजा सुनाई है। आरोप है कि उक्त लोगों ने गांव के बाप-बेटे को आर्थिक नुक्सान पहुंचाने के लिए पंचायत के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की थी। आरटीआई से खुलासा होने के बाद यह मामला अदालत में लाया गया था।
इस संबंध में गांव भोड़ियाखेड़ा के चंद्रभान नारंग एडवोकेट ने अदालत में याचिका दायर कर पूर्व सरपंच जयसिंह व ग्राम सचिव विजेन्द्र के खिलाफ सरकारी कागजों से छेड़छाड़ व धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। याचिका में बताया गया था कि भोड़ियाखेड़ा बस स्टैंड पर उनके पिता रामकिशन की एक मरला व उनके भाई सुंदर लाल की 2 मरला में दुकान है। यह दुकानें पंचायती जमीन पर बनी हैं। पंचायती जमीन पर काबिज पिता-पुत्र ने डीडीपीओ की कोर्ट में दावा डाला।
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डीडीपीओ ने वर्ष 2000 में फैसला सुनाकर कहा कि अगर पंचायत चाहे तो जमीन की कीमत वसूल कर रजिस्ट्री करवा दे। तत्कालीन उपायुक्त ने जमीन का रेट भी तय कर दिया। 2005 में तत्कालीन पंचायत ने भी रामकिशन व सुंदर को जमीन अलाट करने बारे सहमति दे दी, लेकिन वर्ष 2012 में तत्कालीन सरपंच जयसिंह को यह डील जची नहीं। उन्होंने सिविल कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर व मैंबर पंचायतों और अपने हस्ताक्षर कर प्रस्ताव पारित किया। जिसके तहत पिछली पंचायतों के प्रस्ताव को रद्द कर दिया और रेजुलेशन की कॉपी बीडीपीओ, डीडीपीओ व कोर्ट में पेश कर कहा कि पंचायत यह जमीन पिता-पुत्रों को अलाट नहीं करना चाहती।
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रामकिशन के बेटे चंद्रभान नारंग ने इस रेजुलेशन को कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि पंचायत तीन चौथाई बहुमत से कम पिछली पंचायत का प्रस्ताव रद्द नहीं कर सकती। इसलिए कम से कम 15 पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षर चाहिए थे, जबकि इस प्रस्ताव पर मात्र 10 के हस्ताक्षर हैं। आरोप है कि जब चन्द्रभान एडवोकेट ने यह मुद्दा उठाया तो सरपंच व ग्राम सचिव ने उसे रेजुलेशन पर बाकी की पंचायत मेंबरों के भी बैक डेट में हस्ताक्षर करवा लिए। मगर उनसे एक गलती हो गई थी कि वह पहले डाले गए रेजुलेशन की कॉपी बीडीपीओ, डीडीपीओ व कोर्ट में दे चुके थे।
चन्द्रभान ने आरटीआई लगाकर बीडीपीओ ऑफिस से कापी निकलवा ली, जिसमें 9 मेंबरों व एक सरपंच के ही हस्ताक्षर थे। आरटीआई से मिली जानकारी के बाद चन्द्रभान ने कोर्ट में शिकायत दी कि सरपंच व ग्राम सचिव ने उन्हें नुक्सान पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की। अदालत ने सरपंच व ग्राम सचिव को रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का दोषी माना, लेकिन धोखाधड़ी का दोषी नहीं ठहराया था। अदालत ने दोनों को एक-एक साल की कैद की सजा सुनाई है।