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Fatehabad News: बासमती धान में बकानी रोग, किसी भी दवा से नहीं जाता प्रकोप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jul 2024 11:59 PM IST
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Bakani disease in Basmati paddy, outbreak does not go away with any medicine
कुलां क्षेत्र में धान की फसल दिखाते हुए किसान
कुलां। धान की फसल में बकानी रोग का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इस बीमारी में धान के कुछ पौधे अचानक लंबे होकर सूख जाते हैं। ये पौधे आसपास के अच्छे पौधों को जल्द प्रभावित करते हैं। ऐसे में इन पौधों को उखाड़ कर खेत से बाहर कर देना चाहिए। कृषि विशेषज्ञ मुताबिक बकानी एक बीज जनित रोग है। ये रोग पूसा बासमती 1509 और पूसा बासमती 1121 में अधिक देखने को मिलता है। क्षेत्र के गांव नन्हेडी में किसान जरनैल सिंह के खेतों में रोपाई बासमती फसल में बकानी रोग दिखाई दिया है। जिससे किसान असमंजस में है कि आखिर इस रोग का क्या उपाय किया जाए।
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टोहाना खंड कृषि अधिकारी मुकेश कुमार महला ने बताया कि बकानी रोग को खत्म करने के लिए कई बार किसान रसायनिक दवाओं का प्रयोग करते हैं, जबकि ये रोग दवाओं से खत्म नहीं होता है। ऐसी स्थिति में इसका उपचार सिर्फ रोग प्रभावित पौधों को उखाड़ कर बाहर करना ही मात्र है। बकानी रोग से प्रभावित पौधे खेत में आसानी से नजर आ जाते हैं। इस रोग से प्रभावित पौधे बाकी फसल से काफी लंबे होते हैं।
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बारिश कम होने से धान फसल में पत्ता लपेट सुंडी प्रकोप के आसार
इस बार मानसूनी बारिश सामान्य से बेहद कम दर्ज की गई है। जिससे धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के आसार है। आने वाले समय में धान की फसल में पत्ता लपेट सुंडी का प्रकोप पड़ सकता है। इस रोग में कीड़ा पत्ते पर लिपट कर उसके अंदर छिप जाता है और फसल को चूसता रहता है। जिससे फसल की पैदावार रुक जाती है। यह रोग लगने पर धान के पौधे के पत्ते लिपटे हुए मिलते हैं। इस रोग के उपचार के लिए प्रति एकड़ 7.5 किलोग्राम कारटाप हाइड्रोक्लोरिड या 7.5 किलोग्राम फिप्रोनिल का छिड़काव करें। कृषि विशेषज्ञ की परामर्श है कि यदि यह रोग नज़र आएं तो किसान फसल में अधिक रसायन का प्रयोग न करें। रसायन के अधिक प्रयोग से लागत बढ़ जाएगी, जबकि पैदावार नहीं बढ़ पाएगी।
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