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Fatehabad News: उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को ब्याज सहित 15 लाख रुपये की बीमा राशि देने के दिए आदेश
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फतेहाबाद। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर 11 हजार रुपये हर्जाना व 15 लाख रुपये की बीमा राशि सात प्रतिशत ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। जानकारी के अनुसार गांव जमालपुर शेखां निवासी पूनम रानी ने उपभोक्ता निवारण आयोग में दी शिकायत में बताया था कि उनकी एक्टिवा का बीमा उन्होंने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से करवाया हुआ था। स्कूटी के साथ मालिक का 15 लाख रुपये का जीवन बीमा भी था।
इसके लिए उन्होंने 250 रुपये के अतिरिक्त प्रीमियम का भी भुगतान किया था। बीमा अवधि के दौरान शिकायतकर्ता महिला के पति बलविंद्र सिंह 15 मई 2020 को स्कूटी पर कहीं जा रहे थे तो एक अन्य वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान 16 दिन बाद 31 मई 2020 को बलविंद्र सिंह की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद जब उन्होंने बीमा कंपनी को सारे दस्तावेज जमा करवा कर 15 लाख रुपये की जीवन बीमा राशि की मांग की तो कंपनी ने देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद महिला ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राजबीर सिंह, सदस्य हरीश मेहता व केएस निराणियां ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी को दोषी माना है।
आयोग ने बीमा कंपनी को 15 लाख रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने व 11 हजार रुपये हर्जाने के रूप में देने के आदेश दिए हैं। यदि कंपनी उपभोक्ता को यह राशि 45 दिन के अंतराल में नहीं देती तो कंपनी को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से भुगतान करना होगा।
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इसके लिए उन्होंने 250 रुपये के अतिरिक्त प्रीमियम का भी भुगतान किया था। बीमा अवधि के दौरान शिकायतकर्ता महिला के पति बलविंद्र सिंह 15 मई 2020 को स्कूटी पर कहीं जा रहे थे तो एक अन्य वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान 16 दिन बाद 31 मई 2020 को बलविंद्र सिंह की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद जब उन्होंने बीमा कंपनी को सारे दस्तावेज जमा करवा कर 15 लाख रुपये की जीवन बीमा राशि की मांग की तो कंपनी ने देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद महिला ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राजबीर सिंह, सदस्य हरीश मेहता व केएस निराणियां ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी को दोषी माना है।
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आयोग ने बीमा कंपनी को 15 लाख रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने व 11 हजार रुपये हर्जाने के रूप में देने के आदेश दिए हैं। यदि कंपनी उपभोक्ता को यह राशि 45 दिन के अंतराल में नहीं देती तो कंपनी को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से भुगतान करना होगा।
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