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Fatehabad News: 250 साल पुराने बाबा मनसागर धाम पर मेला, श्रद्धालुओं ने मांगीं मन्नतें
Tue, 21 Oct 2025 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 21 Oct 2025 10:50 PM IST
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ढि़ंगसरा में बाबा मनसागर धाम पर मन्नतें मांगेते श्रद्धालु। स्त्रोत : संवाद
भट्टू कलां। गांव ढिंगसरा स्थित बाबा मनसागर धाम में दीपावली पर्व के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया। हजारों की संख्या में लोग बाबा मनसागर महाराज के दरबार में पहुंचे और खील, पतासे, नमक व बुहारी (झाड़ू) का प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगीं।
मेले में दिनभर रौनक बनी रही। श्रद्धालुओं ने मंदिर में माथा टेकने के बाद झूलों का आनंद लिया और विभिन्न स्टालों से खरीददारी भी की। मेला परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती रही जिससे व्यवस्था सुचारू बनी रही। इस बार दिवाली को लेकर तिथियों में अंतर होने के कारण कुछ श्रद्धालुओं ने 20 को और कुछ ने 21 अक्तूबर को पूजा की।
इसी कारण दो दिन तक श्रद्धालु धाम पर पहुंचते रहे। जिससे एक ही दिन में अत्यधिक भीड़ नहीं हुई और व्यवस्था बेहतर बनी रही। मंदिर कमेटी की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया। इसमें काफी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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बाबा मनसागर धाम का इतिहास और मान्यता
करीब 250 वर्ष पूर्व, गांव ढिंगसरा के आसपास के टीले और वृक्षों से घिरे स्थान पर मनसा गिरी महाराज ने तपस्या की थी। उनके पांच शिष्य थे। बाबा ने समाधि लेने से पूर्व अपने चेलों से कहा था कि जो भी व्यक्ति इस स्थान पर श्रद्धा से खील, पतासे, नमक व बुहारी का प्रसाद चढ़ाएगा, उसे दाद, खाज, फोड़े-फुंसी व मस्सों जैसे रोगों से मुक्ति मिलेगी। बाबा की समाधि के बाद धीरे-धीरे यहां धार्मिक आस्था बढ़ती गई। मंदिर की भूमि लगभग पांच एकड़ में फैली है, जो नाहर सिंह राठौड़ के वंशजों की बताई जाती है। पहले यहां एक छोटा सा मंदिर था, लेकिन अब इसे आधुनिक रूप देकर भव्य मंदिर में तब्दील कर दिया गया है। मंदिर परिसर में एक ओर भगवान हनुमान की मूर्ति और दूसरी ओर बाबा मनसागर महाराज की प्रतिमा स्थापित है। यहां एक जोहड़ (तालाब) भी है, जिसकी मिट्टी को पवित्र मानते हुए महिलाएं और बच्चे निकालते हैं।
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मन्दिर में 19 साल से जल रही है अखंड ज्योत
मन्दिर में 2006 से लगातार अखंड ज्योत प्रज्वलित है। वहीं पास में ही बाबा के पांच शिष्यों की गुंबद भी बनी है। मंदिर में मनसागर सेवा समिति का गठन किया हुआ है जो यहां की व्यवस्था के साथ-साथ मेले के दिन भंडारा व समय-समय पर अन्य सामाजिक, धार्मिक कार्यों में सहयोग करती है।
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मेले में दिनभर रौनक बनी रही। श्रद्धालुओं ने मंदिर में माथा टेकने के बाद झूलों का आनंद लिया और विभिन्न स्टालों से खरीददारी भी की। मेला परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती रही जिससे व्यवस्था सुचारू बनी रही। इस बार दिवाली को लेकर तिथियों में अंतर होने के कारण कुछ श्रद्धालुओं ने 20 को और कुछ ने 21 अक्तूबर को पूजा की।
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इसी कारण दो दिन तक श्रद्धालु धाम पर पहुंचते रहे। जिससे एक ही दिन में अत्यधिक भीड़ नहीं हुई और व्यवस्था बेहतर बनी रही। मंदिर कमेटी की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया। इसमें काफी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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बाबा मनसागर धाम का इतिहास और मान्यता
करीब 250 वर्ष पूर्व, गांव ढिंगसरा के आसपास के टीले और वृक्षों से घिरे स्थान पर मनसा गिरी महाराज ने तपस्या की थी। उनके पांच शिष्य थे। बाबा ने समाधि लेने से पूर्व अपने चेलों से कहा था कि जो भी व्यक्ति इस स्थान पर श्रद्धा से खील, पतासे, नमक व बुहारी का प्रसाद चढ़ाएगा, उसे दाद, खाज, फोड़े-फुंसी व मस्सों जैसे रोगों से मुक्ति मिलेगी। बाबा की समाधि के बाद धीरे-धीरे यहां धार्मिक आस्था बढ़ती गई। मंदिर की भूमि लगभग पांच एकड़ में फैली है, जो नाहर सिंह राठौड़ के वंशजों की बताई जाती है। पहले यहां एक छोटा सा मंदिर था, लेकिन अब इसे आधुनिक रूप देकर भव्य मंदिर में तब्दील कर दिया गया है। मंदिर परिसर में एक ओर भगवान हनुमान की मूर्ति और दूसरी ओर बाबा मनसागर महाराज की प्रतिमा स्थापित है। यहां एक जोहड़ (तालाब) भी है, जिसकी मिट्टी को पवित्र मानते हुए महिलाएं और बच्चे निकालते हैं।
मन्दिर में 19 साल से जल रही है अखंड ज्योत
मन्दिर में 2006 से लगातार अखंड ज्योत प्रज्वलित है। वहीं पास में ही बाबा के पांच शिष्यों की गुंबद भी बनी है। मंदिर में मनसागर सेवा समिति का गठन किया हुआ है जो यहां की व्यवस्था के साथ-साथ मेले के दिन भंडारा व समय-समय पर अन्य सामाजिक, धार्मिक कार्यों में सहयोग करती है।