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Fatehabad News: बड़ोपल की लड़कियों में हॉकी की नई रोशनी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Nov 2025 11:49 PM IST
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A new light of hockey among the girls of Baropal
गांव बड़ोपल में खेलनी वाली टीम का फोटो। कोच
फतेहाबाद। गांव बड़ोपल में हॉकी कोच राजबाला ने बच्चों, विशेषकर लड़कियों में खेल के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास की नई अलख जगा दी है। उनके मार्गदर्शन में अब गांव के मैदान में नियमित रूप से 70 से 80 लड़कियां हॉकी का अभ्यास कर रही हैं।
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बड़ोपल का यह मैदान अब बेटियों के सपनों की नर्सरी बन गया है। कोच राजबाला की प्रेरणा से लड़कियों ने परंपरागत चहारदीवारी और घरेलू कामों से हटकर हॉकी स्टिक थाम ली है। राजबाला स्वयं एक खिलाड़ी रही हैं और खेल के महत्व को बखूबी समझती हैं। उन्होंने लड़कियों को घरों से बाहर लाकर शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए खेल से जोड़ा।
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राजबाला की यह पहल न केवल बड़ोपल बल्कि आस-पास के गांवों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। उनके इस प्रयास से लड़कियों में न केवल खेल के प्रति रुचि बढ़ी है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, टीम वर्क और नेतृत्व की भावना भी विकसित हो रही है। कोच राजबाला की लगन ने साबित कर दिया है कि खेल किसी भी सामाजिक और मानसिक बाधा को पार कर सकता है।
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धारनियां से भी आती हैं बेटियां



कोच राजबाला के समर्पण और प्रशिक्षण का असर इतना गहरा है कि अब आस-पास के गांवों की लड़कियां भी उनसे कोचिंग लेने के लिए बड़ोपल आती हैं। बड़ोपल के पास के गांव धारनियां से भी कई लड़कियां रोजाना अभ्यास करने के लिए आती हैं। इन लड़कियों को कोच राजबाला अभ्यास करवा रही है।

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पंचायत और समाजसेवियों का मजबूत कंधा

खिलाड़ियों को तैयार करने की कोच राजबाला के अलावा गांव की पंचायत और समाजसेवी सुभाष गोदारा व अन्य लोग भी भरपूर सहयोग कर रहे हैं। सुभाष गोदारा के पिता पृथ्वी सिंह गोदारा वर्ष 1972 के समय में जोन के चैंपियन थे। अपने पिता को याद में वे समय-समय पर खिलाड़ियों के लिए हॉकी स्टिक, किट, जूतों और अन्य जरूरी सामानों की व्यवस्था करती हैं। साथ ही गांव के मैदान के रखरखाव को लेकर भी सहयोग करते हैं।


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मेरा मकसद सिर्फ हॉकी सिखाना नहीं, बल्कि इन बेटियों को आत्मविश्वासी बनाना है। खेल इन्हें अनुशासन सिखाता है और उन्हें समाज में सम्मान से सिर उठाकर जीना सिखाता है।

- राजबाला, हॉकी कोच गांव बड़ोपल।
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