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Fatehabad News: ग्रामीण रूट पर नहीं बढ़ रहे बसों के फेरे, निजी वाहनों के सहारे लोग
Sun, 18 Jan 2026 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 18 Jan 2026 11:42 PM IST
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शहर के पुराना बस स्टैंड के बाहर ग्रामीण रूट पर जाने वाले बस स्टॉप पर खड़े यात्री। संवाद
फतेहाबाद। जिले में बसों की संख्या पूरी होने के बावजूद कई ग्रामीण रूटों पर रोडवेज बसों की भारी कमी से आवागमन व्यवस्था चरमरा गई है। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में पूरे दिन में केवल एक बार ही बस पहुंचती है। इसका सीधा असर छात्रों, कर्मचारियों और आम ग्रामीणों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर गंतव्य तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
जिले के आसपास और दूरदराज क्षेत्रों के कई गांवों में सुबह एक बस आती है, उसके बाद पूरे दिन सड़कें सूनी रहती हैं। यदि कोई ग्रामीण उस एकमात्र बस में सवार नहीं हो पाता, तो उसे निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे न केवल खर्च बढ़ रहा है, बल्कि जोखिम भी लगातार बना हुआ है।
रोडवेज बसों की कमी का लाभ निजी वाहन चालकों को मिल रहा है। ग्रामीण राजेश, सुनील, सुरेंद्र, दलबीर और रवि ने बताया कि मजबूरी में ऑटो और अन्य लोडिंग वाहनों में सफर करना पड़ता है। इन वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। निजी वाहनों पर रोजाना 20 से 50 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।
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मताना, मेहूवाला, मानावाली, चनकोठी, ढाणी ढोबा सहित कई गांव ऐसे हैं, जहां रोडवेज रूट या तो बेहद सीमित हैं या पूरी तरह बंद हैं। निजी वाहन चालक सवारी भरने इंतजार में घंटों खड़े रहते हैं, जिससे लोगों का समय भी बर्बाद हो रहा है। रोडवेज महाप्रबंधक महेंद्र का कहना है कि सभी गांवों तक बस सेवा पहुंचाने प्रयास जारी हैं और किसी भी क्षेत्र में समस्या नहीं रहने दी जाएगी।
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जिले के आसपास और दूरदराज क्षेत्रों के कई गांवों में सुबह एक बस आती है, उसके बाद पूरे दिन सड़कें सूनी रहती हैं। यदि कोई ग्रामीण उस एकमात्र बस में सवार नहीं हो पाता, तो उसे निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे न केवल खर्च बढ़ रहा है, बल्कि जोखिम भी लगातार बना हुआ है।
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रोडवेज बसों की कमी का लाभ निजी वाहन चालकों को मिल रहा है। ग्रामीण राजेश, सुनील, सुरेंद्र, दलबीर और रवि ने बताया कि मजबूरी में ऑटो और अन्य लोडिंग वाहनों में सफर करना पड़ता है। इन वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। निजी वाहनों पर रोजाना 20 से 50 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।
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मताना, मेहूवाला, मानावाली, चनकोठी, ढाणी ढोबा सहित कई गांव ऐसे हैं, जहां रोडवेज रूट या तो बेहद सीमित हैं या पूरी तरह बंद हैं। निजी वाहन चालक सवारी भरने इंतजार में घंटों खड़े रहते हैं, जिससे लोगों का समय भी बर्बाद हो रहा है। रोडवेज महाप्रबंधक महेंद्र का कहना है कि सभी गांवों तक बस सेवा पहुंचाने प्रयास जारी हैं और किसी भी क्षेत्र में समस्या नहीं रहने दी जाएगी।