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Fatehabad News: साढ़े चार लाख में बिकी भैंस, डेढ़ लाख रुपये में भैंसा
Sun, 20 Sep 2026 10:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 20 Sep 2026 10:22 PM IST
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अयाल्की पशु मेले में बिक्री के लिए पहुंचे पशु। संवाद
फतेहाबाद। गांव अयाल्की में रविवार को लगे पशु मेले में मुर्राह नस्ल की भैंस साढ़े चार लाख रुपये में बिकी। वहीं बजरंगी नस्ल का भैंसा डेढ़ लाख रुपये में बिका। मेले में करीब 800 पशु पहुंचे और लगभग 600 पशुओं की बिक्री हुई। इस आयोजन से करीब नौ लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
लंपी वायरस के चलते मेले में गायों की एंट्री बंद रही। इसके बावजूद भैंस और भैंसों की खरीद-बिक्री में पशुपालकों और व्यापारियों ने खूब रुचि दिखाई। दोबारा शुरू होने के बाद रविवार को मेले का तीसरा आयोजन हुआ। पहले दो आयोजनों की तुलना में इस बार पशुओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब सहित आसपास के क्षेत्रों से पशुपालक और पशु व्यापारी मेले में पहुंचे। मेले में अलग-अलग नस्लों की भैंसें, झोटे और अन्य पशु बिक्री के लिए लाए गए। पशुपालकों ने बताया कि मेला फिर शुरू होने से उन्हें पशुओं की बिक्री के लिए दूर-दराज के बाजारों में जाने की जरूरत कम हुई है।
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स्थानीय स्तर पर ही खरीदार और व्यापारी मिल रहे हैं। वहीं, गोवंश में फैले लंपी वायरस के चलते मेले में गाय की एंट्री बंद रही। एंट्री बंद होने से गायों का व्यापार करने वाले पशु व्यापारी व पशुपालक बीमारी ठीक होने के इंतजार में है।
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महंगे पशुओं की बिक्री से बढ़ा उत्साह
मेले में पशुओं की एंट्री फीस 300 रुपये निर्धारित है। पशु बाहर ले जाने पर 1200 रुपये एग्जिट फीस ली जाती है। रविवार के आयोजन से करीब नौ लाख रुपये का राजस्व मिला। साढ़े चार लाख रुपये में बिकी मुर्राह नस्ल की भैंस मेले का सबसे महंगा पशु रही। बजरंगी नस्ल का भैंसा भी डेढ़ लाख रुपये में बिका। महंगे पशुओं की बिक्री से पशुपालकों और व्यापारियों में उत्साह नजर आया। उन्हें अच्छी बिक्री से मुनाफे की उम्मीद है।
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तीन आयोजनों में लगातार बढ़ी पशुओं की संख्या
अयाल्की पशु मेला परिसर में बाढ़ का पानी भरने के कारण करीब साढ़े तीन साल तक मेला बंद रहा। दोबारा शुरू होने के बाद पिछले तीन रविवार को लगातार आयोजन हुए। पहले रविवार को करीब 300 पशु पहुंचे थे। दूसरे रविवार को संख्या बढ़कर 450 हो गई। तीसरे रविवार को करीब 800 पशु पहुंचे। इनमें से लगभग 600 पशुओं की बिक्री हुई। व्यापारी फिराक खान, स्वराज सिंह और लवली गोयल ने बताया कि हर रविवार पशुओं की संख्या बढ़ रही है। उनके अनुसार आने वाले आयोजनों में भी पशुपालकों और व्यापारियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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:: पशु व्यापार से जुड़े लोगों को कारोबार का नया अवसर मिला है। मेले में बढ़ती पशुओं की संख्या को देखते हुए इसके नियमित रूप से बड़ा व्यापारिक केंद्र बनने की उम्मीद है। मेले में आने वाले व्यापारियों, पशुपालकों व पशुओं के लिए छांव पेयजल आदि की व्यवस्था की गई है।
- राम सिंह, ठेकेदार पशु मेला अयाल्की।
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लंपी वायरस के चलते मेले में गायों की एंट्री बंद रही। इसके बावजूद भैंस और भैंसों की खरीद-बिक्री में पशुपालकों और व्यापारियों ने खूब रुचि दिखाई। दोबारा शुरू होने के बाद रविवार को मेले का तीसरा आयोजन हुआ। पहले दो आयोजनों की तुलना में इस बार पशुओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई।
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राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब सहित आसपास के क्षेत्रों से पशुपालक और पशु व्यापारी मेले में पहुंचे। मेले में अलग-अलग नस्लों की भैंसें, झोटे और अन्य पशु बिक्री के लिए लाए गए। पशुपालकों ने बताया कि मेला फिर शुरू होने से उन्हें पशुओं की बिक्री के लिए दूर-दराज के बाजारों में जाने की जरूरत कम हुई है।
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स्थानीय स्तर पर ही खरीदार और व्यापारी मिल रहे हैं। वहीं, गोवंश में फैले लंपी वायरस के चलते मेले में गाय की एंट्री बंद रही। एंट्री बंद होने से गायों का व्यापार करने वाले पशु व्यापारी व पशुपालक बीमारी ठीक होने के इंतजार में है।
महंगे पशुओं की बिक्री से बढ़ा उत्साह
मेले में पशुओं की एंट्री फीस 300 रुपये निर्धारित है। पशु बाहर ले जाने पर 1200 रुपये एग्जिट फीस ली जाती है। रविवार के आयोजन से करीब नौ लाख रुपये का राजस्व मिला। साढ़े चार लाख रुपये में बिकी मुर्राह नस्ल की भैंस मेले का सबसे महंगा पशु रही। बजरंगी नस्ल का भैंसा भी डेढ़ लाख रुपये में बिका। महंगे पशुओं की बिक्री से पशुपालकों और व्यापारियों में उत्साह नजर आया। उन्हें अच्छी बिक्री से मुनाफे की उम्मीद है।
तीन आयोजनों में लगातार बढ़ी पशुओं की संख्या
अयाल्की पशु मेला परिसर में बाढ़ का पानी भरने के कारण करीब साढ़े तीन साल तक मेला बंद रहा। दोबारा शुरू होने के बाद पिछले तीन रविवार को लगातार आयोजन हुए। पहले रविवार को करीब 300 पशु पहुंचे थे। दूसरे रविवार को संख्या बढ़कर 450 हो गई। तीसरे रविवार को करीब 800 पशु पहुंचे। इनमें से लगभग 600 पशुओं की बिक्री हुई। व्यापारी फिराक खान, स्वराज सिंह और लवली गोयल ने बताया कि हर रविवार पशुओं की संख्या बढ़ रही है। उनके अनुसार आने वाले आयोजनों में भी पशुपालकों और व्यापारियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
:: पशु व्यापार से जुड़े लोगों को कारोबार का नया अवसर मिला है। मेले में बढ़ती पशुओं की संख्या को देखते हुए इसके नियमित रूप से बड़ा व्यापारिक केंद्र बनने की उम्मीद है। मेले में आने वाले व्यापारियों, पशुपालकों व पशुओं के लिए छांव पेयजल आदि की व्यवस्था की गई है।
- राम सिंह, ठेकेदार पशु मेला अयाल्की।

अयाल्की पशु मेले में बिक्री के लिए पहुंचे पशु। संवाद